कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? जिनको लेकर शंकराचार्य ने खोला मोर्चा
शंकराचार्य ने एक नई तस्वीर सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ चल रही कानूनी–प्रशासनिक गतिविधियों के पीछे एक सुनियोजित स्क्रिप्ट है, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासी–धार्मिक हलचल के बीच चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इस बार वजह किसी अपराधी पर कार्रवाई या एनकाउंटर नहीं, बल्कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप हैं। शंकराचार्य ने एक नई तस्वीर सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ चल रही कानूनी–प्रशासनिक गतिविधियों के पीछे एक सुनियोजित स्क्रिप्ट है, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा विवाद उस घटनाक्रम से जुड़ता है, जिसमें आशुतोष ब्रह्मचारी पर नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप लगाते हुए कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसी मामले की पृष्ठभूमि में शंकराचार्य ने कहा कि जिस कार्यक्रम की फोटो सामने आई थी, उससे जुड़े नए फोटो/दृश्य अब भी सोशल मीडिया पर मौजूद बताए जा रहे हैं। (इन तस्वीरों की सत्यता और संदर्भ को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।)
शंकराचार्य ने क्यों मोर्चा खोला?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उनके खिलाफ जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वह तटस्थ जांच के बजाय एक पक्ष को लाभ पहुंचाने जैसी स्थिति बना रहे हैं। उन्होंने पहले एक फोटो दिखाकर कहा था कि उसमें आईपीएस अजय पाल शर्मा, आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ दिख रहे हैं। उस समय आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से इसे एआई/एडिटेड बताने जैसा दावा सामने आया था। अब शंकराचार्य ने उसी आयोजन/परिस्थिति से जुड़ी एक दूसरी तस्वीर दिखाते हुए कहा कि यह फोटो अभी भी संबंधित सोशल मीडिया प्रोफाइल पर दिख रही है। इसी आधार पर उन्होंने साजिश की आशंका जताई है।
कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा को उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। पंजाब से ताल्लुक रखने वाले शर्मा ने यूपी में अपनी पहचान सख्त पुलिसिंग और अपराध पर तेज़ कार्रवाई के जरिए बनाई। नोएडा से लेकर रामपुर, जौनपुर, हाथरस और शामली तक अलग-अलग जिलों में अहम जिम्मेदारियों के दौरान उनका नाम अपराधियों के खिलाफ अभियान और मुठभेड़ों से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर सामने आया। रिपोर्ट्स में उन्हें कई बार “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” जैसी छवि में भी पेश किया गया है, हालांकि मुठभेड़ों से जुड़े आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं, जिनका मिलान आधिकारिक रिकॉर्ड से ही संभव है। बताया जाता है कि आईपीएस बनने से पहले वे डेंटल सर्जन (BDS) रहे हैं, और उनके परिवार में सिविल सेवा की मौजूदगी का जिक्र भी होता है। मौजूदा समय में प्रयागराज जैसे प्रशासनिक व धार्मिक रूप से संवेदनशील शहर में उनकी तैनाती को लेकर चर्चा है, जहां कानून-व्यवस्था और बड़े आयोजनों की सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियां बेहद अहम मानी जाती हैं।
पुराने विवाद भी आए थे सामने
अजय पाल शर्मा का नाम पहले भी कुछ विवादों में आया था। एक मामले में 2016 में शादी से जुड़े दावे के आधार पर 2020 में शिकायत/केस की बात सामने आई थी। बाद में जांच के बाद क्लीन चिट मिलने का दावा भी रिपोर्ट्स में रहा। शंकराचार्य के तीखे बयानों और प्रशासन पर सवाल उठाने की घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं। मौनी अमावस्या से जुड़े विवाद के दौरान भी उन्होंने अफसरों पर आरोप लगाए थे। अब नए विवाद में अजय पाल शर्मा का नाम लेकर उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
दूसरी तरफ से भी सवाल
