
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज निदेशालय की ओर से जारी एक कथित जातिवादी आदेश ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आदेश में यादव और मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा की गई कथित अवैध कब्जेदारी के खिलाफ विशेष कार्रवाई की बात कही गई थी। जैसे ही यह निर्देश सार्वजनिक हुआ, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद ने इसे 'संविधान विरोधी' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। यह मामला तब और तूल पकड़ गया जब बलिया के जिला पंचायती राज अधिकारी ने इसे लेकर ज़मीनी स्तर पर निर्देश जारी किए। Uttar Pradesh Samachar
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस आदेश को संविधान की भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर कुछ अवैध है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जाति या धर्म विशेष को निशाना बनाकर कार्रवाई करना सीधा-सीधा भेदभाव है। न्यायपालिका को इसका स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। हम अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को जितनी प्रताड़ना दी जाएगी, उनकी एकता उतनी ही मजबूत होगी।
नगीना से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने आदेश को 'राजनीति से प्रेरित, असंवैधानिक और सामाजिक समरसता के खिलाफ' बताया। उन्होंने मांग की कि "सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज कर सेवा से बर्खास्त करने जैसी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यह आदेश न सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है, बल्कि सरकारी सेवा आचरण नियमावली की भी अवहेलना करता है, जिसमें स्पष्ट रूप से जातीय और धार्मिक आधार पर भेदभाव पर प्रतिबंध है।
दरअसल, 29 जुलाई को पंचायती राज निदेशालय द्वारा सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए एक पत्र में प्रदेश की 57,691 ग्राम पंचायतों में यादव और मुस्लिम समुदाय द्वारा की गई कथित अवैध कब्जेदारियों को हटाने का निर्देश दिया गया था।इस पत्र में पंचायत की जमीन, तालाब, खाद-गड्ढे, श्मशान घाट, खेल मैदान और पंचायत भवन आदि की सूची शामिल थी, जिन्हें कथित तौर पर विशेष जाति और धर्म के लोगों ने कब्जा किया है। निर्देश में जिलाधिकारियों से ऐसे कब्जों को चिन्हित कर मुक्त कराने की बात कही गई थी।इसके साथ ही बलिया के डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने भी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को फॉलो-अप आदेश भेजकर “नामित समुदायों” के कब्जे हटवाने का अभियान चलाने को कहा था, जिससे मामला और भड़क गया।
जैसे ही विवाद बढ़ा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मामले में हस्तक्षेप करते हुए आदेश को रद्द कर दिया और जिम्मेदार अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सीएम ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की जातिगत या सांप्रदायिक भेदभावपूर्ण कार्रवाई की कोई जगह नहीं है। Uttar Pradesh Samachar