IPS सूरज कुमार राय कौन हैं? जानिए पिता की हत्या के बाद बदली उनकी जिंदगी, यूपीएससी में 117वीं रैंक, पुलिस करियर और मुजफ्फरनगर के नए SSP बनने तक का सफर।

उत्तर प्रदेश में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में बागपत के SP सूरज कुमार राय को मुजफ्फरनगर का नया से बनाया गया है। उनकी यह नई जिम्मेदारी चर्चा में है, लेकिन सूरज कुमार राय की जिंदगी का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। जौनपुर के रहने वाले सूरज राय कभी इंजीनियर बनना चाहते थे। उन्होंने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला भी लिया था, लेकिन कॉलेज पहुंचने के करीब एक महीने बाद ही उनके पिता की हत्या हो गई। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश में उन्होंने पुलिस और न्याय व्यवस्था को करीब से देखा। इसी अनुभव ने उनके करियर की दिशा बदल दी और उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर IPS बनने का फैसला किया। चलिए जानते हैं कैसा रहा उनका IPS बनने का सफर और उनके अब तक के प्रशासनिक करियर में क्या-क्या रहा खास।
सूरज कुमार राय उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं। पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि थी और वह इंजीनियर बनकर अपना करियर बनाना चाहते थे। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। उस समय उनका ध्यान अपनी पढ़ाई और भविष्य को संवारने पर था। लेकिन कॉलेज में प्रवेश लेने के करीब एक महीने बाद उनके परिवार पर ऐसी मुसीबत आई, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। उनके पिता की हत्या हो गई। इस घटना के बाद परिवार को न्याय पाने के लिए पुलिस और अदालत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। जिस समय सूरज कुमार राय अपने करियर की शुरुआत करने की तैयारी कर रहे थे, उसी समय उन्हें परिवार के लिए न्याय की लड़ाई में जुटना पड़ा। यह दौर उनके लिए बेहद कठिन था और इसी दौरान पुलिस व्यवस्था को देखने का उनका नजरिया भी बदलने लगा।
पिता की हत्या के मामले में न्याय पाने की कोशिश के दौरान सूरज कुमार राय ने पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया को करीब से देखा। उनके अनुसार, मामले की जांच में लापरवाही बरती जा रही थी। थाने जाने पर उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता था। परिवार के लिए न्याय की उम्मीद लेकर सरकारी व्यवस्था के चक्कर लगाना उनके लिए एक लंबा और मुश्किल अनुभव रहा। सूरज कुमार राय ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके पिता की हत्या के मामले में पुलिस की ओर से अदालत में पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें अपने पिता के मामले में न्याय नहीं मिला। इस अनुभव ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रहे दूसरे लोगों को भी ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यहीं से उनके जीवन में एक नई सोच ने जगह बनाई। अब उनके सामने केवल अपना करियर बनाने का सवाल नहीं था, बल्कि यह समझने का अवसर भी था कि पुलिस व्यवस्था के भीतर रहकर पीड़ितों की मदद करने के लिए क्या किया जा सकता है। धीरे-धीरे यही विचार उनके भविष्य के फैसले का आधार बना।
पिता की हत्या के बाद न्याय के लिए किए गए संघर्ष ने सूरज कुमार राय के करियर की दिशा बदल दी। इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले सूरज ने पुलिस और न्याय व्यवस्था को करीब से देखने के बाद भारतीय पुलिस सेवा में जाने का फैसला किया। उनका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था का हिस्सा बनना था, जहां जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके और शिकायत लेकर आने वाले लोगों की बात सुनी जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने इंजीनियरिंग की राह छोड़कर स्नातक की पढ़ाई पूरी करने और संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया। यह उनके जीवन का बड़ा बदलाव था। जिस घटना ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा दुख दिया था, उसी अनुभव ने उन्हें अपने भविष्य के लिए एक नया लक्ष्य चुनने की प्रेरणा दी। आईपीएस बनने का रास्ता आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें पढ़ाई, तैयारी और लगातार मेहनत पर ध्यान देना पड़ा। उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और आखिरकार इसमें सफलता प्राप्त की।
सूरज कुमार राय ने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनके लिए यह केवल एक सरकारी पद पाने का रास्ता नहीं था, बल्कि पुलिस व्यवस्था में रहकर लोगों की मदद करने का अवसर भी था। उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 117वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ। सूरज कुमार राय उत्तर प्रदेश कैडर के 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सिविल सेवा परीक्षा में मिली सफलता उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
आईपीएस बनने के बाद सूरज कुमार राय ने उत्तर प्रदेश पुलिस में अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। अपने शुरुआती कार्यकाल में उन्होंने मेरठ में सहायक पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम किया। इसके बाद सहारनपुर में एसपी ग्रामीण की जिम्मेदारी संभाली। पुलिस सेवा में आगे बढ़ते हुए उन्हें आगरा कमिश्नरेट में भी तैनाती मिली, जहां उन्होंने नगर पुलिस उपायुक्त के तौर पर काम किया। इन अलग-अलग तैनातियों के दौरान उनका काम पुलिस प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालना रहा। पुलिस अधिकारी के रूप में उनका करियर आगे बढ़ता गया और अप्रैल 2025 में उन्हें बागपत का पुलिस अधीक्षक बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने जिले की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अक्टूबर 2026 में किए गए प्रशासनिक फेरबदल में सूरज कुमार राय का तबादला बागपत से मुजफ्फरनगर कर दिया गया। उन्हें जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बनाया गया। इस नियुक्ति के साथ उन्हें एक नए जिले में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी मिली है। मुजफ्फरनगर में एसएसपी के पद पर उनकी भूमिका जिले की कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों पर नियंत्रण करने और पुलिस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने से जुड़ी है। नई तैनाती के बाद जिले में उनकी कार्यशैली और पुलिस प्रशासन को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
सूरज कुमार राय की जीवन यात्रा में एक ओर इंजीनियरिंग की पढ़ाई और बेहतर करियर का सपना था, तो दूसरी ओर पिता की हत्या के बाद परिवार को न्याय दिलाने का कठिन अनुभव। इस घटना ने उन्हें पुलिस और न्याय व्यवस्था की चुनौतियों को करीब से देखने का अवसर दिया। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और आईपीएस अधिकारी बने। उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि निजी जीवन की कठिन परिस्थिति के बाद उन्होंने अपने करियर के लिए एक नया लक्ष्य चुना। आज वह उत्तर प्रदेश पुलिस में वरिष्ठ जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और मुजफ्फरनगर के नए एसएसपी के रूप में उनकी तैनाती उनके प्रशासनिक सफर का अगला पड़ाव है।
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