इस पूरे मामले में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने रखा जा रहा है। पहले फोटो विवाद के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी की तरफ से यह दावा किया गया था कि शामली में अजय पाल शर्मा ने ही उन्हें जेल भेजा था तो फिर वे करीबी कैसे हो सकते हैं? यही बिंदु इस विवाद को और उलझाता है, क्योंकि एक ओर संबंध के संकेत वाले दावे हैं, तो दूसरी ओर पुरानी कार्रवाई का हवाला भी दिया जा रहा है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की सियासी–धार्मिक हलचल के बीच चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इस बार वजह किसी अपराधी पर कार्रवाई या एनकाउंटर नहीं, बल्कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप हैं। शंकराचार्य ने एक नई तस्वीर सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ चल रही कानूनी–प्रशासनिक गतिविधियों के पीछे एक सुनियोजित स्क्रिप्ट है, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा विवाद उस घटनाक्रम से जुड़ता है, जिसमें आशुतोष ब्रह्मचारी पर नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप लगाते हुए कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसी मामले की पृष्ठभूमि में शंकराचार्य ने कहा कि जिस कार्यक्रम की फोटो सामने आई थी, उससे जुड़े नए फोटो/दृश्य अब भी सोशल मीडिया पर मौजूद बताए जा रहे हैं। (इन तस्वीरों की सत्यता और संदर्भ को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।)
शंकराचार्य ने क्यों मोर्चा खोला?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उनके खिलाफ जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वह तटस्थ जांच के बजाय एक पक्ष को लाभ पहुंचाने जैसी स्थिति बना रहे हैं। उन्होंने पहले एक फोटो दिखाकर कहा था कि उसमें आईपीएस अजय पाल शर्मा, आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ दिख रहे हैं। उस समय आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से इसे एआई/एडिटेड बताने जैसा दावा सामने आया था। अब शंकराचार्य ने उसी आयोजन/परिस्थिति से जुड़ी एक दूसरी तस्वीर दिखाते हुए कहा कि यह फोटो अभी भी संबंधित सोशल मीडिया प्रोफाइल पर दिख रही है। इसी आधार पर उन्होंने साजिश की आशंका जताई है।
कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा को उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। पंजाब से ताल्लुक रखने वाले शर्मा ने यूपी में अपनी पहचान सख्त पुलिसिंग और अपराध पर तेज़ कार्रवाई के जरिए बनाई। नोएडा से लेकर रामपुर, जौनपुर, हाथरस और शामली तक अलग-अलग जिलों में अहम जिम्मेदारियों के दौरान उनका नाम अपराधियों के खिलाफ अभियान और मुठभेड़ों से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर सामने आया। रिपोर्ट्स में उन्हें कई बार “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” जैसी छवि में भी पेश किया गया है, हालांकि मुठभेड़ों से जुड़े आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं, जिनका मिलान आधिकारिक रिकॉर्ड से ही संभव है। बताया जाता है कि आईपीएस बनने से पहले वे डेंटल सर्जन (BDS) रहे हैं, और उनके परिवार में सिविल सेवा की मौजूदगी का जिक्र भी होता है। मौजूदा समय में प्रयागराज जैसे प्रशासनिक व धार्मिक रूप से संवेदनशील शहर में उनकी तैनाती को लेकर चर्चा है, जहां कानून-व्यवस्था और बड़े आयोजनों की सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियां बेहद अहम मानी जाती हैं।
पुराने विवाद भी आए थे सामने
अजय पाल शर्मा का नाम पहले भी कुछ विवादों में आया था। एक मामले में 2016 में शादी से जुड़े दावे के आधार पर 2020 में शिकायत/केस की बात सामने आई थी। बाद में जांच के बाद क्लीन चिट मिलने का दावा भी रिपोर्ट्स में रहा। शंकराचार्य के तीखे बयानों और प्रशासन पर सवाल उठाने की घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं। मौनी अमावस्या से जुड़े विवाद के दौरान भी उन्होंने अफसरों पर आरोप लगाए थे। अब नए विवाद में अजय पाल शर्मा का नाम लेकर उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
दूसरी तरफ से भी सवाल
इस पूरे मामले में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने रखा जा रहा है। पहले फोटो विवाद के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी की तरफ से यह दावा किया गया था कि शामली में अजय पाल शर्मा ने ही उन्हें जेल भेजा था तो फिर वे करीबी कैसे हो सकते हैं? यही बिंदु इस विवाद को और उलझाता है, क्योंकि एक ओर संबंध के संकेत वाले दावे हैं, तो दूसरी ओर पुरानी कार्रवाई का हवाला भी दिया जा रहा है। UP News












