यदि चुनाव टालने की स्थिति बनती है, तो संबंधित पंचायतों का संचालन प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए प्रशासक करेंगे। इसकी मुख्य वजह यह है कि पिछले चुनावों में पंचायत प्रतिनिधियों ने अलग-अलग तिथियों पर शपथ ली थी, इसलिए उनका कार्यकाल भी अलग-अलग तारीखों को पूरा होगा।

UP News : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव निर्धारित समयसीमा पर होने की उम्मीद अब कम दिखाई दे रही है। यदि चुनाव टालने की स्थिति बनती है, तो संबंधित पंचायतों का संचालन प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए प्रशासक करेंगे। इसकी मुख्य वजह यह है कि पिछले चुनावों में पंचायत प्रतिनिधियों ने अलग-अलग तिथियों पर शपथ ली थी, इसलिए उनका कार्यकाल भी अलग-अलग तारीखों को पूरा होगा।
बरेली जिले में जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्ष, साथ ही क्षेत्र पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुखों ने अन्य जिलों की तुलना में सबसे बाद में कार्यभार संभाला था। इसी कारण इनका कार्यकाल सबसे अंत में समाप्त होगा। वर्तमान में पंचायती राज निदेशक ने जिले के डीएम से सभी सार्वजनिक प्रतिनिधियों के कार्यकाल का विस्तृत ब्यौरा मांगा है।
2021 के चुनावों में जीते जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्षों ने 12 जुलाई 2021 को शपथ ली थी, इसलिए उनका कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को पूर्ण होगा। इसी तरह, क्षेत्र पंचायत सदस्य और प्रमुखों का कार्यभार 20 जुलाई 2021 से शुरू हुआ था, जिसके चलते उनका कार्यकाल 19 जुलाई 2026 तक चलेगा।
ग्राम पंचायत सदस्यों और प्रधानों का कार्यकाल 27 मई 2021 से आरंभ होकर 26 मई 2026 तक तय है। हालांकि, जिले की 448 ग्राम पंचायतों में सदस्यों का कोरम अधूरा रहने के कारण संबंधित प्रधानों को समय पर शपथ नहीं दिलाई जा सकी थी। उपचुनाव के बाद कोरम पूरा होने पर इन प्रधानों ने 20 जून 2021 को शपथ ग्रहण की, इसलिए इनका कार्यकाल 19 जून 2026 को समाप्त होगा। कानून के अनुसार, कार्यकाल के बीच चुनाव नहीं कराए जा सकते। ऐसे में जिन पंचायतों का कार्यकाल पहले समाप्त होगा, वहां अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त किया जाएगा, जब तक कि सभी पंचायतों के कार्यकाल एक साथ समाप्त होकर चुनाव प्रक्रिया शुरू न हो जाए।
पिछले चुनाव में बरेली जिले में 1,193 ग्राम पंचायतें थीं। इस बार पाँच ग्राम पंचायतें मझगवां क्षेत्र की बेहटाजुनू, आबादानपुर, नगरिया सतन तथा नवाबगंज की याकूबनगर और बहोरन नगला नगर निकायों में शामिल कर दी गई हैं। इस कारण अब कुल 1,188 ग्राम पंचायतों में चुनाव प्रस्तावित हैं। डीपीआरओ कमल किशोर के अनुसार, पंचायती राज निदेशालय को सभी प्रतिनिधियों के कार्यकाल का विवरण भेजा जा रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि जिला पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल सबसे आखिरी में समाप्त होगा।