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प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया गया है। पिछले नौ वर्षों में सरकार ने इस समस्या को केवल पशुपालन तक सीमित न रखकर इसे सामाजिक, आर्थिक और कृषि से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में लिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया गया है। पिछले नौ वर्षों में सरकार ने इस समस्या को केवल पशुपालन तक सीमित न रखकर इसे सामाजिक, आर्थिक और कृषि से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में लिया है। पहले जहां छुट्टा गोवंश किसानों के लिए परेशानी का कारण बनता था, वहीं अब सरकारी योजनाओं के जरिए इस चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की जा रही है। UP News
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
* 6,433 अस्थायी गो आश्रय स्थल
* 518 वृहद गो संरक्षण केंद्र
* 253 कांजी हाउस
* 323 शहरी कान्हा गो आश्रय स्थल।
इस तरह पूरे प्रदेश में 7,527 गो आश्रय स्थलों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां लगभग 12.39 लाख निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। सरकार प्रत्येक गोवंश पर प्रतिदिन 50 रुपये खर्च कर रही है, जिससे उनके भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। UP News
गोवंश संरक्षण केवल एक सामाजिक पहल नहीं, बल्कि आर्थिक निवेश भी बन चुका है। राज्य सरकार रोजाना लगभग 7.50 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इससे पशुपालन, किसानों की सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इस योजना के तहत 1.14 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.83 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। इससे पशुपालकों को आय का स्रोत मिला है और गोवंश को स्थायी आश्रय भी। UP News
* 630 बड़े गो संरक्षण केंद्रों को मंजूरी
* 539 का निर्माण पूरा
* 518 केंद्र संचालित।
हर केंद्र में करीब 400 गोवंश रखने की क्षमता है। वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लिए 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी प्रस्तावित है। UP News
गो आश्रय स्थलों के कारण :
* खेतों में फसलों को नुकसान कम हुआ
* गोबर से जैविक खाद बनाकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिला
* किसानों की आय में वृद्धि दर्ज की गई।
15 अप्रैल से 31 मई 2026 तक चल रहे अभियान में:
* 60.99 लाख कुंतल भूसा संग्रह का लक्ष्य
* अब तक लाखों कुंतल भूसा एकत्र किया जा चुका है।
इसके अलावा चारागाह भूमि विकसित कर हरे चारे की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है। सरकार गो आश्रय स्थलों को सिर्फ संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक इकाइयों के रूप में विकसित कर रही है। UP News
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