उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक युवक से तीन युवतियों की कथित शादी का मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब कानूनी और प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है।

Amroha Three Sisters Marriage Case : उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक युवक से तीन युवतियों की कथित शादी का मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब कानूनी और प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है। शुरुआत में इसे महज सोशल मीडिया कंटेंट समझा जा रहा था, लेकिन बाद में युवतियों और युवक ने इसे वास्तविक विवाह बताया। इसके बाद बाल कल्याण समिति (CWC), पुलिस और कानूनी विशेषज्ञों की नजर इस मामले पर टिक गई। इसी बीच एक युवती के नाबालिग होने की आशंका ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
Amroha Three Sisters Marriage Case
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र की रहने वाली तीन युवतियों ने अपने कैमरामैन विकास से विवाह करने का दावा किया। युवतियों का कहना है कि वे बचपन से साथ पली-बढ़ी हैं और शादी के बाद अलग नहीं होना चाहती थीं। इसी कारण उन्होंने आपसी सहमति से एक ही युवक से विवाह करने का फैसला लिया। विवाह के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
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कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संबंधित पक्ष हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के दायरे में आते हैं, तो एक जीवित वैवाहिक संबंध रहते हुए दूसरी या तीसरी शादी को कानून मान्यता नहीं देता। ऐसी स्थिति में पहली शादी के रहते बाद के विवाह शून्य (Void) माने जा सकते हैं। इसलिए भले ही सभी पक्षों की सहमति हो, दूसरी और तीसरी शादी को वैध वैवाहिक दर्जा नहीं मिलता।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 में द्विविवाह (Bigamy) से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति पहले विवाह के रहते दूसरा विवाह करता है और वह विवाह कानूनन मान्य नहीं है, तो परिस्थितियों के अनुसार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यदि पहले विवाह की जानकारी छिपाकर दूसरा विवाह किया जाता है तो सजा और अधिक कठोर हो सकती है। हालांकि किसी भी मामले में कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों, शिकायत और जांच पर निर्भर करती है।
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कानूनी विशेषज्ञ Indra Sarma v. V.K.V. Sarma (2013) मामले का हवाला देते हुए बताते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि पहले से विवाहित व्यक्ति के साथ बने संबंध को स्वतः वैध विवाह का दर्जा नहीं मिल जाता। ऐसे मामलों में दूसरी या तीसरी महिला को वैध पत्नी के समान सभी अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होते और प्रत्येक मामले के तथ्य अलग-अलग आधार पर परखे जाते हैं। Amroha Three Sisters Marriage Case
मामले में नया मोड़ तब आया जब बाल कल्याण समिति (CWC) की जांच में एक युवती की उम्र को लेकर सवाल उठे। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक दस्तावेजों में एक युवती की आयु उसके दावे से कम पाई गई, जिसके बाद पुलिस को बाल विवाह निषेध कानून के तहत जांच के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कानूनी जानकारों के अनुसार, द्विविवाह जैसे मामलों में अक्सर कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद शुरू होती है। हालांकि यदि जांच के दौरान बाल विवाह, दस्तावेजों में गलत जानकारी या अन्य दंडनीय अपराध के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो पुलिस और प्रशासन कानून के अनुसार स्वतः भी आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। वर्तमान मामले में भी जांच जारी है और अंतिम कानूनी स्थिति जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
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