कानपुर में अवैध अंग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में गरीब और जरूरतमंद लोगों को नौकरी या पैसों का लालच देकर उनकी किडनी निकलवाने और फिर उसे ऊंची कीमत पर बेचने का खेल सामने आया है।

UP News : कानपुर में अवैध अंग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में गरीब और जरूरतमंद लोगों को नौकरी या पैसों का लालच देकर उनकी किडनी निकलवाने और फिर उसे ऊंची कीमत पर बेचने का खेल सामने आया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड के एक युवक को पैसों का लालच देकर करीब 9.5 से 10 लाख रुपये में उसकी किडनी लेने का सौदा किया गया। इसके बाद उसी किडनी को एक जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया गया। यानी इस अवैध कारोबार में बिचौलियों ने कई गुना मुनाफा कमाया।
यह पूरा रैकेट शहर के कुछ निजी अस्पतालों के जरिए संचालित हो रहा था। जिनमें प्रमुख रूप से:
* मेडीलाइफ हास्पिटल
* प्रिया हास्पिटल एण्ड ट्रोमा सेंटर
* आहुजा हास्पिटल
इन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को संदिग्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई अस्पतालों पर छापेमारी की। इस दौरान दलाल, डॉक्टर दंपती और अस्पताल संचालक समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया गया। किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े दस्तावेज और सबूत जुटाए गए, मरीजों और स्टाफ से पूछताछ की गई। तब जाकर इसका पर्दाफाश हो सका।
जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ितों को नौकरी दिलाने या आर्थिक मदद का झांसा दिया जाता था। मेडिकल जांच के नाम पर अस्पताल ले जाया जाता था। बाद में उनकी किडनी निकाल ली जाती थी। कुछ मामलों में पीड़ितों को पूरी रकम भी नहीं दी गई, जिससे मामला खुलने लगा।
यह रैकेट नया नहीं है। वर्ष 2019 में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसमें कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। करोड़ों रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ था,
* इन्फामेशन डायक्टेरेट (ईडी) ने भी जांच की थी। अब ताजा जांच में उसी नेटवर्क के दोबारा सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, डोनर को तय रकम से 50 हजार रुपये कम दिए गए थे। जब उसने पैसे के लिए दबाव बनाया और पुलिस से शिकायत की, तब इस पूरे किडनी रैकेट की परतें खुलनी शुरू हुईं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में कई अहम सुराग मिले हैं। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। इसमें शामिल डॉक्टरों और नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अस्पतालों में बिना जांच ऐसे आॅपरेशन कैसे हुए? क्या मेडिकल सिस्टम में अंदरूनी मिलीभगत है?, गरीब लोगों को सुरक्षा कैसे मिलेगी?। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।