
संतान सुख की प्राप्ति
नवरात्रि में सुबह से लेकर देरशाम तक लाखों की संख्या भक्त आते हैं मां बारा देवी के दर्शन कर पुण्य कमाते हैं। मंदिर के पुजारी दीपक कुमार बताते हैं कि मंदिर लगभग 1700 वर्ष पुराना है। मंदिर में जिन दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ती नहीं होती। वह मां के दर पर आते हैं और चुनरी बांध कर मन्नत मांगते हैं। मातारानी की कृपा से उनके आंगन में किलकारियों की गूंज सुनाई देती है। अगले नवरात्रि पर बच्चे का पहला मंडन मंदिर परिसर पर ही होता है। मुंडन के बाद दंपत्ति चुनरी खोल लेते हैं।
सप्तमी से नवमी तक निकलते हैं जवारे
नवरात्र की सप्तमी से नवमी तिथि तक श्रद्धालु मां बारा देवी को जवारा निकालते हैं। मंदिर के आसपास आस्था का सैलाब उमड़ता है। इस दौरान मां काली और भगवान शिव के तांडव नृत्य को देख लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बारादेवी को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु खतरनाक करतब भी कर दिखाते हैं। कोई आग से खेलता है तो कोई अपने गाल के आरपार नुकीली धातु पार कर दिखाता है। नाचते गाते श्रद्धालुओं का जगह-जगह स्वागत कर फूल बरसाए जाते हैं। यहां बड़ों के साथ बच्चों और महिलाओं ने भी सांग लगाती हैं।
पहले जीभ काटकर चढ़ा देते थे भक्त
आपको शायद इस बात पर विश्वास नहीं होगा लेकिन ये सच है। आज से महज 15 साल पहले मंदिर में नवरात्रित में आने वाले भक्त अपनी जीभ काटकर मंदिर में चढ़ा देते थे। इतना ही नहीं भक्त मंदिर में अपनी गर्दन भी रेतते थे।
इससे कई लोगों की जान पर बन आती थी। इसके बाद से जिला प्रशासन ने इस प्रथा को कड़ी मशक्कत से बंद कराया। अब सिर्फ गाल में भाला आर-पार करके भक्त पहुंचते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग करतब भी करते हैं।
