उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 में दलित समाज के वोट निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यही कारण है कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में बड़ा दलित कार्ड खेल दिया है। उत्तर प्रदेश में दलित समाज का चेहरा बन रहे चन्द्रशेखर आजाद रावण की एक बड़ी मांग को मानकर भाजपा ने दलित कार्ड चल दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 में दलित समाज के वोट निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यही कारण है कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में बड़ा दलित कार्ड खेल दिया है। उत्तर प्रदेश में दलित समाज का चेहरा बन रहे चन्द्रशेखर आजाद रावण की एक बड़ी मांग को मानकर भाजपा ने दलित कार्ड चल दिया है। मजेदार बात यह है कि भाजपा ने दलित नेता चन्द्रशेखर आजाद रावण के दांव के द्वारा ही बड़ा दलित कार्ड चल दिया है।
आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देहरादून से जोडऩे के लिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बनाया गया है। इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-वे से पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश सीधा देहरादून के साथ जुड़ गया है। 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के लिए 14 अप्रैल की तारीख तय करने के पीछे बड़ी राजनीतिक योजना है। दरअसल 14 अप्रैल को भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है। उत्तर प्रदेश में दलित समाज को बड़ा संदेश देने के मकसद से एक्सप्रेसवे का उद्घाटन डॉ. अंबेडकर की जयंती के दिन करने का फैसला किया गया है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के दलित नेता चन्द्रशेखर आजाद रावण ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर मार्ग रखने की मांग उठाई थी। भाजपा की सरकार ने चन्द्रशेखर आजाद रावण की मांग को मानकर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर समर्पित करने की घोषणा कर दी है।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 को देखते हुए भाजपा ने बड़ा दांव चला है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को डॉ. भीमराव अंबेडकर को समर्पित करके भाजपा दलित समाज को यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा दलित समाज को खूब सम्मान देने का काम कर रही है। तमाम राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 के लिए यह भाजपा का बड़ा चुनाव दांव है। भाजपा इस दांव के द्वारा दलित समाज को बड़ा संदेश देने में सफल हो सकती है।
दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर देहरादून तक जाने वाला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े भाग को आपस में जोड़ रहा है। यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत से होकर गुजरता है। सहारनपुर में करीब 84 किमी के दायरे में यह एक्सप्रेसवे है। भाजपा के लिए यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर लगातार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ जैसे जिलों में दलित मतदाता कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करते हैं। ऐसे में एक्सप्रेसवे के लोकार्पण को विकास के साथ सामाजिक संदेश से जोडक़र देखा जा रहा है। अनुसूचित समाज को साधने के लिए भाजपा का यह बहुत बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है।
सबको पता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 में दलित वोट बैंक बहुत अहम होने वाला है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को डॉ. भीमराव अंबडेकर के नाम पर समर्पित करने से उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस दांव का कितना फायदा होगा यह तो विधानसभा के चुनाव के नतीजों से ही पता चलेगा। इतना तय है कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा दलित कार्ड चल दिया है। UP News