लखनऊ में AISHE कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सही डेटा को नीति निर्माण का आधार बताया। विश्वविद्यालयों को डेटा सत्यापन और समयबद्ध अपडेट के निर्देश।

UP News : उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अब सही और प्रमाणित डेटा के आधार पर योजनाओं और नीतियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय AISHE कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों से डेटा संग्रहण और सत्यापन में विशेष सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा से जुड़ा सटीक और समयबद्ध डेटा ही नए संस्थानों, शिक्षकों, संसाधनों और भविष्य की जरूरतों को लेकर प्रभावी योजना बनाने का आधार बन सकता है। UP News
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रभावी नीति निर्माण, योजनाओं के निर्धारण और उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। डेटा के आधार पर ही तय किया जा सकता है कि कहां नए संस्थानों की आवश्यकता है, कहां शिक्षकों एवं संसाधनों की जरूरत है और विकास के लिए किन क्षेत्रों में विशेष कार्य किए जाने चाहिए। अर्थात भावी कार्यक्रम, योजनाएं और नीतियों का उचित निर्धारण डाटा पर ही निर्भर करता है। UP News
उच्च शिक्षा मंत्री सोमवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय AISHE (All India Survey on Higher Education) कार्यशाला में विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के समन्वय से किया गया। इसमें डेटा संग्रहण, सत्यापन, सबमिशन, विश्लेषण तथा संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। UP News
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि डेटा समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था का दर्पण है। भारत सरकार और प्रदेश सरकार अनेक महत्वपूर्ण निर्णय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लेती है। इसलिए डेटा कलेक्शन को नियमित प्रक्रिया न मानकर नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। यदि डेटा सही होगा तो योजनाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी। UP News
उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा संबद्ध महाविद्यालयों एवं संस्थानों के AISHE डेटा को नियमित अपडेट करने पर जोर दिया। कहा कि कई संस्थान AISHE कोड प्राप्त करने के बाद समय पर डेटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और इसका असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। नोडल अधिकारी नियमित समीक्षा करें। पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि की प्रतीक्षा की प्रवृत्ति से बचें, समय रहते डेटा प्राप्त कर परीक्षण सुनिश्चित करें। नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रमों, परीक्षा, परिणाम, आधारभूत संरचना की सूचनाएं मूल अभिलेखों से सत्यापित कर ही दर्ज की जाएं। केवल डेटा भरना पर्याप्त नहीं, उसकी शुद्धता और प्रमाणिकता भी सुनिश्चित हो। UP News
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नोडल अधिकारियों की भूमिका केवल कलेक्शन तक सीमित न रहे। अंतिम अनुमोदन से पहले क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाए, आवश्यकता अनुसार रैंडम वेरिफिकेशन कर अभिलेखों और AISHE डेटा की वास्तविकता जांची जाए और संस्थानों को तकनीकी-प्रशासनिक सहयोग भी दिया जाए। प्रदेश का प्रयास जीरो पेंडेंसी की दिशा में होना चाहिए। कोई भी पात्र एवं कार्यशील संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सही सूचना, सही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। आंकड़ों से भविष्य की आवश्यकताओं की पहचान कर नए संस्थानों, फैकल्टी और विभागों पर बेहतर योजना बन सकती है। डेटा प्लानिंग को औपचारिकता नहीं, पॉलिसी प्लानिंग की जिम्मेदारी मानना चाहिए। UP News
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि AISHE के लिए डेटा प्रबंधन केवल नोडल अधिकारी की नहीं, पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। डेटा प्रवेश, परीक्षा सहित विभिन्न अनुभागों से आता है, इसलिए विश्वसनीयता के लिए संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय रिकॉर्ड और AISHE रिकॉर्ड में एकरूपता, एफिलिएशन सूची के रीकन्सिलिएशन, गलत रिपोर्टिंग और डबल रिपोर्टिंग से बचने के लिए प्रामाणिक अभिलेखों की जांच तथा असामान्य बदलाव पर गहराई से समीक्षा पर जोर दिया। डेटा अपलोड करना प्रक्रिया है, लेकिन उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है। UP News
कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह ने आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन और गुणवत्ता पर विचार रखे। कार्यशाला में RMLNLU के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह, निदेशक AISHE की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी AISHE प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. दिनेश के. राजपूत सहित अन्य अधिकारी एवं प्रदेश के विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। तकनीकी सत्रों में DCF और AISHE पोर्टल से संबंधित जानकारी दी गई और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई। UP News
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