उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित IIT-BHU के एक शोध ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे को लेकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिस ई-वेस्ट को आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसमें मौजूद कीमती धातुओं को निकालने की दिशा में संस्थान के शोध ने अहम संभावनाएं सामने रखी हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित IIT-BHU के एक शोध ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे को लेकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिस ई-वेस्ट को आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसमें मौजूद कीमती धातुओं को निकालने की दिशा में संस्थान के शोध ने अहम संभावनाएं सामने रखी हैं। रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में IIT-BHU के प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने अपना शोध प्रस्तुत किया, जिसमें ई-वेस्ट से बड़ी मात्रा में सोना और कॉपर रिकवर करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। UP News
IIT-BHU वाराणसी के धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने रूस के नालचिक में आयोजित ‘GEO-SUSTAINABILITY BRICS 2026’ सम्मेलन में ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग पर अपना शोध प्रस्तुत किया। 23 से 25 सितंबर तक चले इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। प्रो. सिंह को सम्मेलन में प्लेनरी वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। इसके साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समिति का सदस्य भी बनाया गया। सम्मेलन का आयोजन कबार्डिनो-बालकारियन स्टेट यूनिवर्सिटी और हाई-माउंटेन जियोफिजिकल इंस्टीट्यूट ने किया था। UP News
प्रो. सिंह ने ‘Recycling of electronic waste for sustainable environmental management’ विषय पर शोध प्रस्तुत किया। अध्ययन में इलेक्ट्रॉनिक कचरे से मूल्यवान धातुओं को निकालने के लिए एकीकृत रिसाइक्लिंग प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। शोध के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कचरे में सीसा, पारा, कैडमियम और ब्रोमिनयुक्त एपॉक्सी रेजिन जैसे विषैले पदार्थ मौजूद हो सकते हैं। दूसरी ओर, Printed Circuit Boards यानी PCB में सोना, चांदी, तांबा और टैंटलम जैसी मूल्यवान धातुएं मौजूद होती हैं। UP News
शोध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ई-वेस्ट से धातुओं की रिकवरी से जुड़ा है। अध्ययन के मुताबिक डिलैमिनेटेड PCB से लीचिंग और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्रक्रियाओं के जरिए 100 प्रतिशत कॉपर और 92 प्रतिशत गोल्ड की रिकवरी प्राप्त की गई। इसके अलावा टैंटलम कैपेसिटर से 99 प्रतिशत मैंगनीज की रिकवरी हुई, जिसकी शुद्धता 99.6 प्रतिशत रही। शोध में बेहद कम मात्रा यानी पीपीएम स्तर पर मौजूद धातुओं की रिकवरी के लिए पॉलिमर इंक्लूजन मेम्ब्रेन तकनीक का भी अध्ययन किया गया। UP News
शोध में ई-वेस्ट से अधिकतम मूल्यवान पदार्थों की रिकवरी के लिए अलग-अलग तकनीकों को एकीकृत रूप से अपनाने का सुझाव दिया गया है। इनमें हाइड्रोमेटलर्जी, बायो-हाइड्रोमेटलर्जी, इलेक्ट्रो-विनिंग, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन और पॉलिमर इंक्लूजन मेम्ब्रेन जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल कीमती धातुओं को वापस हासिल करना नहीं है, बल्कि ई-वेस्ट के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए सतत संसाधन प्रबंधन और जीरो-वेस्ट की दिशा में आगे बढ़ना भी है। UP News
GEO-SUSTAINABILITY BRICS 2026 सम्मेलन में रूस, भारत, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की और उज्बेकिस्तान समेत कई देशों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय स्थिरता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। IIT-BHU के इस शोध से ई-वेस्ट को पर्यावरणीय चुनौती के साथ-साथ महत्वपूर्ण संसाधनों के संभावित स्रोत के रूप में देखने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल सामने आई है। UP News
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