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प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मौका था बड़े मंगल का, जब हनुमान भक्तों की भारी भीड़ मंदिरों और भंडारों में उमड़ी।

UP Noida : उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मौका था बड़े मंगल का, जब हनुमान भक्तों की भारी भीड़ मंदिरों और भंडारों में उमड़ी। इसी दौरान विपक्ष के दो बड़े चेहरे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव हनुमान मंदिरों में दर्शन करते नजर आए, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। UP Noida
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर थे। इस दौरान वे प्रसिद्ध चुरुवा हनुमान मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राहुल गांधी ने मंदिर में बजरंग बली से देश की शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में उनकी उपस्थिति के दौरान कई श्रद्धालु भी मौजूद रहे और उन्होंने शांत भाव से पूजा में हिस्सा लिया।
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इसी दिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ में आयोजित बड़े मंगल के भंडारे में पहुंचे। उन्होंने हनुमान मंदिर में दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं के बीच बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। अखिलेश यादव ने न केवल आरती में भाग लिया बल्कि भंडारे में मौजूद लोगों के साथ सामान्य भक्त की तरह प्रसाद भी ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं भी भक्तों को प्रसाद वितरण में सहयोग किया।
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बड़े मंगल के अवसर पर प्रदेश भर के हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जगह-जगह भंडारे आयोजित किए गए, जहां लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक वातावरण के बीच राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अधिक चर्चित बना दिया।
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राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मंदिर दर्शन और भंडारे में शामिल होने की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गईं। इन तस्वीरों को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चचार्एं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों और चुनावी रणनीति से जोड़कर विश्लेषित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है कि चुनावी माहौल के आसपास राजनीतिक नेता धार्मिक स्थलों पर सक्रिय नजर आते हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर नेता धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दौरों का असर जनमानस पर पड़ता है और यह नेताओं की छवि निर्माण में भी भूमिका निभाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बड़े मंगल जैसे अवसरों पर नेताओं की सक्रियता केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी होते हैं। आने वाले चुनावों को देखते हुए इन गतिविधियों को जनता के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।UP Noida
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