आईपीएस संकल्प शर्मा कौन हैं? जानिए नोएडा के नए संयुक्त पुलिस आयुक्त की पूरी बायोग्राफी, IIT रुड़की से पढ़ाई, UPSC संघर्ष, परिवार, पत्नी और पुलिस करियर की कहानी।

उत्तर प्रदेश में 3 नवंबर 2026 को हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 2012 बैच के तेजतर्रार IPS अधिकारी संकल्प शर्मा को गौतमबुद्धनगर (नोएडा) का नया संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) नियुक्त किया गया है। कानपुर नगर में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे संकल्प शर्मा अब नोएडा की कानून-व्यवस्था संभालेंगे। सख्त मिजाज, त्वरित कार्रवाई और ड्यूटी के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले संकल्प शर्मा की गिनती उत्तर प्रदेश के उन पुलिस अधिकारियों में होती है, जो अपने एक्शन से अलग पहचान बनाते हैं। कभी डिवाइडर फांदकर उपद्रवियों के पीछे दौड़ने वाला उनका वीडियो खूब वायरल हुआ था, तो कभी गंभीर अपराधों में त्वरित कार्रवाई को लेकर वह चर्चा में रहे। IIT रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और दो असफलताओं के बाद UPSC में सफलता हासिल करने तक उनका सफर भी बेहद दिलचस्प है। चलिए, नोएडा पुलिस कमिश्नरी के नए संयुक्त पुलिस आयुक्त IPS संकल्प शर्मा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
संकल्प शर्मा वर्ष 2012 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। राजस्थान के जयपुर के रहने वाले संकल्प शर्मा ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद सिविल सेवा में जाने का फैसला किया था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से की। इसके बाद वह प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और पुलिस कमिश्नरी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। संकल्प शर्मा की पहचान एक सख्त और सक्रिय पुलिस अधिकारी के रूप में रही है। वह अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर अपने काम करने के अंदाज के कारण चर्चा में रहे हैं। देवरिया और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में उनकी तैनाती के दौरान भी उनकी कार्यशैली की खूब चर्चा हुई। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कानपुर नगर से स्थानांतरित कर गौतमबुद्धनगर का संयुक्त पुलिस आयुक्त नियुक्त किया है। नोएडा में यह उनकी दूसरी महत्वपूर्ण तैनाती है। इससे पहले वर्ष 2020 में वह यहां पुलिस उपायुक्त (DCP) के पद पर भी काम कर चुके हैं।
IPS संकल्प शर्मा मूल रूप से राजस्थान की राजधानी जयपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता इंजीनियर हैं। संकल्प शर्मा के जन्म के समय उनके पिता की तैनाती सीकर में थी। इसी वजह से उनकी शुरुआती पढ़ाई सीकर में हुई। बाद में उनका परिवार जयपुर आ गया, जहां उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। स्कूल के दिनों से ही संकल्प शर्मा का झुकाव सिविल सेवा की तरफ था। वह प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज के लिए काम करना चाहते थे। हालांकि, उन्होंने अपने करियर के लिए इंजीनियरिंग को भी एक विकल्प के रूप में चुना। इसी सोच के साथ उन्होंने बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद जेईई की परीक्षा दी और सफलता हासिल की।
जेईई में सफलता मिलने के बाद संकल्प शर्मा को आईआईटी रुड़की में दाखिला मिला। यहां से उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने एमटेक भी किया। उनकी शैक्षणिक योग्यता में केमिकल और हाइड्रोकार्बन इंजीनियरिंग की पढ़ाई शामिल है। आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने नौकरी के कई विकल्प मौजूद थे। इंजीनियरिंग के बाद उन्हें नौकरी के ऑफर भी मिले, लेकिन संकल्प शर्मा का लक्ष्य कुछ और था। वह पहले से ही सिविल सेवा में जाने का सपना देख रहे थे। इसलिए उन्होंने नौकरी करने के बजाय यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया। परिवार ने भी उनके इस फैसले का समर्थन किया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर लगा दिया। हालांकि, इस रास्ते पर उन्हें शुरुआत में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
आईआईटी रुड़की से पढ़ाई पूरी करने के बाद संकल्प शर्मा ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2009 में उन्होंने पहली बार सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पहली असफलता से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। वर्ष 2010 में उन्होंने दूसरी बार परीक्षा दी। इस बार भी उनका चयन नहीं हो पाया। लगातार दो असफलताओं के बाद किसी के लिए भी अपने लक्ष्य पर टिके रहना आसान नहीं होता, लेकिन संकल्प शर्मा ने हार मानने के बजाय दोबारा तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2011 में उन्होंने तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2012 में घोषित परीक्षा परिणाम में उनका चयन हो गया। उनकी रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस कैडर मिला और उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ। इस तरह इंजीनियरिंग के बाद नौकरी के विकल्प छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले संकल्प शर्मा का सपना पूरा हुआ। उनकी पहली नियुक्ति उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुई।
आईपीएस बनने के बाद संकल्प शर्मा की पहली पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुई। यहां से उनके पुलिस करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अलग-अलग पदों पर काम किया। संकल्प शर्मा लखनऊ, नोएडा, आजमगढ़, बस्ती, बदायूं, देवरिया और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इन तैनातियों के दौरान उन्हें अलग-अलग तरह की कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों से निपटने का अनुभव मिला। लखीमपुर खीरी में उन्होंने पुलिस अधीक्षक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें डीआईजी स्तर की जिम्मेदारी भी मिली। देवरिया में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उनकी सख्त कार्यशैली की खूब चर्चा हुई। उनकी गिनती उत्तर प्रदेश के ऐसे पुलिस अधिकारियों में होती है, जो मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए जाने जाते हैं।
