प्रदेश के कानपुर से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक विवाहिता ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे तंत्र-मंत्र के नाम पर अमानवीय यातनाएं दी गईं। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश के कानपुर से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक विवाहिता ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे तंत्र-मंत्र के नाम पर अमानवीय यातनाएं दी गईं। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़िता के अनुसार, ससुराल में कथित धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर उसे जबरन शामिल किया जाता था। आरोप है कि इन रस्मों के दौरान उसे निर्वस्त्र कर पूजा में बैठाया जाता था, जो न सिर्फ शर्मनाक बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है। विरोध करने पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में दहेज उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि शादी के समय उसके परिवार ने अपनी क्षमता से अधिक दान-दहेज दिया था, जिसमें महंगी कार, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामान शामिल थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें खत्म नहीं हुईं और समय के साथ मकान, भारी मात्रा में सोना और नकद राशि की अतिरिक्त मांग की जाने लगी।
पीड़िता का विवाह मार्च 2024 में हुआ था। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल में उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया।
* देर रात तक चलने वाली कथित पूजा में जबरन शामिल करना
* विरोध करने पर मारपीट और धमकी
* भय और दबाव का माहौल बनाकर रखना
इन सब परिस्थितियों ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया।
लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़िता वर्ष 2025 में अपने मायके लौट आई। यहां उसने अपने परिवार को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजनों के साथ मिलकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पीड़िता का यह भी आरोप है कि ससुराल वालों ने उसके स्त्रीधन और कीमती जेवरात अपने पास रख लिए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न केवल दहेज प्रथा बल्कि अंधविश्वास के नाम पर होने वाले अपराधों को भी उजागर करती है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता दोनों की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।