MLC चुनाव की मतगणना विधायक-सांसद चुनाव से कितनी अलग होती है ? जानिए उत्तर प्रदेश की 11 MLC सीटों पर जीत का कोटा, पहली वरीयता के वोट और मतों के ट्रांसफर से नतीजे तय होने का पूरा गणित।

UP News : उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना को लेकर उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। प्रदेश की 11 MLC सीटों के लिए 152 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था और 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव की मतगणना लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग होती है। आम चुनावों में जहां सामान्य तौर पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है, वहीं इन MLC चुनावों में वरीयता के आधार पर मतदान और निर्धारित कोटा अहम भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से मतगणना में ज्यादा समय लग सकता है। UP News
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शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में उन्हीं मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार होता है, जिनके नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होते हैं। इन चुनावों में EVM के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। मतदाता बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के सामने अंक लिखकर अपनी पसंद का वरीयता क्रम दर्ज करते हैं। UP News
मतदाता अपनी पसंद के अनुसार वरीयताएं दर्ज कर सकता है। बैलेट पेपर पर निर्धारित निर्देशों का पालन करना जरूरी होता है। गलत तरीके से वरीयता दर्ज करने या नियमों का उल्लंघन करने पर मतपत्र अवैध घोषित हो सकता है। UP News
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मतदान पूरा होने के बाद मतपेटियों को निर्धारित मतगणना केंद्रों पर लाया जाता है। सबसे पहले मतपत्रों की जांच की जाती है और वैध तथा अवैध मतपत्र अलग किए जाते हैं। इसके बाद उम्मीदवारों को मिले प्रथम वरीयता के मतों की गिनती होती है। पहली गिनती में यदि किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी कोटा मिल जाता है, तो उसे विजयी घोषित किया जा सकता है। यदि कोई भी उम्मीदवार निर्धारित कोटे तक नहीं पहुंचता, तो लागू चुनाव नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है। UP News
जीत का कोटा वह न्यूनतम मत संख्या है, जिसे हासिल करने पर उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित किया जा सकता है। एक सीट के लिए होने वाले ऐसे चुनाव में सामान्य गणना के अनुसार कुल वैध मतों को दो से विभाजित करके उसमें एक जोड़ने पर आवश्यक कोटा मिलता है। उदाहरण: मान लीजिए किसी निर्वाचन क्षेत्र में कुल 20,000 वैध वोट पड़े हैं। ऐसी स्थिति में जीत का कोटा 10,001 वोट होगा। यदि किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता की गिनती में ही यह संख्या मिल जाती है, तो वह जीत सकता है। UP News
यदि किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता के मतों से निर्धारित कोटा नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को मतगणना से बाहर करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसके बाद उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता देखी जाती है और नियमों के अनुसार संबंधित मत शेष उम्मीदवारों के खाते में स्थानांतरित किए जाते हैं। इसके बाद दोबारा मतों की स्थिति और जीत के कोटे की जांच होती है। यदि तब भी किसी उम्मीदवार को जरूरी मत नहीं मिलते, तो लागू नियमों के अनुसार आगे की गणना की जाती है। जिन मतपत्रों पर आगे की वैध वरीयता दर्ज नहीं होती, उन्हें नियमों के अनुसार आगे की गणना में शामिल नहीं किया जा सकता। इसी प्रक्रिया के कारण कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना लंबी चल सकती है। UP News
विधानसभा और लोकसभा चुनाव: आम तौर पर EVM में दर्ज मतों की गिनती होती है। उम्मीदवारों को मिले कुल वोटों की तुलना की जाती है और सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार विजेता बनता है।
शिक्षक-स्नातक MLC चुनाव: बैलेट पेपर पर दर्ज वरीयताओं के आधार पर मतगणना होती है। जीत के लिए निर्धारित कोटा महत्वपूर्ण होता है। पहली गिनती में फैसला नहीं होने पर मतों के हस्तांतरण और उम्मीदवारों को बाहर करने की प्रक्रिया के जरिए नतीजा तय किया जा सकता है। UP News
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