Advertisement
Advertisement
अपने योगदान के लिए उन्हें कई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और पद्म भूषण सहित अनेक सम्मान मिले हैं। वर्ष 2020 में उन्हें धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने के लिए रिचर्ड डॉकिंस अवार्ड से भी नवाज़ा गया।

Javed Akhtar : जावेद अख़्तर हिंदी सिनेमा और आधुनिक शायरी की दुनिया का ऐसा नाम हैं, जिनकी कलम ने पर्दे पर कई पीढ़ियों की सोच और ज़ुबान को आकार दिया है। वह कवि, गीतकार और पटकथा-लेखक के तौर पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। शुरुआती दौर में सलीम ख़ान के साथ उनकी मशहूर सलीम–जावेद जोड़ी ने सीता और गीता, ज़ंजीर, दीवार और शोले जैसी फिल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखकर हिंदी फिल्म लेखन को नई पहचान दी। इसके बाद उन्होंने गीत-लेखन में भी अपनी अलग छाप छोड़ी तेज़ाब, 1942: अ लव स्टोरी, बॉर्डर और लगान जैसी फिल्मों के गीत उनकी रचनात्मकता की मिसाल माने जाते हैं। अपने योगदान के लिए उन्हें कई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और पद्म भूषण सहित अनेक सम्मान मिले हैं। वर्ष 2020 में उन्हें धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने के लिए रिचर्ड डॉकिंस अवार्ड से भी नवाज़ा गया।
जावेद अख़्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ। उनके पिता जाँ निसार अख़्तर प्रगतिशील कवि थे, जबकि माता सफ़िया अख़्तर उर्दू की लेखिका और शिक्षिका के रूप में जानी जाती थीं। पारिवारिक विरासत साहित्यिक रही वे लोकप्रिय कवि मजाज़ के भांजे बताए जाते हैं और दादा मुज़्तर ख़ैराबादी भी शायरी की दुनिया का प्रतिष्ठित नाम थे। हालांकि इतनी समृद्ध साहित्यिक पृष्ठभूमि के बावजूद उनका बचपन आसान नहीं रहा। कम उम्र में मां का साया उठ गया। इसके बाद कुछ समय उन्होंने लखनऊ में नाना-नानी के साथ बिताया और फिर शिक्षा के लिए अलीगढ़ में अपनी ख़ाला के घर रहकर शुरुआती पढ़ाई पूरी की। यह अनुभव उनकी संवेदनशीलता और विचारों में साफ झलकता है, जो आगे चलकर उनकी रचनाओं की पहचान बनी।
1 -सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है, जावेद अख़्तर टॉप 5 शायरी
हर घर में बस एक ही कमरा कम है।

2 -इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं,
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं।

3 - हम तो बचपन में भी अकेले थे,
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे।

4 - खुला है दर प तिरा इंतिज़ार जाता रहा,
ख़ुलूस तो है मगर ए'तिबार जाता रहा।

5 - तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ,
मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ।
