उत्तर प्रदेश में सामने आए किडनी कांड ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। जांच में लगातार ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो बताते हैं कि अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का यह काला कारोबार केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल पूरे प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ है।

UP News : उत्तर प्रदेश में सामने आए किडनी कांड ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। जांच में लगातार ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो बताते हैं कि अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का यह काला कारोबार केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल पूरे प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि कई शहरों के निजी अस्पताल, दलाल और नकली डॉक्टर मिलकर करोड़ों रुपये का यह धंधा चला रहे थे।
ताजा मामले में कानपुर से इस काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि एक ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन ने खुद को यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर बताकर कई अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर दिए। बताया जा रहा है कि उसने 40 से 50 तक अवैध ऑपरेशन किए। इस पूरे रैकेट में कई डॉक्टर, अस्पताल संचालक और दलाल शामिल बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि कई डॉक्टर और अस्पताल संचालक फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने कई शहरों में छापेमारी शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया है कि यह रैकेट केवल कानपुर तक सीमित नहीं था। इसके तार मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और दिल्ली तक जुड़े हुए पाए गए हैं। कई अस्पतालों पर जांच शुरू कर दी गई है और कुछ अस्पतालों के लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने अलग-अलग शहरों में अलग-अलग भूमिकाएं तय कर रखी थीं—
इस तरह पूरे नेटवर्क को कई शहरों में फैलाकर संचालित किया जा रहा था।
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि कई बार किडनी डोनर और मरीज की जांच उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में की जाती थी जबकि ट्रांसप्लांट दिल्ली के कुछ निजी अस्पतालों में कराया जाता था। ऑपरेशन के बाद मरीजों को दूसरे शहरों में शिफ्ट कर दिया जाता था ताकि किसी को शक न हो। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य बड़े शहरों और नेपाल तक भी जुड़े हो सकते हैं।
इस काले कारोबार का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इसमें गरीब और बेरोजगार युवाओं को लालच देकर फंसाया जाता था। दलाल उन्हें नौकरी या पैसों का लालच देते थे और फिर किडनी बेचने के लिए मजबूर करते थे। कई मामलों में उन्हें पूरी रकम भी नहीं मिलती थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किडनी और अन्य अंगों की मांग ज्यादा होने के कारण अवैध अंग व्यापार बढ़ रहा है। मांग और उपलब्धता के बीच बड़े अंतर के कारण दुनिया के कई देशों में यह काला बाजार फल-फूल रहा है।
किडनी कांड के बाद उत्तर प्रदेश में कई अस्पतालों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने कुछ अस्पतालों को सील किया है और कई डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए गए हैं। जांच एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने संयुक्त जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और प्रदेश के अस्पतालों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
किडनी कांड ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे बिना अनुमति के इतने बड़े स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों की निगरानी, अंगदान की पारदर्शी व्यवस्था और सख्त कानून लागू किए बिना ऐसे रैकेट को रोकना मुश्किल होगा। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस काले कारोबार से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। UP News