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Lucknow Fire: दोनों एक ही एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर में काम करते थे। साथ काम करते-करते दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में परिवारों की सहमति से शादी तय हो गई थी। पिछले हफ्ते ही अनामिका के माता-पिता पश्चिम बंगाल से लखनऊ आए थे।

लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 9 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में ज्यादातर युवा छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। किसी की नौकरी का सपना अधूरा रह गया तो किसी की शादी की तैयारियां मातम में बदल गईं।
पीटीआई भाषा के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वालों में 27 वर्षीय नीलेश कुमार और 30 वर्षीय अनामिका सामंत भी शामिल हैं। दोनों एक ही एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर में काम करते थे। साथ काम करते-करते दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में परिवारों की सहमति से शादी तय हो गई थी। पिछले हफ्ते ही अनामिका के माता-पिता पश्चिम बंगाल से लखनऊ आए थे। दोनों परिवारों की मुलाकात हुई थी और शादी को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी थी। अगले सप्ताह नीलेश का परिवार भी अनामिका के घर जाने वाला था जिसके लिए ट्रेन टिकट तक बुक हो चुके थे।
नीलेश अपने करियर को लेकर काफी उत्साहित थे। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें जल्द प्रमोशन और वेतन बढ़ने की उम्मीद थी। वह शादी से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और मजबूत करना चाहते थे ताकि भविष्य बेहतर तरीके से शुरू कर सकें। परिवार के अनुसार, नीलेश घर के निर्माण में भी आर्थिक मदद कर रहे थे। उनका सपना था कि नया घर बनने के बाद वहीं से उनकी शादी हो। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
सोमवार दोपहर अलीगंज की एक तीन मंजिला इमारत में अचानक आग लग गई। इसी बिल्डिंग में एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर भी संचालित होता था। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग दूसरी मंजिल पर ही फंस गए। देखते ही देखते खुशी के सपनों से भरे कई परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। जो लोग कुछ घंटे पहले शादी, नौकरी और भविष्य की योजनाओं पर बात कर रहे थे शाम होते-होते वही परिवार अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपने अपनों की तलाश करते नजर आए।
अनामिका के परिवार को इस हादसे में दोहरा दुख झेलना पड़ा। उनकी 27 वर्षीय चचेरी बहन सोमिल्या की भी इसी अग्निकांड में मौत हो गई। दोनों एक ही संस्थान से जुड़ी हुई थीं। परिवार के लोग अभी तक इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि जिन बेटियों के साथ आने वाले दिनों की योजनाएं बनाई जा रही थीं वे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
लखनऊ अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि कई परिवारों के टूटे हुए सपनों की कहानी बन गया है। किसी का बेटा घर की जिम्मेदारी संभाल रहा था, कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था तो कोई शादी के सपने देख रहा था।
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