सुल्तानपुर की राजनीति में कादीपुर का दबदबा क्यों है? जानिए जिले के चार भाजपा विधायकों का इस विधानसभा क्षेत्र से क्या कनेक्शन है और कैसे बदला यहां का चुनावी इतिहास।

UP News : उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की राजनीति में कादीपुर विधानसभा की पहचान अब सिर्फ एक आरक्षित सीट तक सीमित नहीं है। जिले की सियासत में इस क्षेत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा के विधायक हैं और चारों का संबंध कादीपुर क्षेत्र से बताया जाता है। जयसिंहपुर के राजप्रसाद उपाध्याय, लम्भुआ के सीताराम वर्मा, कादीपुर के राजेश गौतम और सुलतानपुर सदर के विनोद सिंह इसी इलाके से जुड़े हैं। यही वजह है कि कादीपुर का राजनीतिक प्रभाव जिले की सियासी चर्चा में लगातार बना हुआ है।
साहित्य, कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के लिए पहचाना जाने वाला कादीपुर अब राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी खास महत्व रखता है। यहां का चुनावी इतिहास बताता है कि मतदाताओं ने अलग-अलग दौर में कांग्रेस, जनसंघ, लोकदल, भाजपा, बसपा और सपा को मौका दिया। बदलते राजनीतिक दौर के बावजूद कादीपुर का महत्व बना रहा और यहां के नेताओं का प्रभाव विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देता रहा। UP News
कादीपुर विधानसभा में वर्ष 1952 में हुए पहले चुनाव में सामान्य सीट से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशी प्रसाद पांडेय कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। वर्ष 1957 में सीट आरक्षित हुई तो शंकर लाल कंजर ने जीत दर्ज की। 1962 में सामान्य सीट पर श्रीपति मिश्र ने कांग्रेस को सफलता दिलाई। इसके बाद 1967 में सीट फिर आरक्षित हो गई और तब से आरक्षित बनी हुई है। इसी चुनाव में कांग्रेस के सुखदेव ने जनसंघ के बलिहारी को हराया। बाद में सुखदेव ने कांग्रेस से अलग होकर चौधरी चरण सिंह का साथ पकड़ लिया। UP News
वर्ष 1969 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के जगदीश प्रसाद एडवोकेट ने पार्टी का गढ़ बचाया। 1974 में जयराज गौतम विधायक बने, लेकिन 1977 की कांग्रेस विरोधी लहर में लोकदल के बृजलाल ने उन्हें हरा दिया। वर्ष 1980 में जयराज गौतम ने वापसी की। 1985 में कांग्रेस के रामआसरे और 1989 में एक बार फिर जयराज गौतम ने जीत दर्ज की। 1991 की रामलहर में भाजपा के रामचंद्र चौधरी ने बाजी मारी। 1993 में बसपा के भगेलूराम जीते और 1996 में भाजपा के काशीनाथ विधायक बने। इसके बाद 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में भगेलूराम ने जीत हासिल कर बसपा का प्रभाव कायम रखा। वर्ष 2012 में सपा के रामचंद्र चौधरी ने जीत दर्ज की और कादीपुर की राजनीति में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन देखने को मिला। UP News
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्व मंत्री जयराज गौतम के बेटे राजेश गौतम को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने जीत दर्ज कर सीट पर भाजपा की वापसी कराई। वर्ष 2022 में बसपा छोड़कर सपा में आए भगेलूराम के सामने भाजपा ने राजेश गौतम को दोबारा मैदान में उतारा। राजेश गौतम फिर विधायक चुने गए। लगातार दो चुनावों में जीत ने कादीपुर में भाजपा की स्थिति को राजनीतिक चर्चा का विषय बनाए रखा। UP News
राजेश गौतम के कार्यकाल में पॉलीटेक्निक कॉलेज, नवोदय विद्यालय, कादीपुर बस स्टेशन का नवीनीकरण, अग्निशमन केंद्र, बाबा सत्यनाथ मठ में निर्माण, नदियों पर पुल, किसान सेवा केंद्र भवन और विद्युतीकरण जैसे कार्यों का उल्लेख किया जाता है। इन परियोजनाओं को क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, विकास कार्यों के साथ यह सवाल भी बना हुआ है कि स्थानीय स्तर पर सड़क और अन्य जनसुविधाओं की समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से हो रहा है। UP News
कादीपुर की राजनीतिक हैसियत के बीच बदहाल सड़कों और स्थानीय विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी चर्चा में हैं। ऐसे में क्षेत्र की सियासत का आकलन केवल विधायकों के राजनीतिक संबंधों और चुनावी जीत से नहीं, बल्कि आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं से भी होगा। सड़क, परिवहन और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने अहम चुनौती है। UP News
कादीपुर का चुनावी इतिहास सत्ता परिवर्तन और बदलते जनादेश की कहानी कहता है। कांग्रेस के लंबे प्रभाव से लेकर बसपा और सपा के उभार तथा भाजपा की वापसी तक, यहां मतदाताओं ने समय-समय पर अलग-अलग दलों पर भरोसा जताया। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में इस क्षेत्र से जुड़े चार भाजपा विधायकों का होना कादीपुर की चर्चा को और व्यापक बनाता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजनीतिक संबंधों और प्रभाव का लाभ क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के समाधान तथा विकास कार्यों में किस तरह दिखाई देता है। UP News
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