लखनऊ में पालतू कुत्ते-बिल्ली रखने वालों के लिए नियम अब और सख्त हो गए हैं। लखनऊ नगर निगम की पालतू पशु अनुज्ञप्ति, नियंत्रण एवं विनियमन उपविधि-2025 को उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 जुलाई 2026 को गजट में प्रकाशित किया था।

UP News : लखनऊ में पालतू कुत्ते-बिल्ली रखने वालों के लिए नियम अब और सख्त हो गए हैं। लखनऊ नगर निगम की पालतू पशु अनुज्ञप्ति, नियंत्रण एवं विनियमन उपविधि-2025 को उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 जुलाई 2026 को गजट में प्रकाशित किया था। नई व्यवस्था में पहली बार पालतू बिल्लियों को भी लाइसेंस व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। नई व्यवस्था के तहत भारतीय नस्ल के कुत्ते के लिए सालाना लाइसेंस शुल्क 200 रुपये, विदेशी नस्ल के कुत्ते के लिए 1000 रुपये और किसी भी नस्ल की बिल्ली के लिए 500 रुपये सालाना शुल्क तय किया गया है। यानी अब लखनऊ में बिल्ली पालने वालों को भी नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा।
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नगर निगम ने लाइसेंस नहीं बनवाने वाले पालतू पशु मालिकों के लिए जुर्माने का भी प्रावधान किया है। बिना लाइसेंस बिल्ली पालते पाए जाने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुत्ते के मामले में बिना लाइसेंस रखने पर जुर्माना 5000 रुपये तक हो सकता है। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराने पर भी अतिरिक्त कार्रवाई का प्रावधान है। नए नियमों का उद्देश्य पालतू पशुओं का रिकॉर्ड रखने के साथ उनके टीकाकरण और जिम्मेदार तरीके से पालन को सुनिश्चित करना है।
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नई उपविधि के तहत पालतू कुत्ते या बिल्ली को सार्वजनिक स्थानों पर खुले में छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। पशु मालिक को अपने पालतू की सुरक्षा, नियंत्रण और स्वच्छता की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। पालतू पशु रखने वाले व्यक्ति को उसकी नस्ल, रंग, लिंग और टीकाकरण जैसी जानकारी नगर निगम को देनी होगी। नई व्यवस्था के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा कुत्ता या बिल्ली पालने के 15 दिनों के भीतर नगर निगम को इसकी सूचना देकर लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा।
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नगर निगम ने घर के क्षेत्रफल के आधार पर कुत्ते पालने की संख्या को भी नियंत्रित किया है। 200 वर्गमीटर तक के मकान में अधिकतम दो कुत्ते और 300 वर्गमीटर तक के मकान में अधिकतम चार कुत्ते रखे जा सकेंगे। इससे अधिक कुत्ते रखने की स्थिति में शेल्टर होम से जुड़े नियम लागू होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य आवासीय परिसरों में जरूरत से ज्यादा पालतू कुत्ते रखने और उससे होने वाली असुविधाओं को नियंत्रित करना है।
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नगर निगम के अनुसार लाइसेंस शुल्क अग्रिम रूप से हर साल अप्रैल में जमा करना होगा। लाइसेंस की वैधता 1 अप्रैल से अगले वर्ष 31 मार्च तक रहेगी। नवीनीकरण के लिए अप्रैल के पहले सप्ताह में आवेदन करना होगा। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 3 हजार पालतू कुत्तों के लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जबकि बिल्लियों के लाइसेंस की संख्या अभी काफी कम है। नई व्यवस्था के बाद बिल्ली पालने वालों को भी अपने पालतू का नगर निगम में पंजीकरण कराना होगा। नगर निगम का कहना है कि लाइसेंस व्यवस्था से पालतू पशुओं का रिकॉर्ड तैयार होगा और टीकाकरण, खासकर रेबीज से बचाव, पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। साथ ही इसका मकसद लोगों को जिम्मेदार तरीके से पालतू पशु रखने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।
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