प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल में सामने आई न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने घटना को अचानक भड़की हिंसा के बजाय कथित तौर पर सुनियोजित साजिश बताया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल में सामने आई न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने घटना को अचानक भड़की हिंसा के बजाय कथित तौर पर सुनियोजित साजिश बताया है। रिपोर्ट में राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस मामले में न्यायिक जांच आयोग के निष्कर्ष और पुलिस की SIT जांच को अलग-अलग समझना जरूरी है। SIT ने जून 2025 में दाखिल अपनी चार्जशीट में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और शाही जामा मस्जिद प्रबंध समिति के अध्यक्ष जफर अली समेत 23 लोगों को आरोपी बनाया था। वहीं, सुहैल इकबाल, जिनका नाम शुरुआती FIR में था, SIT की अंतिम चार्जशीट में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण शामिल नहीं किए गए।
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संभल में शाही जामा मस्जिद के न्यायालय के आदेश पर सर्वे को लेकर तनाव पैदा हुआ था। 24 नवंबर को सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। इसके बाद पथराव, आगजनी और गोलीबारी की घटनाएं हुईं। हिंसा में पांच स्थानीय लोगों की मौत हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने हिंसा से जुड़े कई मुकदमे दर्ज किए और अलग-अलग मामलों में जांच शुरू की। बाद में SIT ने कई मामलों में चार्जशीट दाखिल की।
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SIT की जांच में संभल से समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क को एक मामले में आरोपी बनाया गया। जून 2025 में दाखिल करीब 1,100 पन्नों की चार्जशीट में बर्क समेत 23 लोगों के नाम शामिल किए गए थे। पुलिस का आरोप था कि बर्क की भूमिका भीड़ जुटाने और सर्वे का विरोध कराने से जुड़ी थी। हालांकि, किसी व्यक्ति का चार्जशीट में आरोपी होना अदालत द्वारा दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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शाही जामा मस्जिद प्रबंध समिति के अध्यक्ष जफर अली का नाम भी SIT की चार्जशीट में शामिल है। पुलिस ने आरोप लगाया कि उनकी भूमिका भीड़ जुटाने और हिंसा को भड़काने से जुड़ी थी। उन्हें मार्च 2025 में गिरफ्तार किया गया था। SIT की चार्जशीट में कथित तौर पर बर्क और जफर अली के बीच हुई बातचीत तथा मस्जिद के आसपास भीड़ जुटने से संबंधित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया था।
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संभल के समाजवादी पार्टी विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम हिंसा के शुरुआती मामलों में सामने आया था। FIR में उन पर भीड़ को उकसाने जैसे आरोप लगाए गए थे।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य है। SIT की अंतिम चार्जशीट में सुहैल इकबाल को आरोपी नहीं बनाया गया, क्योंकि जांच के दौरान उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई। इसलिए उन्हें SIT के आधार पर आरोपी बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
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हाल में सामने आई न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने 24 नवंबर की हिंसा को लेकर अलग निष्कर्ष सामने रखा है। आयोग के अनुसार यह घटना अचानक भड़की भीड़ की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पूर्व नियोजित साजिश होने के संकेत मिले। रिपोर्ट में संभल के पुराने सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के इतिहास का भी उल्लेख किया गया है। आयोग की रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सुहैल इकबाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। यह निष्कर्ष SIT की अंतिम चार्जशीट से अलग है, क्योंकि SIT ने सुहैल इकबाल को चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया था।
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पुलिस की जांच में हिंसा के मामले में कुछ ऐसे आरोपियों के नाम भी सामने आए जिनके कथित आपराधिक नेटवर्क से संबंध होने की जांच की गई। पुलिस ने कुछ आरोपियों को आपराधिक गिरोहों से जुड़े होने का दावा किया था और हथियारों की उपलब्धता तथा हिंसा के लिए संभावित फंडिंग के पहलू की भी जांच की। हालांकि, ऐसे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। इसलिए किसी व्यक्ति या संगठन को हिंसा की साजिश का दोषी बताना न्यायिक निर्णय से पहले उचित नहीं होगा।
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24 नवंबर 2024 की हिंसा के बाद पुलिस ने कई FIR दर्ज कीं। अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारियां हुईं और SIT ने कई चार्जशीट दाखिल कीं। जून 2025 में दाखिल एक प्रमुख चार्जशीट में 23 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसमें जियाउर्रहमान बर्क और जफर अली के नाम शामिल थे। इसके बाद न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने घटना के पीछे कथित साजिश और संभल के पुराने सांप्रदायिक तनाव पर नए सवाल खड़े किए हैं। अब इस रिपोर्ट के निष्कर्ष और पहले से चल रही न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर नजर रहेगी।
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संभल हिंसा मामले में कई नेताओं और अन्य लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं। लेकिन खबर लिखते समय यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि जांच एजेंसी का आरोप, न्यायिक आयोग का निष्कर्ष और अदालत से साबित हुआ अपराध—तीनों अलग-अलग चीजें हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक जियाउर्रहमान बर्क और जफर अली SIT की चार्जशीट में आरोपी हैं, जबकि सुहैल इकबाल को SIT ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण अंतिम चार्जशीट में शामिल नहीं किया था। दूसरी ओर, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने सुहैल इकबाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
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