इश्क़ से इंक़लाब तक: हसरत मोहानी के 5 यादगार शेर

वे सिर्फ़ एक प्रसिद्ध उर्दू शायर नहीं, बल्कि ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता थे जिनके विचार अपने समय से आगे थे। 1921 में “इंक़लाब ज़िंदाबाद” जैसा दमदार नारा पहली बार उनके लिखे हुए शब्दों के रूप में सामने आया।

हसरत मोहानी की शायरी

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locationउत्तर प्रदेश
userAbhijeet Yadav
calendar16 Jan 2026 01:48 PM
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