बांदा की एक विशेष अदालत ने बाल यौन शोषण और डार्क वेब पर अश्लील सामग्री बेचने के जघन्य मामले में चित्रकूट निवासी रामभवन कुशवाहा और उनकी पत्नी दुर्गावती को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि बांदा अदालत के इतिहास में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा दी गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बांदा की एक विशेष अदालत ने बाल यौन शोषण और डार्क वेब पर अश्लील सामग्री बेचने के जघन्य मामले में चित्रकूट निवासी रामभवन कुशवाहा और उनकी पत्नी दुर्गावती को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि बांदा अदालत के इतिहास में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा दी गई है।
31 अक्टूबर 2020 को अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इण्टरपोल ने नई दिल्ली स्थित सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) मुख्यालय को ई-मेल के जरिए सूचना भेजी। शिकायत में कहा गया था कि एक भारतीय नागरिक डार्क वेब के माध्यम से बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो और तस्वीरें कई देशों में बेच रहा है। इंटरपोल, जो 195 देशों में सक्रिय है, से मिली इस सूचना के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच एजेंसियां बांदा और चित्रकूट क्षेत्र तक पहुंचीं।
नवंबर 2020 में सीबीआई टीम ने नरैनी क्षेत्र में छापेमारी कर दंपति को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान एक पेन ड्राइव बरामद हुई, जिसमें 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और आसपास के इलाकों के छोटे बच्चों को निशाना बनाया। एजेंसियों के अनुसार, तीन साल तक बच्चों का यौन शोषण कर उसकी रिकॉर्डिंग की गई और फिर सामग्री को डार्क वेब व अन्य आॅनलाइन माध्यमों पर बेचा गया। यह नेटवर्क 47 देशों तक फैला बताया गया।
मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। 5 जून 2023 से शुरू हुई अदालती कार्यवाही में 74 गवाह पेश किए गए, जिनमें 24 पीड़ित बच्चे भी शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने डिजिटल साक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय इनपुट और गवाहियों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता साबित करने का दावा किया।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने फैसले में कहा कि अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला है। अदालत ने इसे रेयरेस्ट आॅफ द रेयर श्रेणी का मामला मानते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। बांदा अदालत ने पहले भी गंभीर अपराधों में मौत की सजा सुनाई है, लेकिन किसी महिला को यह दंड पहली बार दिया गया। यह मामला बाल यौन शोषण के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर तब जब अपराध डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हो।