अदालत ने चार्जशीट दाखिल होने के महज 56 दिनों के भीतर यह फैसला सुनाकर सख्त संदेश दिया है। दोषी अमित रैकवार को अदालत ने आदेश दिया कि उसे तब तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखा जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। इसके साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में छह वर्षीय मासूम के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने चार्जशीट दाखिल होने के महज 56 दिनों के भीतर यह फैसला सुनाकर सख्त संदेश दिया है। दोषी अमित रैकवार को अदालत ने आदेश दिया कि उसे तब तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखा जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। इसके साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला बांदा जिले के कालिंजर थाना क्षेत्र का है। 25 जुलाई 2025 को आरोपी अमित रैकवार (30) ने टॉफी देने का झांसा देकर छह साल की बच्ची को अपने घर बुलाया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी देकर मौके से फरार हो गया। डरी-सहमी बच्ची किसी तरह घर पहुंची। उस वक्त उसके माता-पिता खेत में काम कर रहे थे। लौटने पर बच्ची की हालत देख परिजनों ने उससे पूछताछ की, तब उसने आपबीती बताई। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालत नाजुक होने पर पहले उसे बांदा मेडिकल कॉलेज और फिर कानपुर रेफर किया गया। कानपुर में बच्ची 11 दिनों तक भर्ती रही और उसका आॅपरेशन किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं। उसके हाथ में फ्रैक्चर, गले और जीभ पर गहरे जख्म, साथ ही दांतों से काटे जाने के निशान पाए गए। हालत इतनी गंभीर थी कि पुलिस भी देखकर स्तब्ध रह गई।
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए कई टीमें गठित कीं। एक दिन बाद ही 26 जुलाई 2025 को आरोपी को गुढ़ाकला क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस की कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लगी और वह घायल हो गया।
पुलिस ने मेडिकल, फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों को मजबूत तरीके से संकलित कर 7 अक्टूबर 2025 को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान 10 गवाहों को पेश किया गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे अपराधों में नरमी पीड़िता के साथ अन्याय होगी। फैसला सुनते ही बच्ची के माता-पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि न्यायालय के इस निर्णय से उन्हें न्याय मिला है और उन्हें विश्वास हुआ है कि कानून पीड़ितों के साथ खड़ा है।