बांदा में अधिवक्ताओं ने 14 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने, कल्याण निधि 25 लाख करने और न्यायिक जवाबदेही कानून की मांग उठी।

UP News: उत्तर प्रदेश के बांदा में अधिवक्ताओं ने अपनी सुरक्षा, कल्याण और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की है। जिला अधिवक्ता संघ ने 14 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा। संघ ने प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम तत्काल लागू करने सहित अधिवक्ताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की है। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह और महासचिव राजेश कुमार त्रिपाठी ‘सोनू’ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने यह ज्ञापन दिया। संघ के मुताबिक 14 और 16 सितंबर को आयोजित आमसभाओं में इन मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए थे। अधिवक्ताओं से जुड़े इन्हीं मुद्दों को अब ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाया गया है।
ज्ञापन में उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग प्रमुखता से रखी गई है। इसके साथ ही अधिवक्ताओं से हड़ताल नहीं करने की अंडरटेकिंग लिए जाने के दबाव का विरोध किया गया है। अधिवक्ताओं ने संसद में न्यायिक जवाबदेही से संबंधित कानून लाने की मांग भी की है। इसके अलावा कॉलेजियम व्यवस्था पर रोक लगाकर न्यायिक नियुक्ति आयोग गठित करने की मांग ज्ञापन में शामिल है। अधिवक्ता संगठनों की ओर से उठाए जा रहे इन मुद्दों का व्यापक संदर्भ भी हालिया प्रदेशस्तरीय अधिवक्ता सम्मेलनों में सामने आया है, जहां अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम, हड़ताल संबंधी अंडरटेकिंग और न्यायिक सुधारों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई है। UP News:
जिला अधिवक्ता संघ ने अधिवक्ताओं की आर्थिक सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। ज्ञापन में अधिवक्ता कल्याण निधि को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग की गई है। इसके साथ ही नए अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन भत्ता देने, 70 वर्ष की आयु पूरी करने वाले अधिवक्ताओं के लिए मानक भत्ता निर्धारित करने तथा न्यायिक परिसरों में अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित व्यवस्था के लिए बजट का प्रावधान करने की मांग रखी गई है। हाल ही में प्रदेश के अधिवक्ता संगठनों की ओर से भी कल्याण निधि बढ़ाने और नए अधिवक्ताओं के लिए सहायता जैसी मांगें उठाई गई हैं। अधिवक्ताओं ने अपने 14 सूत्रीय ज्ञापन में टोल टैक्स में छूट देने की मांग भी शामिल की है। इसके अलावा जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग रखी गई है।
संघ का कहना है कि अधिवक्ताओं से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
ज्ञापन में गोरखपुर में मृत दो अधिवक्ताओं के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा बार काउंसिल के चुनाव में अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा तय करने तथा यूपी रेंट कंट्रोल एक्ट से संबंधित अधिकार दीवानी न्यायालयों को वापस देने की मांग भी 14 सूत्रीय ज्ञापन में रखी गई है। जिला अधिवक्ता संघ ने केंद्र और प्रदेश सरकार से सभी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई किए जाने की मांग की है। बांदा में अधिवक्ताओं की ओर से उठाए गए ये मुद्दे प्रदेश में चल रही व्यापक अधिवक्ता हित और न्यायिक सुधार संबंधी मांगों के बीच सामने आए हैं। UP News:
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