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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) एक बार फिर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी गुरुवार को मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे।

UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) एक बार फिर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी गुरुवार को मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। राजनीतिक जानकार इस रैली को सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं। मुरादाबाद लंबे समय से समाजवादी पार्टी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन के बाद रालोद अब यहां अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटी है। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों पर पार्टी की नजर है, जहां भाजपा को पिछले कई चुनावों से अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। UP News
जयंत चौधरी की जनसभा को सफल बनाने के लिए पार्टी संगठन पूरी ताकत झोंके हुए है। प्रदेश सरकार में मंत्री और रालोद के वरिष्ठ नेता अनिल कुमार भी लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस रैली को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रालोद उन इलाकों में अपनी संभावनाएं तलाश रही है, जहां गठबंधन सहयोगी भाजपा को भी कोई राजनीतिक असहजता न हो और भविष्य में सीटों के बंटवारे के दौरान पार्टी अपनी दावेदारी मजबूत कर सके। रालोद नेताओं का कहना है कि मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों का चौधरी चरण सिंह तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह से ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंध रहा है। पार्टी अब उसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जयंत चौधरी के नेतृत्व में नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। इसी गठबंधन के तहत जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री बने। UP News
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि ठाकुरद्वारा की यह रैली केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसके जरिए रालोद अपने पारंपरिक वोट बैंक को संदेश देना चाहती है कि पार्टी अभी भी सक्रिय है और क्षेत्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पूर्व विधायक विजय यादव की सक्रियता को भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। माना जा रहा है कि गठबंधन उन सीटों पर नए समीकरण तैयार करने में जुटा है, जहां भाजपा को चुनावी सफलता हासिल करने में कठिनाई होती रही है। सूत्रों के अनुसार रालोद की राजनीतिक रणनीति केवल ठाकुरद्वारा तक सीमित नहीं है। पार्टी की नजर कांठ और मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीटों पर भी है। इन क्षेत्रों में रालोद अपने पारंपरिक सामाजिक आधार और राजनीतिक प्रभाव की संभावनाएं देख रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन सीटों पर भाजपा लगातार संघर्ष करती रही है, वहां भविष्य में रालोद के उम्मीदवारों को अवसर मिल सकता है। ऐसे में मुरादाबाद क्षेत्र में भाजपा और रालोद मिलकर नए राजनीतिक समीकरण तैयार करने की कोशिश में जुटे दिखाई दे रहे हैं। UP News
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