उत्तर प्रदेश के जालौन में कालपी बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार हत्याकांड के एक लाख के इनामी मुख्य आरोपी मोनू यादव का पुलिस एनकाउंटर। दोनों पैरों में गोली लगने के बाद गिरफ्तार।

UP News : उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता की हत्या करके कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जालौन के कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी शूटर मोनू यादव उर्फ पवन यादव को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में जिस तरह एक वरिष्ठ अधिवक्ता को पहले सम्मान देने के बहाने कार में बैठाया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई, उसने पूरे उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता समाज को झकझोर दिया था। हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता और कथित शूटर मोनू यादव लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। अब उसकी गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार 4 नवंबर 2026 की तड़के करीब 2:45 से 3 बजे के बीच जालौन पुलिस को मोनू यादव के जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग के आसपास मौजूद होने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस और स्वाट टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी को रुकने और आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। बताया गया है कि मोनू ने पुलिस की ओर दो राउंड गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। पुलिस की गोली आरोपी के दोनों पैरों में लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस टीम ने तत्काल उसे हिरासत में लेकर उपचार के लिए जिला अस्पताल उरई पहुंचाया। मौके से एक तमंचा, कारतूस और बुलेट मोटरसाइकिल बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है।
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कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या की घटना 31 अक्टूबर 2026 को सामने आई थी। 67 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार उस दिन जिला न्यायालय में एक मुकदमे के सिलसिले में गए थे। पुलिस की जांच में सामने आई कहानी के अनुसार, उनके बेटे हर्ष ने उन्हें एक चौराहे पर छोड़ा था, जहां कुछ लोग पहले से कार लेकर मौजूद थे। आरोपियों में से एक ने गयादीन अहिरवार के पैर छुए और सम्मान जताते हुए उन्हें कार में बैठा लिया। उन्हें बताया गया कि एक कानूनी मामले के सिलसिले में चाय पर बातचीत करनी है। इसके बाद आरोपी उन्हें लेकर चले गए। काफी समय तक घर वापस नहीं लौटने और मोबाइल फोन बंद आने पर परिजनों को चिंता हुई। परिवार ने पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद अपहरण का मामला दर्ज कर तलाश शुरू की गई। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों की पहचान की और उनकी निशानदेही पर कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र में एक नाले से गयादीन अहिरवार का शव बरामद किया। घटनास्थल जालौन से लगभग 70 किलोमीटर दूर बताया गया। शव पर चोटों के निशान थे। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए जाने की आशंका वाले खून से सने ट्रक जैक को भी बरामद किया था।
इस हत्याकांड के पीछे जमीन का विवाद सामने आया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, जालौन के कदौरा क्षेत्र के गांव हांसा में 32 बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इस विवाद में कानपुर निवासी ठेकेदार इंद्रजीत यादव और गयादीन अहिरवार के बीच वर्ष 2015 से कानूनी लड़ाई चल रही थी। पुलिस के मुताबिक, इसी विवाद के चलते गयादीन अहिरवार की हत्या की साजिश रची गई। आरोप है कि इंद्रजीत यादव ने हत्या को अंजाम देने के लिए मोनू यादव उर्फ पवन यादव को 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी। मोनू ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस इस पूरे मामले को जमीन विवाद से जुड़ी सुपारी किलिंग के रूप में जांच रही है। हालांकि, हत्या की साजिश और आरोपियों की भूमिका से जुड़े सभी पहलुओं का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
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गयादीन अहिरवार हत्याकांड के सामने आने के बाद जालौन पुलिस ने आरोपियों की तलाश में कई टीमें लगाई थीं। पुलिस ने पहले तीन कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें सरवेश शुक्ला उर्फ सब्बू, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार के नाम सामने आए थे। इसके बाद कथित साजिशकर्ता इंद्रजीत यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इन गिरफ्तारियों के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को मुठभेड़ में घायल अवस्था में पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर शव और वारदात में इस्तेमाल कार तक पहुंचने में मदद मिली। हालांकि, हत्या का मुख्य आरोपी और कथित शूटर मोनू यादव फरार था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। अब 4 नवंबर को हुई मुठभेड़ में मोनू यादव की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में कुल पांच आरोपियों के पुलिस की गिरफ्त में आने की जानकारी सामने आई है।
मोनू यादव की गिरफ्तारी पुलिस के लिए आसान नहीं थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी की तलाश में जालौन पुलिस की कई टीमों ने कानपुर में भी छापेमारी की और गुजैनी पुलिस की मदद से हजारों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकानों का पता लगाने में जुटी थी। लगातार तलाश के बाद उसकी लोकेशन मिलने पर पुलिस ने घेराबंदी की और आखिरकार उसे मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया।
कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता की अपहरण के बाद हत्या ने अधिवक्ता समाज में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया था। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं थी, बल्कि एक ऐसे पेशे से जुड़े व्यक्ति की सुरक्षा का सवाल भी बन गई थी, जो आम नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए अदालतों में पैरवी करता है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब पुलिस के सामने हत्या की पूरी साजिश, सुपारी की रकम, आरोपियों के बीच हुए संपर्क और वारदात में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका से जुड़े सभी साक्ष्यों को न्यायालय के सामने रखना महत्वपूर्ण होगा।
जालौन के कालपी में हुए इस हत्याकांड ने एक बार फिर जमीन विवाद, सुपारी देकर हत्या कराने और अपराधियों के संगठित नेटवर्क पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने पहले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और अब एक लाख रुपये के इनामी मुख्य आरोपी मोनू यादव को भी मुठभेड़ के बाद पकड़ लिया है। फिलहाल घायल आरोपी का उपचार जारी है और पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। गयादीन अहिरवार हत्याकांड में अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि हत्या की साजिश किस स्तर पर रची गई और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका क्या थी।
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