आईपीएस संकल्प शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो ने उन्हें आम लोगों के बीच भी चर्चा में ला दिया था। उस समय वह देवरिया के पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। दरअसल, देशभर में भारत बंद के दौरान अलग-अलग जगहों से प्रदर्शन और उपद्रव की खबरें सामने आ रही थीं। इसी दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें संकल्प शर्मा सड़क पर दौड़ते हुए दिखाई दिए। उन्होंने सड़क के डिवाइडर को फांदा और उपद्रव फैलाने की कोशिश कर रहे लोगों की तरफ तेजी से बढ़े। पुलिस अधिकारी को अपनी तरफ आते देखकर उपद्रवी मौके से भागने लगे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने उनके सक्रिय अंदाज और मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने की शैली की तारीफ की। इस वीडियो के बाद संकल्प शर्मा की पहचान एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में और मजबूत हुई, जो कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ मौके पर उतरकर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटते।
संकल्प शर्मा की पुलिस सेवा के दौरान बदायूं में तैनाती का एक मामला भी काफी महत्वपूर्ण रहा। उस समय जिले में एक महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गंभीर घटना सामने आई थी। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। मामले में पीड़ित परिवार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और पुलिस की लापरवाही को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद संकल्प शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सबसे पहले संबंधित थाने के थाना प्रभारी को निलंबित किया और मामले की जांच के लिए पुलिस टीमों का गठन किया। इसके बाद आरोपियों की तलाश के लिए कार्रवाई तेज की गई। पुलिस ने तीन दिन के भीतर सभी आरोपियों को पकड़ लिया। इस मामले में संकल्प शर्मा की त्वरित कार्रवाई और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने के कदम की चर्चा हुई। यह घटना उनकी कार्यशैली के उस पहलू को सामने लाती है, जिसमें वह गंभीर मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस विभाग की लापरवाही पर भी सख्त रुख अपनाते हैं।
संकल्प शर्मा की निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी पत्नी शालिनी अग्निहोत्री भी भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी हैं। वह हिमाचल प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। दोनों की मुलाकात आईपीएस ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। ट्रेनिंग के समय ही दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई और बाद में दोनों ने शादी कर ली। संकल्प शर्मा और शालिनी अग्निहोत्री दोनों ही पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। जहां संकल्प शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं, वहीं उनकी पत्नी हिमाचल प्रदेश कैडर में सेवाएं देती हैं।
पुलिस सेवा में संकल्प शर्मा के काम और योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्हें डीजीपी कमेंडेशन डिस्क के सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम सम्मान मिले हैं। ये सम्मान पुलिस सेवा में उनके योगदान और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में काम करने के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण अनुभव मिले हैं। उनकी पहचान केवल सख्त कार्रवाई करने वाले अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने और पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए भी जाने जाते हैं।
अब संकल्प शर्मा को गौतमबुद्धनगर का नया संयुक्त पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह कानपुर नगर पुलिस कमिश्नरी में संयुक्त पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। उत्तर प्रदेश सरकार के इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद उन्हें नोएडा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के तेजी से विकसित होने वाले शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां बड़ी कंपनियों, औद्योगिक इकाइयों, आवासीय सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आबादी बढ़ने के साथ पुलिस प्रशासन के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। साइबर अपराध, संगठित अपराध, यातायात व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और आम नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे विषय पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। नोएडा के साथ ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी जैसे क्षेत्रों में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में संकल्प शर्मा के सामने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी। वर्ष 2020 में नोएडा में पुलिस उपायुक्त के रूप में काम करने का उनका अनुभव इस नई जिम्मेदारी में उपयोगी साबित हो सकता है।
नोएडा में संकल्प शर्मा की यह दूसरी महत्वपूर्ण तैनाती है। वर्ष 2020 में वह यहां पुलिस उपायुक्त के रूप में काम कर चुके हैं। ऐसे में उन्हें गौतमबुद्धनगर की भौगोलिक परिस्थितियों, पुलिस व्यवस्था और यहां की चुनौतियों की पहले से जानकारी है। अब संयुक्त पुलिस आयुक्त के रूप में उनकी जिम्मेदारी पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगी। उनके सामने तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध पर अंकुश लगाने और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण काम होंगे। आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई, यूपीएससी की दो असफलताओं के बाद मिली सफलता और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस सेवा का अनुभव संकल्प शर्मा के सफर को खास बनाता है। अब देखना होगा कि नोएडा पुलिस कमिश्नरी में उनकी नई पारी किस तरह आगे बढ़ती है।
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