आईपीएस अर्पित विजयवर्गीय की पूरी कहानी जानिए। आईआईटी कानपुर से पढ़ाई, बैंक में 8 लाख की नौकरी छोड़कर आईपीएस बनने और लखनऊ के नए डीसीपी ट्रैफिक बनने तक का सफर।

उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बीच राजधानी लखनऊ की यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी अर्पित विजयवर्गीय को सौंपी गई है। बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक (SP) पद से स्थानांतरित होकर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे अर्पित विजयवर्गीय को पुलिस उपायुक्त (DCP Traffic) बनाया गया है। उनके सामने राजधानी की जाम से जूझती सड़कों पर यातायात को सुचारु बनाने और व्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती होगी। लेकिन अर्पित विजयवर्गीय की पहचान सिर्फ एक पुलिस अधिकारी तक सीमित नहीं है। राजस्थान के कोटा से निकलकर IIT कानपुर में पढ़ाई, बैंक में आठ लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी और फिर सिविल सेवा के लिए संघर्ष—उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा देने वाला है। तीन असफल प्रयासों के बाद चौथे प्रयास में IPS बनने वाले अर्पित विजयवर्गीय की कहानी जानना दिलचस्प है।
अर्पित विजयवर्गीय 2017 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। मूल रूप से राजस्थान के कोटा के रहने वाले अर्पित ने पढ़ाई से लेकर करियर तक के सफर में कई अहम फैसले लिए। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बैंक में नौकरी की, जहां उन्हें सालाना आठ लाख रुपये के पैकेज पर काम करने का अवसर मिला। हालांकि, उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर देश और समाज के लिए काम करना था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अच्छी नौकरी छोड़ने का फैसला किया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
अर्पित विजयवर्गीय ने आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने करियर बनाने के कई रास्ते थे। इसी दौरान उन्हें बैंक में आठ लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी मिली। आमतौर पर अच्छी सैलरी वाली नौकरी को करियर की बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन अर्पित का सपना इससे अलग था। वह सिविल सेवा में जाना चाहते थे और इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ दी।
सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए लंबे समय तक मेहनत, तैयारी और धैर्य की जरूरत पड़ती है। अर्पित विजयवर्गीय को भी अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्हें शुरुआती तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारी बने। उनका यह सफर बताता है कि लक्ष्य को लेकर लगातार मेहनत और असफलताओं के बाद दोबारा प्रयास करना कितना अहम होता है।
आईपीएस बनने के बाद अर्पित विजयवर्गीय ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस विभाग की जिम्मेदारियां निभाईं। वह बरेली और सहारनपुर में सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मुजफ्फरनगर में एसपी सिटी के रूप में भी काम किया। अलग-अलग जिलों में तैनाती के दौरान उन्हें कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े कामों का अनुभव मिला।
अर्पित विजयवर्गीय को 12 मार्च 2023 को बागपत का पुलिस अधीक्षक बनाया गया था। इस पद पर उनकी जिम्मेदारी जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस प्रशासन का संचालन करने की थी। बागपत के बाद भी उनके करियर में अलग-अलग जिम्मेदारियां आती रहीं। उनकी तैनाती का सफर उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला रहा, जहां उन्होंने पुलिस अधिकारी के रूप में काम किया।
लखनऊ आने से पहले अर्पित विजयवर्गीय बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उन्होंने 15 अप्रैल 2025 को बाराबंकी के एसपी का कार्यभार संभाला था और 7 अक्टूबर 2026 तक इस पद पर रहे। इसके बाद उनका स्थानांतरण लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में किया गया। प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उन्हें राजधानी में पुलिस उपायुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने अर्पित विजयवर्गीय को डीसीपी ट्रैफिक के पद पर तैनात किया है। इस नियुक्ति के साथ ही अब राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उनसे पहले यह जिम्मेदारी रुबीना त्यागी संभाल रही थीं। उनका स्थानांतरण बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक के पद पर किया गया है।
लखनऊ जैसे बड़े शहर में यातायात का संचालन पुलिस प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शहर की व्यस्त सड़कों पर जाम की समस्या, वाहनों की बढ़ती संख्या और यातायात नियमों का पालन कराना लगातार ध्यान देने वाले विषय हैं। ऐसे में नए डीसीपी ट्रैफिक अर्पित विजयवर्गीय के सामने यातायात को सुचारु बनाए रखने की चुनौती होगी। उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रैफिक संभालने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने, सड़क पर अनुशासन बढ़ाने और लोगों को सुरक्षित आवागमन का माहौल देने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि, उनके कार्यकाल में कौन से विशेष कदम उठाए जाएंगे, यह आगे की कार्रवाई और पुलिस प्रशासन की योजनाओं से स्पष्ट होगा।
अर्पित विजयवर्गीय को उनके पुलिस सेवा के सफर में सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें 15 अगस्त 2024 और 26 जनवरी 2026 को डीजी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर से सम्मानित किया गया था। पुलिस सेवा में इस तरह के सम्मान अधिकारी के करियर का अहम हिस्सा होते हैं।
अर्पित विजयवर्गीय का सफर उन युवाओं के लिए खास है, जो अच्छे करियर विकल्प मिलने के बाद भी अपने बड़े लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं। आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई, बैंक में आठ लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी और फिर सिविल सेवा की तैयारी का फैसला उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव रहे। तीन बार असफल होने के बाद चौथे प्रयास में आईपीएस बनना उनके धैर्य और लगातार प्रयास करने की कहानी को सामने लाता है। अब अर्पित विजयवर्गीय को लखनऊ की यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी मिली है। बाराबंकी में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम करने के बाद राजधानी में उनकी नई तैनाती उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आने वाले समय में लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उनके कदमों पर लोगों की नजर रहेगी।
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