पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को एक बार फिर केंद्र में लाने की कवायद शुरू की है। कल्याण सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हिंदू गौरव दिवस का आयोजन किया गया।

UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन सियासी दलों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टियां अपने पुराने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के साथ नए वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को एक बार फिर केंद्र में लाने की कवायद शुरू की है। कल्याण सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हिंदू गौरव दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा कल्याण सिंह के पौत्र और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह तथा उनके बेटे और पूर्व सांसद राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया की मौजूदगी रहेगी। इस आयोजन को केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बजाय भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। UP News
कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ भाजपा के उन नेताओं में रहे, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौर में पार्टी के हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी पहचान सिर्फ हिंदुत्व के चेहरे के रूप में ही नहीं रही, बल्कि लोधी समाज और व्यापक गैर-यादव पिछड़े वर्ग के बीच भी उनका प्रभाव माना जाता रहा है। यही वजह है कि भाजपा के लिए कल्याण सिंह की विरासत आज भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके जरिए पार्टी हिंदुत्व के पुराने आधार को मजबूत करने, लोधी समाज से जुड़ाव बनाए रखने और गैर-यादव ओबीसी के बीच अपनी पकड़ कायम रखने की कोशिश कर सकती है। UP News
भाजपा इससे पहले भी कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को बड़े राजनीतिक आयोजन के रूप में इस्तेमाल कर चुकी है। वर्ष 2023 में अलीगढ़ में आयोजित हिंदू गौरव दिवस में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजवीर सिंह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। अब लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में कल्याण सिंह के परिवार की प्रमुख मौजूदगी इसे और राजनीतिक महत्व दे रही है। भाजपा के लिए यह आयोजन पुराने कार्यकर्ताओं और कल्याण सिंह से भावनात्मक रूप से जुड़े समर्थकों तक संदेश पहुंचाने का माध्यम भी बन सकता है। UP News
उत्तर प्रदेश में लोधी समाज की आबादी को लेकर कोई ताजा आधिकारिक जातिगत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। भारत में अंतिम पूर्ण जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी। इसके बाद विभिन्न सर्वे और राजनीतिक आकलनों के आधार पर लोधी समाज की आबादी को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आते रहे हैं। राजनीतिक तौर पर लोधी समाज का प्रभाव पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के साथ बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में माना जाता है। अलीगढ़, एटा, कासगंज, फर्रुखाबाद, बदायूं, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, झांसी, हमीरपुर और महोबा जैसे क्षेत्रों में इस समुदाय की राजनीतिक भूमिका कई सीटों पर महत्वपूर्ण मानी जाती है। लोधी समाज अकेले किसी राजनीतिक दल को सत्ता तक पहुंचाने वाला वोट बैंक नहीं माना जाता, लेकिन कई विधानसभा क्षेत्रों में यह जीत-हार के अंतर को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लोधी समाज से आने वाले भाजपा नेताओं के प्रदर्शन को भी पार्टी के सामाजिक आधार के संदर्भ में देखा गया। स्याना विधानसभा सीट से देवेंद्र सिंह लोधी ने जीत हासिल की थी। एटा जिले की मारहरा सीट पर वीरेंद्र सिंह लोधी भाजपा के टिकट पर विजयी हुए। वहीं अतरौली सीट से कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह ने भी जीत दर्ज की थी। अतरौली को कल्याण सिंह की पारंपरिक राजनीतिक जमीन के रूप में देखा जाता है। UP News
2027 के चुनाव में भाजपा के सामने समाजवादी पार्टी का पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण भी बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस सामाजिक गठजोड़ ने भाजपा के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित किया था। इसके बाद भाजपा के लिए गैर-यादव ओबीसी वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखना और भी अहम हो गया है। पार्टी की रणनीति केवल लोधी समाज तक सीमित नहीं रह सकती। कुर्मी, सैनी, मौर्य, शाक्य, निषाद, गुर्जर और अन्य पिछड़े समुदायों के साथ व्यापक सामाजिक तालमेल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगा। लोधी समाज के साथ इन वर्गों का समर्थन मिलने पर कई सीटों पर चुनावी समीकरण उसके पक्ष में जा सकता है। UP News
राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया कल्याण सिंह के बेटे और भाजपा के पूर्व सांसद रहे हैं। उनकी मौजूदगी के जरिए पार्टी कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को सीधे उनके परिवार से जोड़ने का संदेश दे सकती है। वहीं संदीप सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और अतरौली से विधायक रह चुके हैं। अतरौली का महत्व केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह सीट कल्याण सिंह की लंबी राजनीतिक यात्रा और उनके जनाधार से जुड़ी रही है। ऐसे में परिवार के सदस्यों की सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी को लोधी समाज के साथ-साथ कल्याण सिंह के पुराने समर्थकों को जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। UP News
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद पार्टी के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने पुराने सामाजिक गठजोड़ को दोबारा मजबूत करने की चुनौती है। भाजपा के लिए केवल किसी एक समुदाय का समर्थन पर्याप्त नहीं होगा। सरकार के कामकाज, स्थानीय मुद्दों, हिंदुत्व, गैर-यादव ओबीसी और अन्य सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाना चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा। UP News
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