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प्रदेश की नौकरशाही इन दिनों एक ऐसे विवाद से हिल गई है, जिसने आईफोन और एप्पल वॉच को सिर्फ टेक गैजेट नहीं बल्कि प्रशासनिक टकराव का केंद्र बना दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही इन दिनों एक ऐसे विवाद से हिल गई है, जिसने आईफोन और एप्पल वॉच को सिर्फ टेक गैजेट नहीं बल्कि प्रशासनिक टकराव का केंद्र बना दिया है। फिरोजाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी आईएएस रमेश रंजन और टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा के बीच उठा यह विवाद अब पूरे सिस्टम में चर्चा का विषय बन चुका है।
पूरा विवाद उस समय सामने आया जब तहसीलदार राखी शर्मा ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया कि डीएम रमेश रंजन ने अपने ओएसडी के जरिए उनसे लगभग 1.75 लाख रुपये कीमत का आईफोन 15 प्रो मैक्स और एप्पल वॉच उपहार के तौर पर मंगवाया था। आरोप यह भी है कि यह खरीदारी आगरा के एक शोरूम से देर रात विशेष तौर पर कराई गई।
मामले को और गंभीर बनाते हुए तहसीलदार ने दावा किया कि उनके पास खरीद का बिल मौजूद है और जिस फोन की बात हो रही है, उसमें अब भी डीएम की सिम इस्तेमाल हो रही थी। इसी दावे ने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक गलियारों में और अधिक विस्फोटक बना दिया।
विवाद सिर्फ महंगे गिफ्ट तक सीमित नहीं रहा। राखी शर्मा ने आरोप लगाया कि एक जांच रिपोर्ट को मनचाहे तरीके से तैयार करने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। इनकार करने पर उनका मानसिक उत्पीड़न हुआ और कथित तौर पर उनकी कई महीनों की सैलरी भी रोक दी गई।
आईएएस रमेश रंजन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और साजिशन लगाए गए आरोप बताया। उनका कहना है कि कार्रवाई से बचने के लिए यह पूरा विवाद खड़ा किया गया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद योगी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया। 38 आईएएस अधिकारियों के तबादला सूची में रमेश रंजन को फिरोजाबाद डीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद भेज दिया गया। साथ ही तहसीलदार राखी शर्मा को भी पहले ही फील्ड से हटाया जा चुका था। उनकी जगह अब संतोष कुमार शर्मा को फिरोजाबाद का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। यह मामला अब सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था में पावर स्ट्रगल बनाम भ्रष्टाचार के आरोप की बड़ी बहस बन गया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त स्तर पर जारी है।
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