सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की ओर से आयोजित स्वाभिमान रैली में केंद्रीय मंत्री और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने किसानों, युवाओं और गन्ना उत्पादकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी यूपी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की ओर से आयोजित स्वाभिमान रैली में केंद्रीय मंत्री और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने किसानों, युवाओं और गन्ना उत्पादकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि रैली में उनके भाषण का सबसे ज्यादा चर्चित हिस्सा रहा ‘रसगुल्ला’ वाला राजनीतिक तंज। गोचर कृषि इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित रैली में जयंत चौधरी ने गन्ने की राजनीति और किसानों के हितों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को शायद अभी भी रसगुल्ला दिखाई दे रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि गन्ने से जुड़े सवालों पर राजनीति करने के बजाय किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को ध्यान में रखकर संतुलित नीति की जरूरत है। UP News
जयंत चौधरी ने गन्ने के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि विपक्ष में रहकर कई बार ऐसी बातें कही जाती हैं जिनसे तत्काल राजनीतिक लाभ या वोट हासिल किए जा सकें, लेकिन जब गन्ने और चीनी से जुड़े वास्तविक सवालों पर चर्चा की बात आती है तो विपक्ष पीछे हट जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसा कि शायद विपक्ष को अभी भी रसगुल्ला दिखाई दे रहा है। जयंत चौधरी ने कहा कि वह गन्ने के मुद्दे पर विपक्ष को पत्र लिखेंगे और यदि सहमति बनी तो लखनऊ में रसगुल्ले का पैकेट भी भेजेंगे। उनका यह बयान रैली के सबसे चर्चित राजनीतिक बयानों में शामिल हो गया। UP News

जयंत चौधरी ने अपने भाषण में गन्ने को केवल किसान की फसल के रूप में नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे आर्थिक चक्र के रूप में देखने की जरूरत बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि गन्ना उत्पादक किसान के हितों की कीमत पर उपभोक्ता को बहाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए जिसमें किसान को उसकी उपज का उचित लाभ मिले और उपभोक्ता पर भी अनावश्यक बोझ न पड़े। यही वजह है कि रामपुर मनिहारान की इस रैली में ‘रसगुल्ला’ शब्द महज एक मिठाई का नाम नहीं रहा, बल्कि गन्ने, चीनी की कीमत, किसान की आय और विपक्ष की राजनीति पर जयंत चौधरी के राजनीतिक तंज का प्रतीक बन गया। UP News
जयंत चौधरी ने एथेनॉल के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एथेनॉल का विरोध करते-करते सपा कहीं न कहीं चौधरी अजित सिंह की उस सोच का भी विरोध कर रही है, जिसमें कृषि उत्पादों से किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करने की बात थी। उन्होंने कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में एथेनॉल के साथ-साथ दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। UP News
जयंत चौधरी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सीबीजी (CBG) प्लांट जैसी परियोजनाओं की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पराली, आलू और अन्य कृषि उप-उत्पादों का इस्तेमाल करके गैस तैयार की जा सकती है। उनके मुताबिक इससे एक तरफ किसानों को अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ सस्ती खाद की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। UP News
जयंत का संदेश साफ था कि खेती को केवल पारंपरिक फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े उद्योगों और नई तकनीक को किसानों की आमदनी से जोड़ना होगा।
रैली में जयंत चौधरी ने युवाओं को भी संबोधित किया। उन्होंने हरियाणा के शौर्य चक्र विजेता पूर्व सैनिक जय सिंह का उदाहरण देते हुए युवाओं से सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी को अपना दुश्मन बनाने की जरूरत नहीं है। असली ताकत केवल संघर्ष करने में नहीं बल्कि सही सोच, चरित्र और सकारात्मक दृष्टिकोण में भी होती है। जयंत चौधरी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में युवा, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। UP News
दिलचस्प बात यह रही कि जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री व्यवस्था के खिलाफ खड़े होने वालों के प्रति सख्त हैं, लेकिन किसानों के लिए उनका दिल नरम है। यह बयान रालोद और भाजपा के मौजूदा राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
रामपुर मनिहारान की स्वाभिमान रैली को केवल एक राजनीतिक सभा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने की कोशिश में है। रैली में करीब 7 से 8 हजार लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है और आसपास के क्षेत्रों से भी समर्थक पहुंचे। रालोद का फोकस केवल जाट राजनीति तक सीमित रहने के बजाय किसानों और दूसरे ग्रामीण समुदायों तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिमी यूपी की राजनीति में किसान, गन्ना, ग्रामीण रोजगार और सामाजिक समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। UP News
जयंत चौधरी की रामपुर मनिहारान रैली ऐसे समय हुई है जब सपा और रालोद के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज है। हाल में अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। जयंत चौधरी पहले ही इस तरह की भाषा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब रामपुर मनिहारान की रैली में ‘रसगुल्ला’ वाला तंज सामने आने के बाद पश्चिमी यूपी की सियासत में बयानबाजी का एक नया रंग देखने को मिला है। राजनीतिक तौर पर देखें तो जयंत चौधरी एक साथ कई संदेश देने की कोशिश करते दिखाई दिए—किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना, युवाओं को जोड़ना, गन्ने के मुद्दे पर अपनी राजनीति को धार देना और विपक्ष पर हमला बोलना। UP News
रामपुर मनिहारान की रैली में जयंत चौधरी का ‘रसगुल्ला’ वाला बयान सोशल और राजनीतिक चर्चाओं में इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि गन्ना पश्चिमी यूपी की राजनीति का पुराना और बेहद संवेदनशील मुद्दा है। गन्ने के दाम, चीनी की कीमत, एथेनॉल, किसान की आय और कृषि आधारित उद्योग इन सभी मुद्दों को एक साथ जोड़कर जयंत चौधरी ने यह बताने की कोशिश की कि आने वाले राजनीतिक दौर में रालोद किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सवालों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखना चाहती है। यानी रामपुर मनिहारान की ‘स्वाभिमान रैली’ में मिठास भले ही रसगुल्ले की थी, लेकिन जयंत चौधरी के राजनीतिक संदेश में विपक्ष के लिए तीखा तंज साफ दिखाई दिया। UP News
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