लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की 2,799 रुपये की EMI को लेकर युवक को कथित तौर पर बंधक बनाने, मारपीट करने और ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है। परिवार का दावा है कि युवक से जबरन मजदूरी कराई गई और बाद में उसकी रिहाई के लिए रुपये मांगे गए।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बेहद सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी ही वह स्थान है जहां से उत्तर प्रदेश भर में बाबा का बुलडोजर चलाने के आदेश दिए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के वह मुख्यमंत्री भी इसी राजधानी में रहते हैं जिनके नाम से अपराधी तथा माफिया थर-थर कांपते हैं। इस सबके बावजूद उत्तर प्रदेश की इसी राजधानी में कुछ अपराधियों ने अपराध करने के मामले में घटियापन की सारी सीमाएं पार कर दी हैं।
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी वाले जिले के निगोहां थाना क्षेत्र की है। निगोहां थान क्षेत्र में फैला निगोहां कस्बा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घर से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी निगोहां कस्बे में ब्याज की जबरन वसूली करने वाले एक गिरोह ने समय पर किश्त न दे पाने के कारण एक गरीब युवक का खून चूस लिया। पैसों की कमी में किसी गरीब का खून चूस लेने की इस घटना ने उस युग की याद दिला दी है जब उत्तर प्रदेश में कुछ भी हो जाता था। अपराधी पूरी तरह बेखौफ होकर किसी दलित युवक को पेशाब तक पिला देते थे।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बेहद सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। दरअसल मोबाइल फोन की एक किस्त न चुकाना एक युवक के लिए ऐसी मुसीबत बन गया, जिसकी कल्पना भी शायद उसने नहीं की होगी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मोबाइल की EMI वसूलने के नाम पर युवक को कथित तौर पर बंधक बनाकर पीटने, ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाने और फिर परिवार से पैसे वसूलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि युवक को जान से मारने की धमकी तक दी गई। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के राजाराम खेड़ा पुरहिया गांव का बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पीड़ित युवक नेवल ने सितंबर 2025 में निगोहां स्थित एक मोबाइल दुकान से करीब 21 हजार रुपये का मोबाइल फोन जीरो डाउन पेमेंट पर खरीदा था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मोबाइल की एक किस्त बकाया रहने के बाद रिकवरी एजेंट उसके घर पहुंचे। आरोप है कि पहले उसका मोबाइल फोन ले लिया गया और बाद में उसे किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाया गया। लेकिन कथित तौर पर मामला यहीं नहीं रुका। आरोपी उसे स्कूटी पर बैठाकर ले गए, फिर ब्लड बैंक पहुंचाया पीड़ित के भाई राजकुमार के अनुसार, सितंबर में ही दो लोग नेवल को अपने साथ स्कूटी पर बैठाकर ले गए। आरोप है कि इसके बाद युवक को एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। यही आरोप इस पूरे मामले को बेहद गंभीर और चौंकाने वाला बना रहा है। परिवार का दावा है कि खून निकलवाने के बाद युवक को लखनऊ के सदर इलाके में एक मकान में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। वहां उससे जबरन मजदूरी भी कराई गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि युवक को बंधक बनाने के बाद आरोपियों ने उसके बड़े भाई को फोन किया और मोबाइल की किस्त के 2,799 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने के लिए कहा। परिवार का आरोप है कि रुपये नहीं देने पर युवक को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी दी गई। भयभीत परिवार ने कथित तौर पर आरोपियों द्वारा बताए गए UPI पर रकम भेज दी। लेकिन इसके बाद भी कथित वसूली का सिलसिला नहीं रुका। रिपोर्ट के मुताबिक अगले दिन फिर फोन करके 12,500 रुपये मांगे गए। परिवार ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई।
पीड़ित के भाई ने पुलिस से संपर्क किया और अपने भाई की जान को खतरा बताया। शिकायत के बाद पुलिस की ओर से आरोपियों से संपर्क किया गया। आरोप है कि इसके बाद युवक को एक ऑटो के जरिए थाने भेज दिया गया। जब परिवार ने उसे देखा तो वह कथित तौर पर बदहवास हालत में था। परिवार का कहना है कि शुरुआत में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने में टालमटोल की। इसके बाद पीड़ित परिवार ने डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक से मुलाकात कर पूरी घटना बताई। डीसीपी के निर्देश के बाद निगोहां पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस के अनुसार मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। डीसीपी दक्षिणी ने थाने के पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। यह घटना सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मोबाइल की महज 2,799 रुपये की किस्त की वसूली के लिए किसी व्यक्ति को बंधक बनाने, कथित तौर पर मारपीट करने और उसका खून निकलवाने जैसी हरकत कैसे की जा सकती है? यदि पीड़ित के आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ EMI की वसूली का मामला नहीं रहेगा, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता, शारीरिक सुरक्षा और जबरन वसूली से जुड़ा बेहद गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है। हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
लखनऊ की इस घटना ने डिजिटल और फाइनेंस आधारित खरीदारी में रिकवरी के तौर-तरीकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी ग्राहक की किस्त बकाया होने पर कानूनी तरीके से वसूली की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो किसी व्यक्ति को कथित तौर पर अगवा करना, बंधक बनाना, धमकाना और उसका खून निकलवाना सामान्य रिकवरी नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य होगा। फिलहाल निगोहां पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस सनसनीखेज मामले में वास्तव में क्या हुआ था और कथित तौर पर खून निकलवाने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। लखनऊ की इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या अब मोबाइल की EMI वसूलने के लिए इंसान का खून भी कीमत बन सकता है? UP News :
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