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Lucknow Fire: शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी थी उसका नक्शा रिहायशी इस्तेमाल के लिए पास हुआ था लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू हो गईं।

Lucknow: लखनऊ के अलीगंज के पुरनिया इलाके में हुए अग्निकांड को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई जबकि कई लोग घायल हुए हैं। अब जांच में पता चला है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी थी उसे रहने के लिए मंजूरी मिली थी लेकिन वहां कई तरह के कारोबारी काम भी चल रहे थे। पुलिस ने इस मामले में छह नामजद लोगों समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। अब तक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुशांक कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि मामले में और लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आज तक के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी थी उसका नक्शा रिहायशी इस्तेमाल के लिए पास हुआ था लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू हो गईं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर नियमों के खिलाफ यह सब कैसे चलता रहा और संबंधित विभागों ने समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। ज्यादातर मृतकों की उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है। हादसे के बाद कई परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
हादसे में बची एक लड़की ने अस्पताल में भर्ती रहते हुए उस दिन का पूरा मंजर बताया। उसने कहा कि आग लगते ही पूरे बिल्डिंग में अफरा-तफरी मच गई थी। धुआं तेजी से फैल रहा था और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। लड़की के मुताबिक, उसने और वहां मौजूद लोगों ने कई बार फोन करके मदद मांगने की कोशिश की लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। जब कोई रास्ता नहीं बचा तो उसने खिड़की तोड़ी और पाइप के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई।
अग्निकांड के बाद कई दर्दनाक बातें सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने आखिरी समय में अपने परिवार वालों को फोन किया था। वहीं कुछ लोग खुद बाहर निकलने की कोशिश में हादसे का शिकार हो गए। राहत और बचाव टीमों ने कई लोगों को गंभीर हालत में बाहर निकाला।
फिलहाल जांच जारी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आग कैसे लगी और सुरक्षा इंतजामों में कहां कमी रह गई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि रिहायशी मंजूरी वाली बिल्डिंग में व्यावसायिक काम कैसे चल रहा था। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस हादसे ने एक बार फिर बिल्डिंग सुरक्षा और फायर सेफ्टी को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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