आईपीएस चिराग जैन कौन हैं? जानिए NIT जयपुर से इंजीनियरिंग, निजी नौकरी छोड़ UPSC की तैयारी, तीसरे प्रयास में IPS बनने, प्रयागराज में हनी ट्रैप रणनीति और बरेली के नए एसपी सिटी बनने तक की पूरी कहानी।

उत्तर प्रदेश में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिनमें 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी चिराग जैन का नाम भी शामिल है। आजमगढ़ में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) की जिम्मेदारी संभाल रहे चिराग जैन को अब बरेली नगर का नया एसपी सिटी बनाया गया है। वहीं, इस फेरबदल में आईपीएस विनय कुमार सिंह को मिली नई जिम्मेदारी भी चर्चा में है। चिराग जैन की पहचान सिर्फ एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी सूझबूझ से जटिल मामलों को सुलझाने वाले अफसर के तौर पर भी रही है। प्रयागराज में एक अपहृत युवती को बचाने के लिए हनी ट्रैप की रणनीति अपनाकर उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई, निजी नौकरी और यूपीएससी में लगातार प्रयासों के बाद आईपीएस बनने तक का उनका सफर भी काफी दिलचस्प है।
आईपीएस चिराग जैन उत्तर प्रदेश कैडर के 2020 बैच के अधिकारी हैं। मूल रूप से राजस्थान के डीग क्षेत्र के रहने वाले चिराग जैन ने अपनी पढ़ाई के दम पर तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने की राह चुनी थी। उन्होंने जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक निजी कंपनी में नौकरी भी मिल गई, लेकिन उनका लक्ष्य सिर्फ एक अच्छी नौकरी तक सीमित नहीं था। वह सिविल सेवा में जाकर समाज और लोगों के लिए काम करना चाहते थे। इसी सोच ने उन्हें अपने करियर की दिशा बदलने और यूपीएससी की कठिन परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
चिराग जैन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद निजी क्षेत्र में काम करना शुरू किया। हालांकि, नौकरी करने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वह सिविल सेवा में जाकर अपनी क्षमता का अलग तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने निजी नौकरी छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें अपना पूरा ध्यान एक ऐसी परीक्षा पर लगाना था, जिसमें सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर भरोसा बनाए रखा और तैयारी में जुट गए।
यूपीएससी की तैयारी के दौरान चिराग जैन को शुरुआती प्रयासों में निराशा का सामना करना पड़ा। पहले प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा की परीक्षाएं दीं। वह दोनों परीक्षाओं के मुख्य चरण तक पहुंचे, लेकिन इंटरव्यू में सफल नहीं हो सके। लगातार दो प्रयासों में अंतिम सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमियों को समझने और तैयारी के तरीके में सुधार करने पर ध्यान दिया। असफलताओं से सीख लेते हुए उन्होंने अपनी मेहनत बढ़ाई और अगले प्रयास को पहले से बेहतर बनाने की ठानी।
लगातार प्रयासों और मेहनत के बाद चिराग जैन को तीसरे प्रयास में सफलता मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 160 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया। इस सफलता के साथ इंजीनियरिंग और निजी नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर पुलिस सेवा तक पहुंच गया। आईपीएस अधिकारी बनने के बाद उनके सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध की जांच करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां आईं।
चिराग जैन की पुलिस सेवा के दौरान प्रयागराज में तैनाती का एक मामला काफी चर्चा में आया था। वर्ष 2022 में घूरपुर थाना क्षेत्र से एक युवती के अपहरण की घटना सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी युवक सोशल मीडिया पर सक्रिय था और उसे ऑनलाइन संपर्क के जरिए ट्रेस किया जा सकता था। इसी जानकारी के आधार पर चिराग जैन ने आरोपी तक पहुंचने के लिए एक अलग रणनीति अपनाई। पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक महिला की पहचान से आरोपी से संपर्क स्थापित किया। बातचीत के जरिए उससे जुड़ी जानकारियां हासिल की गईं और फिर मोबाइल नंबर तथा लोकेशन के आधार पर उसकी तलाश आगे बढ़ाई गई। इस कार्रवाई के बाद आरोपी को पकड़ने में सफलता मिली और अपहृत युवती को सुरक्षित बचा लिया गया। मामले में अपनाई गई रणनीति के कारण चिराग जैन की कार्यशैली की चर्चा हुई। यह घटना उनके करियर के उन मामलों में गिनी जाती है, जिनमें तकनीकी जानकारी और सूझबूझ का इस्तेमाल जांच को आगे बढ़ाने में अहम रहा।
प्रयागराज में तैनाती के बाद चिराग जैन ने पुलिस सेवा में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। आजमगढ़ में उन्हें अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात किया गया, जहां उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। इस पद पर रहते हुए उनका काम स्थानीय पुलिस व्यवस्था की निगरानी करना, अपराध की घटनाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करना और आम लोगों की शिकायतों पर ध्यान देना था। आजमगढ़ में उनकी तैनाती के दौरान ही उन्हें पुलिस विभाग की ओर से डीजीपी प्रशंसा चिह्न (रजत) से सम्मानित किए जाने की जानकारी सामने आई। यह सम्मान 26 जनवरी 2026 को दिए जाने की बात कही गई है।
अक्टूबर 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किए गए आईपीएस अधिकारियों के तबादलों के तहत चिराग जैन को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें आजमगढ़ के एएसपी ग्रामीण पद से स्थानांतरित कर बरेली नगर का पुलिस अधीक्षक यानी एसपी सिटी बनाया गया है। इस नई भूमिका में उन्हें शहरी क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था की निगरानी जैसे अहम काम संभालने होंगे। बरेली में उनकी प्राथमिकताओं में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, पुलिस की कार्यप्रणाली को मजबूत करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल रहने की उम्मीद है।
आजमगढ़ से तबादले के बाद चिराग जैन की विदाई के मौके पर आयोजित कार्यक्रम का एक भावुक दृश्य भी चर्चा में आया। रिपोर्टों के मुताबिक, विदाई समारोह के दौरान एक बच्चे ने उनके लिए कविता सुनाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। इस घटना ने उनके तबादले की खबर के साथ-साथ आजमगढ़ में उनके कार्यकाल और लोगों से जुड़ाव को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी। किसी अधिकारी की विदाई के समय इस तरह का भावनात्मक पल अक्सर उसके कार्यकाल की यादों और स्थानीय लोगों के साथ बने संबंधों को सामने लाता है।
चिराग जैन की कहानी इंजीनियरिंग की पढ़ाई से शुरू होकर निजी नौकरी, यूपीएससी की तैयारी और पुलिस सेवा तक पहुंचती है। शुरुआती दो प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में आईपीएस अधिकारी बनने में कामयाबी हासिल की। प्रयागराज में अपहरण के मामले को सुलझाने के लिए अपनाई गई रणनीति ने उन्हें पहचान दिलाई, जबकि आजमगढ़ में उनकी तैनाती के बाद अब बरेली नगर के एसपी सिटी के रूप में नई जिम्मेदारी मिली है। उनकी आगे की चुनौती बरेली में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और पुलिसिंग को प्रभावी ढंग से संचालित करने की होगी।
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