उत्तर प्रदेश के लोनी विधानसभा में जलभराव, नालों की बदहाल व्यवस्था और विकास कार्यों के ठेकों पर सवाल उठे हैं। 2027 चुनाव से पहले स्थानीय जनता ने विकास और पारदर्शिता की मांग की।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में पड़ने वाली लोनी विधानसभा सीट से विधायक नंदकिशोर गुर्जर के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी कड़ी में गाजियाबाद की लोनी विधानसभा में सड़क, नाली और जल निकासी की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों में लोनी विधानसभा सीट से विधायक नंदकिशोर गुर्जर के खिलाफ नाराजगी सामने आ रही है। क्षेत्र में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं और इसी के साथ विकास के मुद्दों को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय राजनीतिक विमर्श को हिंदू-मुस्लिम मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है। लोगों का कहना है कि उन्हें धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि बेहतर सड़क, जल निकासी, सफाई, रोजगार के अवसर और सुरक्षित माहौल चाहिए।
लोनी क्षेत्र में दिल्ली-सहारनपुर रोड के करीब सात किलोमीटर हिस्से पर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के बाद सड़क पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होता है और आसपास रहने वाले लोगों तथा कारोबारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। जलभराव का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहता। सड़क किनारे दुकानें चलाने वाले व्यापारियों, छोटे कारोबारियों और रोजाना आवागमन करने वाले कामगारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लंबे समय तक जलभराव रहने पर स्थानीय व्यापार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना चाहिए था। लोगों का आरोप है कि पर्याप्त प्रबंधन नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में वही समस्या बार-बार सामने आती है। अब सवाल यह है कि संबंधित स्थानीय निकाय और प्रशासन इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।
लोनी में विकास कार्यों को लेकर कुछ स्थानीय लोगों और सूत्रों की ओर से ठेकों और भुगतान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। एक दावे के अनुसार कुछ निर्माण कार्य कम लागत पर स्वीकृत होने के बाद लंबे समय तक लंबित रखे जाते हैं और बाद में अधिक राशि के बिल तैयार किए जाने का आरोप है। एक उदाहरण के तौर पर करीब एक लाख रुपये के पुलिया संबंधी कार्य का उल्लेख करते हुए छह लाख रुपये तक का बिल बनाए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग, नगर निकाय अथवा प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो सरकारी धन के इस्तेमाल की जांच और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा।
सरकारी योजनाओं और स्थानीय विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में सड़क, नाली, पुलिया और जल निकासी से जुड़े कार्यों में खर्च होने वाली राशि और उनकी गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विकास कार्यों की सूची, टेंडर प्रक्रिया, स्वीकृत लागत, भुगतान और कार्य की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।
लोनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में सड़क और जल निकासी की व्यवस्था का सीधा संबंध स्थानीय अर्थव्यवस्था से है। सड़क पर जलभराव और खराब बुनियादी ढांचे के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है। इससे छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों, परिवहन से जुड़े लोगों और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों की आय पर असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास का मतलब केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि ऐसा आधारभूत ढांचा तैयार करना है जिससे व्यापार बढ़े, रोजगार के अवसर पैदा हों और आम नागरिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक जीवन जी सके।
इसी बीच राशिद गेट क्षेत्र में तनाव की आशंका को देखते हुए पीएसी की तैनाती किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी संवेदनशील स्थिति में अफवाहों से बचना और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले लोनी में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनावी बहस का केंद्र सड़क, पानी, नाली, जल निकासी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे होने चाहिए। जनता का सवाल सीधा है—आखिर कब तक विकास से जुड़े सवाल राजनीतिक विवादों के पीछे दबते रहेंगे? लोनी के लोगों को अब आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जवाब, पारदर्शिता और जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
विकास कार्यों और ठेकों में अनियमितता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्रशासन और स्थानीय निकाय का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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