
UP News : उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के जवाहरपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाले कथावाचक मुकुटमणि यादव इन दिनों सुर्खियों में हैं — वजह है एक ऐसी दर्दनाक घटना, जिसने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के जवाहरपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाले कथावाचक मुकुटमणि यादव के पिता रामप्रकाश यादव के अनुसार, आठ संतानों में सबसे बड़े मुकुटमणि पिछले 15 वर्षों से धर्म-कथा वाचन कर रहे हैं।
उन्होंने अछल्दा क्षेत्र में गुरु अवधेश यादव से विधिवत दीक्षा ली थी और तभी से पूरे प्रदेश में गांव-गांव जाकर कथा कर रहे हैं। लेकिन हाल ही में एक गांव में जाति पूछकर उनके साथ की गई मारपीट, बाल काटने और अभद्र व्यवहार की घटना ने उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। इस अमानवीय व्यवहार के विरोध में समाज से लेकर राजनीति तक हलचल तेज है, वहीं इस घटना को लेकर मुकुटमणि का परिवार गहरे सदमे में है।
मुकुटमणि यादव की कथा यात्रा की शुरुआत 15 साल पहले तब हुई जब उन्होंने अछल्दा क्षेत्र के एक गांव में अवधेश यादव को अपना आध्यात्मिक गुरु माना और कथा वाचन की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई गांवों में रामकथा, भागवत कथा और अन्य धार्मिक प्रसंग सुनाकर अपने अनुयायियों का एक बड़ा वर्ग बनाया। उनके पिता रामप्रकाश यादव बताते हैं, मेरे आठ बच्चों में मुकुटमणि सबसे बड़ा है। उसने बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्तियों में रुचि ली और आज वही बेटा ऐसा अपमान झेल रहा है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दांदरपुर गांव में आयोजित एक धार्मिक कथा के दौरान मुकुटमणि और उनके सहयोगी संत यादव के साथ जो व्यवहार हुआ, उसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। कथित रूप से ब्राह्मण समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने दोनों से उनकी जाति पूछी और इसके बाद हमला किया। मुकुटमणि के बाल काटे गए, संत यादव की चोटी नोची गई और आरोप है कि महिलाओं ने उन पर अपमानजनक तरल पदार्थ तक फेंका। यह घटना कैमरे में कैद हुई और सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बवाल मच गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों ही पीड़ितों को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया और मामले को गंभीर बताया।
मुकुटमणि के छोटे भाई रंजीत यादव ने बताया, भैया 15 साल से कथा कहते आ रहे हैं, लेकिन ऐसा अपमान हमने कभी नहीं देखा। जब वीडियो देखा तो आंखें भर आईं, गांव में हर कोई गुस्से में है।" पिता रामप्रकाश भावुक होकर कहते हैं, बेटे की चोटी काटना मेरी आत्मा को चीर देने जैसा है। मैं ही नहीं, पूरा गांव स्तब्ध है। मुकुटमणि के साथ ढोलक बजाकर कार्यक्रमों में साथ देने वाले श्याम जी कठेरिया भी इस घटना से गहरे प्रभावित हैं।
जन्म से ही दृष्टिहीन श्याम जी की मां कुशमा देवी बताती हैं, बेटा औरैया के दिव्यांग स्कूल में पढ़ा। वहीं ढोलक सीखी और अब मुकुटमणि जी के साथ प्रोग्राम कर कुछ कमाता है। लेकिन अब वह डरा हुआ है। मुकुटमणि के सहयोगी संत यादव ने बताया कि वह बायोलॉजी में स्नातक हैं और पहले एक निजी स्कूल में शिक्षक थे। कोरोना के बाद नौकरी गई, फिर धर्म का रास्ता चुना। संस्कृत जानता था, इसलिए कथा से जुड़ गया। पर जो हमारे साथ हुआ, वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे, यह कहते हुए वह भावुक हो गए।
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दांदरपुर की इस जातीय हिंसा की घटना ने कानून-व्यवस्था को भी गंभीर रूप से झकझोरा है। पुलिस ने अब तक चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन दूसरी ओर कथावाचक और उनके सहयोगी पर भी फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है, जिससे मामला और उलझ गया है। पिछले गुरुवार को जब प्रदर्शनकारियों ने गांव में घुसने की कोशिश की तो पुलिस और ‘अहीर रेजीमेंट’ एवं ‘यादव महासभा’ के लोगों में टकराव हुआ। पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी और 13 वाहनों की जब्ती हो चुकी है। दांदरपुर गांव में भारी पुलिस बल तैनात है, और वीडियो फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। UP News