काशी में मातृ नवमी पर अजन्मी बेटियों और लावारिस लोगों के निमित्त श्राद्ध व पिंडदान की अनोखी परंपरा निभाई जाएगी। इस वर्ष करीब 9800 अजन्मी बेटियों और 52 लावारिस शवों का श्राद्ध होगा।

UP News : उत्तर प्रदेश के काशी में पितरों के साथ उन अजन्मी बेटियों और लावारिस लोगों के लिए भी श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें उन अजन्मी बेटियों और लावारिस लोगों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है, जिनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई अपना नहीं था या जो दुनिया में आने से पहले ही इस संसार से विदा हो गईं। इस वर्ष पितृ पक्ष की मातृ नवमी पर करीब 9,800 अजन्मी बेटियों और 52 लावारिस शवों के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान किए जाने की तैयारी है। मातृ नवमी इस वर्ष 4 अक्टूबर को है। इसी दिन काशी के गंगा घाट पर सामाजिक संस्था आगमन की ओर से अजन्मी बेटियों के निमित्त तर्पण और पिंडदान किया जाएगा। वहीं, अमन कबीर सेवा ट्रस्ट की ओर से उन लावारिस लोगों के लिए श्राद्ध कर्म कराया जाएगा, जिनका अंतिम संस्कार संस्था की ओर से किया गया है। आगमन संस्था के अध्यक्ष डॉ. संतोष ओझा के अनुसार, वह पिछले 12 वर्षों से अजन्मी बेटियों के निमित्त तर्पण और पिंडदान का आयोजन करा रहे हैं। उनके मुताबिक अब तक करीब 1 लाख 63 हजार 700 कन्या भ्रूणों के निमित्त तर्पण कराया जा चुका है। संस्था का कहना है कि इस पहल के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलाने और अजन्मी बेटियों के प्रति सामाजिक संवेदना का संदेश देने का प्रयास किया जाता है।
अजन्मी बेटियों के निमित्त होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में जौ के आटे, तिल और शहद से पिंड तैयार किए जाएंगे। वैदिक विधि से अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए 11 आचार्यों की टीम मौजूद रहेगी। आयोजन में संस्था के करीब 22 सदस्य सहयोग करेंगे। डॉ. ओझा के मुताबिक, जब इस पहल की शुरुआत हुई थी तब इसमें सीमित संख्या में लोग जुड़े थे। समय के साथ जागरूकता बढ़ी और अब इस आयोजन से जुड़ने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। UP News :
दूसरी ओर अमन कबीर सेवा ट्रस्ट की ओर से उन लोगों के लिए श्राद्ध कर्म कराया जाएगा, जिनका कोई अपना अंतिम संस्कार करने के लिए मौजूद नहीं था।
सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर के मुताबिक उनकी संस्था लंबे समय से गरीब और लावारिस लोगों की सेवा कर रही है। बीमारी या अन्य परिस्थितियों में जिन लोगों की मृत्यु हो जाती है और उनके परिजनों का पता नहीं चल पाता, उनका अंतिम संस्कार संस्था की ओर से कराया जाता है। इस वर्ष संस्था की ओर से 52 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया गया। इनमें 29 शव ऐसे हैं, जिनकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है। अब मातृ नवमी के अवसर पर इन सभी के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान कराया जाएगा।
काशी में होने वाला यह आयोजन धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामाजिक संवेदना का संदेश भी देता है। एक ओर जहां अजन्मी बेटियों को स्मरण कर उनके प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त की जाएगी, वहीं दूसरी ओर उन लोगों के लिए भी श्राद्ध कर्म होगा, जिनके अंतिम समय में उनके अपने साथ नहीं थे। UP News :
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