क्या बेटे की हत्या का सदमा पिता की जिंदगी पर भारी पड़ गया ? जौनपुर में ताइक्वांडो खिलाड़ी अनुराग यादव की हत्या के दो साल बाद पिता रामजीत यादव का भी निधन हो गया। रामजीत यादव के अंतिम संस्कार में उनकी दोनों बेटियों ने मुखाग्नि दी। जानिए अनुराग हत्याकांड और परिवार की दर्दनाक कहानी।

UP News : उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। दो साल पहले जिस पिता ने अपने जवान इकलौते बेटे की निर्मम हत्या का दर्द झेला था, आखिरकार वह भी इस दुनिया से विदा हो गया। बेटे की हत्या के बाद से गहरे सदमे और बीमारी से जूझ रहे पिता रामजीत यादव ने वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। एक ही परिवार पर दो साल के भीतर आई इन दो बड़ी विपत्तियों ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। इस परिवार की कहानी केवल एक हत्या और एक मौत तक सीमित नहीं है। यह उस पिता की पीड़ा की कहानी है, जिसने अपने बेटे को आंखों के सामने से हमेशा के लिए खो दिया और उसके बाद खुद भी कभी सामान्य जीवन में नहीं लौट सका। UP News
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यह मामला जौनपुर जिले के गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के कबीरुद्दीनपुर गांव का है। यहां 30 अक्टूबर 2024 को 16-17 वर्षीय ताइक्वांडो खिलाड़ी अनुराग यादव उर्फ छोटू की तलवार से हमला करके हत्या कर दी गई थी। वारदात इतनी भयावह थी कि हमलावर ने तलवार के वार से अनुराग का सिर धड़ से अलग कर दिया था। अनुराग रामजीत यादव का इकलौता बेटा था। वह राज इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट का छात्र था और पढ़ाई के साथ-साथ ताइक्वांडो खेल में भी अपनी पहचान बना रहा था। उसने चंदौली में आयोजित इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक और नोएडा में आयोजित ओपन नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया था। परिवार को अपने बेटे से बहुत उम्मीदें थीं। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि जिस बेटे के हाथों में खेल के पदक और भविष्य के सपने होने चाहिए थे, उसकी जिंदगी इतनी बेरहमी से छीन ली जाएगी। UP News
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प्रारंभिक पुलिस जांच और उस समय सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर करीब 40 वर्षों से विवाद चल रहा था। इसी पुरानी रंजिश के बीच अनुराग की हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की थी। नवंबर 2024 की रिपोर्टों के अनुसार, मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जबकि कुछ अन्य आरोपियों की तलाश जारी थी। इस घटना के बाद भूमि विवाद से जुड़ी शिकायतों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित लापरवाही को लेकर भी सवाल उठे थे। जिलाधिकारी ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। UP News
अनुराग की हत्या के बाद उसके पिता रामजीत यादव पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। परिवार का इकलौता बेटा अचानक दुनिया से चला गया। जिस बेटे को उन्होंने बड़े अरमानों के साथ पाला था, उसकी इस तरह हत्या ने पूरे परिवार को झकझोर दिया था। परिजनों के अनुसार, बेटे की हत्या के बाद से रामजीत यादव गहरे सदमे में रहने लगे थे। वह लंबे समय से बीमारी से भी जूझ रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उपचार के दौरान गुरुवार रात उनकी मृत्यु हो गई। बेटे की हत्या की दूसरी बरसी के आसपास ही पिता की मौत की खबर सामने आने से गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। UP News
रामजीत यादव का शव शुक्रवार सुबह कबीरुद्दीनपुर गांव पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए पहुंचे। रामजीत यादव के परिवार में पत्नी आशा देवी और दो बेटियां स्वाति तथा आराधना हैं। अनुराग परिवार का इकलौता बेटा था। बेटे की हत्या के बाद अब परिवार ने घर के मुखिया को भी खो दिया। रामघाट पर रामजीत यादव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी दोनों बेटियों स्वाति और आराधना ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। जिस परिवार ने पहले जवान बेटे को खोया और अब पिता को भी खो दिया, उसके सामने भविष्य को लेकर अनेक कठिनाइयां खड़ी हो गई हैं। UP News
अनुराग यादव हत्याकांड दो साल पहले पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था। इस घटना ने भूमि विवादों के समय रहते समाधान, पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे विवादों के खतरनाक परिणामों को सामने रखा था। अब रामजीत यादव के निधन के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। बेटे की हत्या के बाद परिवार जिस मानसिक और पारिवारिक संकट से गुजर रहा था, पिता की मृत्यु ने उसे और गहरा कर दिया है। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे गंभीर आपराधिक मामलों में पीड़ित परिवारों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किस तरह की सहायता, सुरक्षा और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। एक होनहार खिलाड़ी अनुराग की जिंदगी दो साल पहले खत्म हो गई और अब उसके पिता भी इस दुनिया में नहीं रहे। पीछे रह गई हैं मां आशा देवी और दो बेटियां, जिनके लिए परिवार के इन दोनों बड़े सहारों का चले जाना कभी न भरने वाला दुख है। जौनपुर की यह घटना एक परिवार की असहनीय पीड़ा के साथ-साथ समाज और प्रशासन के सामने भी कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। UP News
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