लगातार तीन दिन तक रहेगी छुट्टी, सब कुछ रहेगा बन्द

इस कारण 24 जनवरी 2026 को ज्यादातर सरकारी काम काज बंद रहेगा। उसके बाद 25 जनवरी को रविवार का दिन स्थाई तौर पर छुट्टी का दिन है। इस कारण 24 जनवरी 2026 को भी छुट्टी रहेगी।

UP में 3 दिन की छुट्टी
UP में 3 दिन की छुट्टी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Jan 2026 01:57 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में लगातार तीन दिन तक छुट्टी रहेगी। उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में 24 जनवरी 2026 से लेकर 26 जनवरी 2026 तक तीन दिन तक छुट्टी रहने वाली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जनवरी की अधिकारिक छुट्टी की घोषणा कर दी है। 24 जनवरी को शनिवार तथा 25 जनवरी को रविवार होने के कारण पहले से ही छुट्टी घोषित है।

उत्तर प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में शनिवार को छुट्टी

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सहित देश के ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में पांच दिन तक काम होता है। सरकारी दफ्तरों में शनिवार को छुट्टी रहती है। इस बार शनिवार का दिन 24 जनवरी 2026 को पड़ रहा है। इस कारण 24 जनवरी 2026 को ज्यादातर सरकारी काम काज बंद रहेगा। उसके बाद 25 जनवरी को रविवार का दिन स्थाई तौर पर छुट्टी का दिन है। इस कारण 24 जनवरी 2026 को भी छुट्टी रहेगी।

सोमवार 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की छुट्टी

शनिवार तथा रविवार को छुट्टी के बाद सोमवार 26 जनवरी को भी छुट्टी रहेगी। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने छुट्टी की अधिकारिक घोषणा कर दी है। इस प्रकार 24 जनवरी से लेकर 26 जनवरी तक तीन दिन की लम्बी छुट्टी रहेगी। तीन दिन तक छुट्टी रहने के कारण ज्यादातर कामकाजी लोग पर्यटन के लिए अपने-अपने घरों से दूर जा रहे हैं। UP News


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पश्चिम के साथ पूरब से भी उठी उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अनेक संगठन उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

उत्तर प्रदेश विभाजन की बहस गरम
उत्तर प्रदेश विभाजन की बहस गरम
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Jan 2026 01:22 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश का बंटवारा करने की मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी उठी है। सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश को सम्पूर्ण विकास को आधार बनाकर लम्बे अर्से से उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग चलती रहती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अनेक संगठन उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

पश्चिमी निर्माण मोर्चा का संघर्ष बढ़ रहा है आगे

उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा का संघर्ष लगातार आगे बढ़ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा के महासचिव कर्नल सुधीर सिंह का दावा है कि देर जरूर लग रही है किन्तु एक ना एक दिन उत्तर प्रदेश का बंटवारा अवश्य होगा। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश का सही अर्थों में तभी विकास होगा जब उत्तर प्रदेश को कम से कम तीन भागों में बांट दिया जाएगा। कर्नल सुधीर ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुए उत्तर प्रदेश के बंटवारे के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि हम सब लोग एक साथ मिलकर उत्तर प्रदेश का बंटवारा कराने का काम करेंगे।

अमेठी से उठी उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग

उत्तर प्रदेश का अमेठी क्षेत्र प्रदेश का प्रसिद्ध क्षेत्र है। हाल ही में अमेठी से उत्तर प्रदेश का बंटवारा करके पूर्वांचल राज्य बनाने की मांग खुलकर सामने आई है। एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने साफ कहा कि पूर्वांचल का विकास तभी संभव है, जब उसे अलग राज्य का दर्जा मिले। इस कार्यक्रम में हजारों लोग मौजूद रहे। पूर्वांचल को लेकर यह तर्क दिया जाता है कि यहां विकास की रफ्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश की तुलना में धीमी रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के मामले में यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा माना जाता है। समर्थकों का कहना है कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बने, तो प्रशासन ज्यादा फोकस के साथ काम कर पाएगा, योजनाएं जमीन पर तेजी से उतरेंगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से होगा।

आसान नहीं है उत्तर प्रदेश का बंटवारा

किसी भी राज्य को बांटना आसान नहीं होता है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें कई स्तरों पर सहमति और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। भारत के संविधान में इसके लिए साफ व्यवस्था दी गई है, ताकि फैसले भावनाओं में नहीं, बल्कि कानून के दायरे में हों। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर किसी राज्य का क्षेत्र घटा-बढ़ा सके, दो या दो से अधिक राज्यों को मिला सके या नया राज्य बना सके. यानी अंतिम फैसला संसद के हाथ में होता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि राज्य सरकार या जनता की भूमिका नहीं होती है। जब किसी राज्य को बांटने का प्रस्ताव आता है, तो राष्ट्रपति उस प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजते हैं। विधानसभा इस पर चर्चा करती है और अपनी राय राष्ट्रपति को देती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि विधानसभा की राय बाध्यकारी नहीं होती। यानी अगर विधानसभा सहमत न भी हो, तब भी संसद कानून बना सकती है, लेकिन व्यवहारिक रूप से विधानसभा की राय को काफी महत्व दिया जाता है।  राज्य बंटवारे का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है। इसलिए इस प्रक्रिया में जनता, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग राज्य की मांग सिर्फ राजनीतिक है या इसके पीछे वास्तविक जरूरत और जनसमर्थन भी है। 

