कानपुर के स्वरूप नगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये कीमत के जेवर गायब होने का मामला सामने आया है।

UP News : कानपुर के स्वरूप नगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये कीमत के जेवर गायब होने का मामला सामने आया है। कौशलपुरी निवासी रश्मि अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने वर्ष 2003 में बैंक में लॉकर लिया था और उसमें समय-समय पर अपने सोने के जेवर रखे थे। करीब 23 साल बाद जब उन्होंने 27 जुलाई को लॉकर खोला तो अंदर जेवर नहीं मिले। लॉकर से जेवर गायब मिलने के बाद महिला ने बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। इसके बाद उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत की। शिकायत के आधार पर स्वरूप नगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लॉकर से जेवर आखिर कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए।
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रश्मि अरोड़ा के मुताबिक, वर्ष 2003 में उन्होंने स्वरूप नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर की शाखा में बचत खाता खुलवाया था। इसी दौरान उन्हें लॉकर नंबर 23 आवंटित किया गया था। महिला का दावा है कि उन्होंने अपने कीमती सोने के जेवर इस लॉकर में सुरक्षित रखे थे। समय बीतने के साथ वह बैंक और लॉकर की नियमित जांच नहीं कर सकीं। पति की मौत के बाद वह अपनी बेटी के साथ लखनऊ में रहने लगी थीं। इस वजह से लंबे समय तक लॉकर खोलने की नौबत नहीं आई। महिला के अनुसार, लॉकर का शुल्क उनके बैंक खाते से लगातार कटता रहा। बाद में जब उन्होंने बैंक जाकर लॉकर की स्थिति के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि जिस बैंक शाखा में उन्होंने लॉकर लिया था, उसका भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो चुका है।
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रश्मि अरोड़ा ने बताया कि करीब चार महीने पहले वह अपनी बेटी के साथ बैंक पहुंची थीं। वहां उन्हें बैंक के विलय की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने पुराने लॉकर के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। 21 जुलाई को वह दोबारा बैंक पहुंचीं और अपने खाते में रुपये जमा किए। बैंक की ओर से उन्हें लॉकर नंबर की जानकारी दी गई। हालांकि उस समय उनके पास लॉकर की चाबी नहीं थी, इसलिए वह लॉकर खोलकर उसके अंदर रखे सामान की जांच नहीं कर सकीं। इसके बाद उन्होंने लॉकर खोलने की व्यवस्था की और 27 जुलाई को बैंक पहुंचीं।
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27 जुलाई को जब रश्मि अरोड़ा ने लॉकर खोला तो वह अंदर का सामान देखकर हैरान रह गईं। उनका दावा है कि लॉकर में रखे करीब 50 लाख रुपये कीमत के सोने के जेवर गायब थे। लंबे समय से बैंक लॉकर में सुरक्षित रखे सामान के गायब मिलने के बाद उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी मांगी। महिला का आरोप है कि उन्हें मामले को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
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महिला ने अपनी शिकायत में बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका सवाल है कि यदि लॉकर में रखे जेवर गायब हुए तो इसकी जानकारी बैंक के रिकॉर्ड में क्यों नहीं आई और लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था में क्या स्थिति रही।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जेवर वास्तव में किस समय गायब हुए। महिला ने लंबे समय तक लॉकर नहीं खोला था, इसलिए पुलिस को यह पता लगाने के लिए बैंक के पुराने रिकॉर्ड और लॉकर से जुड़े दस्तावेजों की जांच करनी होगी।
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स्वरूप नगर पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस बैंक लॉकर से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि लॉकर कब-कब संचालित हुआ, उसके संबंध में बैंक के पास क्या रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और लॉकर तक पहुंच की प्रक्रिया क्या थी। पुलिस बैंक अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि लॉकर से जेवर गायब होने की कोई जानकारी बैंक रिकॉर्ड में दर्ज हुई थी या नहीं।
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इस घटना के सामने आने के बाद बैंक लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राहक बैंक लॉकर का इस्तेमाल अपने कीमती सामान को सुरक्षित रखने के लिए करते हैं। ऐसे में लंबे समय बाद लॉकर खोलने पर जेवर गायब मिलना गंभीर मामला माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच होगी कि लॉकर संचालन से जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं।
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इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महिला ने करीब 23 साल बाद लॉकर खोला। इतने लंबे समय के दौरान लॉकर से संबंधित बैंक रिकॉर्ड, शुल्क भुगतान, लॉकर संचालन और अन्य दस्तावेज पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि बैंक के रिकॉर्ड में लॉकर नंबर 23 की स्थिति क्या रही और बैंक के विलय के दौरान पुराने लॉकरों का रिकॉर्ड किस तरह स्थानांतरित किया गया। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 50 लाख रुपये कीमत के बताए जा रहे जेवर कब गायब हुए और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। महिला के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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