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आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान के बाद देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

UP News : आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान के बाद देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के ढाई साल बाद भी अमित शाह एक बार भी अयोध्या स्थित राम मंदिर में दर्शन करने नहीं गए हैं और इसी को लेकर उन्होंने अमित शाह से पाँच सवाल पूछे हैं। जो अयोध्या में राम मंदिर बनने के ढाई साल बाद भी एक बार भी दर्शन करने नहीं गए, जबकि वे अपने भाषण में बार बार राम मंदिर का जिक्र करते रहते हैं।
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केजरीवाल का दावा है कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद लगभग ढाई साल बीत चुके हैं। इस दौरान अमित शाह ने कई बार भाषणों में राम मंदिर और भगवान राम का उल्लेख किया। लेकिन वे स्वयं अयोध्या जाकर कभी भी भगवान राम का दर्शन नहीं करने गए। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और भाजपा नेतृत्व पर राजनीतिक हमला किया।
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आप प्रमुख ने अमित शाह से सीधे पाँच सवाल पूछे:
1. आप राम मंदिर क्यों नहीं गए?
2. क्या आपका भगवान राम के दर्शन करने का मन नहीं करता?
3. क्या आपका राम मंदिर जाने का मन नहीं करता?
4. क्या आपको भगवान राम का आशीर्वाद नहीं चाहिए?
5. क्या आप राम चंद्र जी को भगवान मानते हैं?
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केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता केवल राम नाम का राजनीतिक उपयोग करते हैं। आस्था से अधिक इसे चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। राम मंदिर के नाम पर वोट मांगे जाते हैं लेकिन दर्शन नहीं किए जाते। उन्होंने आम आदमी पार्टी को सच्ची सनातनी पार्टी बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी जनकल्याण और धार्मिक मूल्यों के अनुसार काम करती है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। विपक्ष लगातार ट्रस्ट और सरकार पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है और भाजपा नेतृत्व राम मंदिर आंदोलन को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में पेश करता रहा है।
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अयोध्या में स्थित राम मंदिर का निर्माण वर्षों के विवाद और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संभव हुआ, और इसका उद्घाटन 2024 में भव्य समारोह के साथ हुआ था। इसके बाद से यह स्थान देश-विदेश से श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन गया है। इस बयान के बाद
सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। भाजपा और आप समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह मुद्दा धार्मिक आस्था बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में बदल गया है। अमित शाह के राम मंदिर दौरे को लेकर उठे सवाल अब केवल व्यक्तिगत यात्रा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक तरफ विपक्ष पारदर्शिता और आस्था पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है।
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