संसद में कैसे पास होता है प्रदेश के बंटवारे का कानून

राज्य बंटवारे से जुड़ा विधेयक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाता है। इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है। यानी संविधान संशोधन जैसा भारी बहुमत यहां जरूरी नहीं होता है। यह बात राज्य गठन की प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल बनाती है।  जब संसद से कानून पास हो जाता है, तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद अधिसूचना जारी होती है और नया राज्य कानूनी रूप से अस्तित्व में आ जाता है। इसी के साथ प्रशासनिक ढांचा, सरकार और अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं।  भारत में इससे पहले भी कई नए राज्य बने हैं। साल 2000 में उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ और बिहार से झारखंड का गठन हुआ था। 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना। इन उदाहरणों से साफ है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो, तो नया राज्य बनना संभव है। UP News

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उत्तर प्रदेश मेगा ब्लैकआउट ड्रिल: 75 जिलों में एक साथ बजेगा सायरन

इसके तुरंत बाद बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करते हुए 10 मिनट का ब्लैकआउट लागू किया जाएगा। इसी दौरान मैदान में तैनात टीमें सक्रिय होकर रेस्क्यू से लेकर रिस्पॉन्स तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास करेंगी।

उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी मॉक ड्रिल
उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी मॉक ड्रिल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Jan 2026 11:47 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश आज (23 जनवरी) शाम आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए राज्यव्यापी मॉक ड्रिल करने जा रहा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक शाम 6:00 बजे प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ हवाई हमले जैसी चेतावनी का सायरन बजेगा और इसके बाद 10 मिनट के लिए ब्लैकआउट लागू किया जाएगा। प्रशासन इसे सुरक्षा और राहत व्यवस्था की रियल-टाइम टेस्टिंग मानकर चल रहा है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में विभागों का रिस्पॉन्स एक-सा और तेज हो सके।

सीएम योगी सहित शीर्ष अधिकारी रहेंगे मौजूद

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का मुख्य केंद्र बनाया गया है। पुलिस लाइन में होने वाले प्रमुख अभ्यास में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी की जानकारी है। उनके साथ गृह, नगर विकास और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिवों के अलावा डीजीपी, डीजी फायर और राहत आयुक्त भी मौके पर रहेंगे। 

क्यों कराया जा रहा है यह मॉक ड्रिल?

प्रशासन के मुताबिक, इस अभ्यास का उद्देश्य हवाई हमला/आपदा जैसी स्थितियों में त्वरित कार्रवाई, संचार व्यवस्था, राहत-बचाव और विभागीय तालमेल को मजबूत करना है। इससे पहले भारत-पाक तनाव के दौरान भी मॉक ड्रिल हुई थी। अब दूसरी बार पुलिस, बिजली विभाग और जिला प्रशासन समेत संबंधित एजेंसियां मिलकर संयुक्त अभ्यास करने जा रही हैं।

कैसे चलेगा अभ्यास? (टाइमलाइन)

इस अभ्यास का मिनट-दर-मिनट रोडमैप पहले से तय है। शाम ठीक 6:00 बजे करीब दो मिनट तक चेतावनी वाला सायरन बजेगा, जिससे यह संकेत मिलेगा कि पूरा सिस्टम अलर्ट मोड में आ चुका है। इसके तुरंत बाद बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करते हुए 10 मिनट का ब्लैकआउट लागू किया जाएगा। इसी दौरान मैदान में तैनात टीमें सक्रिय होकर रेस्क्यू से लेकर रिस्पॉन्स तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास करेंगी

कौन-कौन सी एजेंसियां रहेंगी एक्टिव?

यह मॉक ड्रिल नागरिक सुरक्षा विभाग (सिविल डिफेंस) के नेतृत्व में कराई जाएगी, जिसमें पूरे सिस्टम का इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन परखा जाएगा। अभ्यास के दौरान सिविल डिफेंस, पुलिस, एनडीआरएफ/एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग और बिजली विभाग/यूपीपीसीएल एक साथ मैदान में रहेंगे, ताकि संकट के वक्त कौन क्या करेगा में कोई भ्रम न बचे। इसी क्रम में प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद ने डीजीपी, यूपीपीसीएल के एमडी और राहत आयुक्त के साथ प्रदेशभर के जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। जोर इस बात पर है कि सायरन से लेकर ब्लैकआउट, सूचना प्रसारण से लेकर रेस्क्यू-रिस्पॉन्स तक हर कदम समयबद्ध, समन्वित और एक कमांड में संचालित हो, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी रहे।

2025 में भी हुआ था अभ्यास

प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 7 मई 2025 को भी सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए देश के कई जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल कराई गई थी। उस समय उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में तैयारियों की जांच की गई थी। इस बार राज्य ने कवायद का दायरा बढ़ाकर सभी 75 जिलों तक कर दिया है। UP News

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