IPS मानुष पारीक की जीवनी जानें। राजस्थान के कारी गांव से यूपीएससी में 146वीं रैंक, गोरखपुर में कार्रवाई, बरेली के साइको किलर केस और आजमगढ़ में नई तैनाती तक का सफर पढ़ें।

उत्तर प्रदेश में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बीच बरेली के एसपी सिटी रहे IPS मानुष पारीक को आजमगढ़ का एसपी सिटी बनाया गया है। 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी मानुष पारीक अपनी पुलिसिंग और चर्चित मामलों में जांच की भूमिका को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। राजस्थान के एक गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल UPSC पास करने और खाकी वर्दी तक पहुंचने का उनका सफर कई दिलचस्प पड़ावों से गुजरा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की संभावनाओं के बीच उन्होंने पुलिस सेवा का रास्ता चुना। इसके बाद गाजियाबाद से गोरखपुर और फिर बरेली तक उनकी तैनाती के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने उन्हें चर्चा में ला दिया। अब आजमगढ़ में नई जिम्मेदारी के साथ उनके प्रशासनिक सफर का एक और अध्याय शुरू हो रहा है। जानिए उत्तर प्रदेश के चर्चित IPS अधिकारी मानुष पारीक का पूरा प्रशासनिक सफर।
मानुष पारीक राजस्थान के झुंझुनू जिले के कारी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता मनोज पारीक चार्टर्ड अकाउंटेंट रह चुके हैं। मानुष ने शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से की। इसके बाद वह परिवार के साथ नोएडा चले गए। स्कूल के दिनों में उन्हें पढ़ाई के साथ प्रतियोगिताओं, क्विज और दूसरे कार्यक्रमों में हिस्सा लेना पसंद था। कई प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें सम्मानित भी किया गया।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद मानुष पारीक ने इंजीनियरिंग की तैयारी की। उनका चयन अजमेर के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ, जहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल कम्युनिकेशन में बीटेक किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर अच्छे पैकेज के साथ नौकरी का अवसर मिला। हालांकि, उनके मन में आईपीएस अधिकारी बनने की इच्छा थी। स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान आईपीएस अधिकारी को देखकर उनके मन में पुलिस सेवा में जाने का विचार आया था। परिवार भी चाहता था कि वह बड़े अधिकारी बनें। इसी प्रेरणा से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
मानुष पारीक को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी। अगले प्रयास में उन्होंने 146वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित हुए। इसके साथ ही उनका पुलिस अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ।
मई 2022 में मानुष पारीक को गाजियाबाद के भोजपुर थाने में पहली तैनाती मिली। यहां उन्होंने महिलाओं की शिकायतों और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। एक मामले में पड़ोसी से परेशान महिला की शिकायत पर वह रात में पुलिस टीम के साथ उसके घर पहुंचे और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कराई। इसी दौरान रोडरेज की एक घटना में बस यात्रियों के साथ मारपीट की सूचना मिली। पुलिस ने समय पर मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। इस मामले में दस लोगों को गिरफ्तार किया गया और 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
गाजियाबाद के बाद मानुष पारीक की तैनाती गोरखपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर हुई। यहां उन्होंने जमीन पर अवैध कब्जे और माफिया से जुड़ी संपत्तियों के मामलों में कार्रवाई की। विनोद उपाध्याय, जवाहर और कमलेश जैसे माफिया से जुड़े मामलों में अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की गई। गोरखपुर में पुलिस ने फर्जी तरीके से नर्सिंग कॉलेज चलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की। इसके अलावा नकली स्टांप पेपर के एक गिरोह का खुलासा कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के नकली स्टांप बरामद किए गए और छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी दौरान ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत सीसीटीवी कैमरों की मदद से निगरानी बढ़ाने की पहल भी की गई, जिसे बाद में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनाया गया।
अगस्त 2024 में बरेली में एसपी साउथ के पद पर तैनात मानुष पारीक को फरीदपुर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर रामसेवक के खिलाफ रिश्वत लेकर आरोपियों को छोड़ने की शिकायत मिली। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थाने में छापेमारी की गई। इस दौरान इंस्पेक्टर अपने आवास से भाग गया। पुलिस ने उसके कमरे की तलाशी ली, जहां से कुल 9 लाख 96 हजार रुपये बरामद हुए। जांच के बाद इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और उसे निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद मानुष पारीक काफी चर्चा में रहे।
बरेली में करीब 13 महीनों के दौरान नौ महिलाओं की हत्या के मामले सामने आए थे। ज्यादातर घटनाएं शाही और शीशगढ़ इलाके में हुई थीं। महिलाओं की हत्या का तरीका एक जैसा होने के कारण पुलिस ने सिलसिलेवार हत्याओं के एंगल से जांच शुरू की। तत्कालीन एसएसपी अनुराग आर्य ने इस मामले की जिम्मेदारी मानुष पारीक को सौंपी। पुलिस ने ऑपरेशन तलाश चलाकर कई टीमें बनाईं और स्थानीय लोगों से पूछताछ के साथ सीसीटीवी फुटेज तथा तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली। जांच के बाद कुलदीप नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उसने छह महिलाओं की हत्या करने की बात कबूल की। इस मामले में आरोपी तक पहुंचने के लिए की गई पुलिस की व्यापक जांच ने मानुष पारीक को चर्चा में ला दिया।
बरेली में एसपी सिटी के पद पर रहते हुए मानुष पारीक ने कथित तौर पर फर्जी दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज कराकर पैसे वसूलने वाले गिरोह से जुड़े मामले की जांच में भी भूमिका निभाई। फरवरी 2025 में सुधांशु अग्रवाल की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान निरंजन नाम के व्यक्ति और कुछ महिलाओं की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, गिरोह लोगों पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर उनसे पैसे मांगता था। मामले में निरंजन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
राजस्थान के कारी गांव से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने और यूपीएससी में 146वीं रैंक हासिल करने तक मानुष पारीक का सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा है। गाजियाबाद में पहली तैनाती के बाद गोरखपुर और बरेली में उन्होंने अपराध, भ्रष्टाचार और माफिया से जुड़े मामलों में काम किया। बरेली के साइको किलर केस और भ्रष्टाचार के आरोपों में हुई कार्रवाई ने उन्हें प्रदेश में चर्चा दिलाई। अब उन्हें बरेली के एसपी सिटी पद से स्थानांतरित करके आजमगढ़ का एसपी सिटी बनाया गया है। नई जिम्मेदारी के साथ उनके पुलिस सेवा के सफर का अगला अध्याय शुरू हो रहा है।
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