गांव के स्कूल से पढ़ाई, बैंक की नौकरी, फिर UPSC में सफलता… 1994 बैच के आईपीएस अनुराग धनकड़ का सफर युवाओं के लिए मिसाल बना। संदिग्ध मौत के बाद परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनकड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। उनके निधन की खबर मिलते ही पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्य तुरंत त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए, जबकि गांव में लोग इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं। मामले की जांच जारी है और अधिकारियों ने अभी तक मौत के कारण पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
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अनुराग धनकड़ मूल रूप से बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के निवासी थे। गांव में उनका परिवार "हवेली वाले" परिवार के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि अनुराग धनकड़ और उनके भाइयों का बचपन इसी पैतृक हवेली में बीता। हालांकि नौकरी की वजह से परिवार वर्षों पहले गांव से बाहर बस गया। बताया जाता है कि करीब 25 वर्ष पहले वह एक पारिवारिक समारोह में गांव आए थे, इसके बाद दोबारा गांव नहीं आ सके।
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अनुराग धनकड़ ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद सरूरपुर खेड़की इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट और बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी (कृषि) की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने सिंडिकेट बैंक में फील्ड ऑफिसर के रूप में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। नौकरी के साथ उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखी और वर्ष 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बने।
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तीन दशक से अधिक लंबे करियर में अनुराग धनकड़ ने CBI में एसपी, डीआईजी, ज्वाइंट डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से जुड़े नीरव मोदी मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वह BSF, CISF, संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन तथा 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम (SIT) के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके थे। मई 2025 में उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था।
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परिजनों के अनुसार अनुराग धनकड़ 10 जुलाई को अपनी पत्नी कल्पना के साथ बड़ौत आए थे। दिल्ली में एक बैठक में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने छोटे भाई रविराज धनकड़ से मुलाकात की और परिवार के साथ समय बिताया। परिवार का कहना है कि उस दौरान उनके व्यवहार से किसी तरह के मानसिक तनाव का कोई संकेत नहीं मिला।
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अनुराग धनकड़ के परिजनों और रिश्तेदारों का कहना है कि वह बेहद शांत, मिलनसार और संतुलित व्यक्तित्व के अधिकारी थे। उनके ममेरे भाई अमित कुमार ने कहा कि मीडिया में आत्महत्या की जो बातें सामने आ रही हैं, उन पर परिवार को विश्वास नहीं है। उनका कहना है कि अनुराग हर कठिन परिस्थिति का धैर्य से सामना करने वाले व्यक्ति थे। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय में हुई इस घटना के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम जांच में जुटी है। शुरुआती रिपोर्टों में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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