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उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर शिक्षा के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। सरकारी स्कूलों के मर्जर के खिलाफ समाजवादी पार्टी द्वारा चलाई जा रही 'पीडीए पाठशाला' अब कानूनी दायरे में आ गई है। भदोही ज़िले में सपा नेत्री अंजनी सरोज समेत दर्जनभर कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने स्कूली बच्चों से राजनीतिक प्रचार करवा कर न केवल नियमों की अनदेखी की, बल्कि शिक्षा को भी राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। Uttar Pradesh Samachar
दरअसल, सपा कार्यकर्ता प्रदेशभर में स्कूल मर्जर के विरोध में ‘पीडीए पाठशाला’ चला रहे हैं। इसमें बच्चों को ‘ए फॉर अखिलेश’, ‘डी फॉर डिंपल’, ‘एम फॉर मुलायम’ जैसे राजनीतिक नामों से शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है। सत्तारूढ़ भाजपा ने इस पर तीखी आपत्ति जताई है और इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है। भदोही के डीएम शैलेश कुमार के अनुसार, औराई ब्लॉक के सिकंदरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के 40 छात्रों को अभिभावकों की सहमति से पिलखनी गांव के एक खाली पड़े आंगनवाड़ी केंद्र में स्थानांतरित किया गया था। बुधवार को पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अंजनी सरोज अपने समर्थकों के साथ इस केंद्र पर पहुंचीं, बच्चों को पेंसिल, रबर, टॉफियां वितरित कीं और फिर उन्हें समाजवादी झंडे व पोस्टर थमाकर स्कूल तक विरोध मार्च में ले गईं।
इस पूरे घटनाक्रम की जांच मुख्य विकास अधिकारी और एसडीएम को सौंपी गई, जिसके आधार पर स्कूल के प्रधानाध्यापक सभाजीत यादव ने चौरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं में दर्ज हुई है। थाना प्रभारी रमेश कुमार ने बताया कि अंजनी सरोज के साथ मौजूद अन्य लोगों की पहचान भी वीडियो फुटेज के आधार पर की जा रही है। साथ ही, शिक्षा विभाग में भी हलचल तेज है। औराई के सहायक शिक्षा अधिकारी रमाकांत सिंगरौल के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
पूरे विवाद पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “बच्चों को पढ़ाना गुनाह कैसे हो गया? बीजेपी को शिक्षा से दुश्मनी क्यों है? स्कूल मर्जर के नाम पर बच्चों को दूर किया जा रहा है। पीडीए पाठशाला तो बच्चों को शिक्षित कर रही है — चाहे वो ए फॉर एप्पल पढ़ें या ए फॉर अखिलेश, फर्क क्या पड़ता है?”
उत्तर प्रदेश में 5,000 से अधिक सरकारी स्कूलों के विलय की योजना पर सरकार का दावा है कि इससे संसाधनों का केंद्रीकरण और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। मगर विपक्ष इसे गरीबों के खिलाफ साजिश बताकर लगातार विरोध कर रहा है। ‘पीडीए पाठशाला’ इसी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन बच्चों को राजनीतिक नारों में शामिल करना— क्या यह विरोध का उचित तरीका है? यह प्रश्न अब न केवल राजनीतिक गलियारों, बल्कि समाज और शिक्षा नीति के विशेषज्ञों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। Uttar Pradesh Samachar
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