विज्ञापन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने न सिर्फ 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि पीछे छोड़ गया ऐसी दर्दनाक यादें, जिन्हें शायद ही कोई भूल सके।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने न सिर्फ 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि पीछे छोड़ गया ऐसी दर्दनाक यादें, जिन्हें शायद ही कोई भूल सके। इस हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश युवा थे, जिनके सपनों के साथ उनके परिवारों की उम्मीदें भी राख हो गईं। किसी ने अपना इकलौता बेटा खोया, तो किसी के घर का सहारा हमेशा के लिए चला गया। हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस के बाहर का दृश्य बेहद मार्मिक था। हर तरफ रोते-बिलखते परिजन थे, जो अपने प्रियजनों से हुई आखिरी बातचीत को याद कर टूट रहे थे। इनमें सबसे दर्दनाक कहानी 24 वर्षीय सुखमनी की है, जिसकी आखिरी आवाज आज भी उसके पिता के कानों में गूंज रही है। UP News
बस इतना कहने के बाद फोन कट गया। यह शब्द अब प्रभुजोत सिंह के कानों में लगातार गूंज रहे हैं। बेटे की चीख सुनते ही वह दफ्तर से बदहवास हालत में घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन जब तक पहुंचते, सब कुछ खत्म हो चुका था। घर में मातम पसरा है। मां किरण कौर की आंखों के आंसू थम नहीं रहे, जबकि बड़े भाई सायबान सिंह अपने छोटे भाई को खोने के सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस का दृश्य बेहद दर्दनाक था। कोई अपने बेटे की आखिरी कॉल याद कर रो रहा था, तो कोई सुबह घर से निकले बच्चे की मुस्कुराहट को याद कर फफक पड़ता था। रिश्तेदार, दोस्त और परिजन एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किसी के पास इस त्रासदी का जवाब नहीं था। UP News
जानकीपुरम निवासी केशव दत्त भारतीय सेना में तैनात हैं और वर्तमान में जम्मू में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका बेटा भी इसी संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा था। पड़ोसियों के अनुसार, सोमवार सुबह वह घर से यह कहकर निकला था कि जल्द लौट आएगा। लेकिन कुछ घंटों बाद आई एक खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही केशव दत्त जम्मू से तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए। परिवार के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि जिस बेटे को उन्होंने सुबह हंसते हुए विदा किया था, वह अब कभी वापस नहीं लौटेगा। UP News
सीतापुर जिले के बिसवां निवासी आदित्य श्रीवास्तव ने अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए यह कोर्स चुना था। परिवार के लोगों का कहना है कि उसने अपनी मां कल्पना श्रीवास्तव से जिद कर इस क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला लिया था। हादसे की खबर मिलते ही उसका छोटा भाई धैर्य और बहनें निष्ठा व आस्था लखनऊ पहुंचीं। पोस्टमार्टम हाउस में भाई का शव देखकर तीनों की चीखें सुन वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। UP News
बाराबंकी जिले के फतेहपुर निवासी हाजी इमरान का इकलौता बेटा शाहजान लखनऊ में रहकर पढ़ाई कर रहा था। पिता बेटे के बेहतर भविष्य के लिए नया मकान बनवा रहे थे, ताकि उसे किसी तरह की परेशानी न हो। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। बेटे की मौत की खबर सुनते ही हाजी इमरान बेसुध होकर गिर पड़े। परिजनों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनके सामने सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं। UP News
हादसे से सुरक्षित बाहर निकलने वाले लोगों ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि आग से ज्यादा खतरनाक तेजी से फैलता धुआं था। इमारत में संचालित एनीमेशन कंपनी के कर्मचारी भुवन श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर काले धुएं से भर गया था। सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और सांस लेना मुश्किल हो गया था। उन्होंने मुंह पर रुमाल बांधा और रेलिंग का सहारा लेकर नीचे उतरने की कोशिश की। भुवन के अनुसार, आग निचली मंजिल से शुरू हुई थी और धुआं तेजी से ऊपर फैल रहा था। छत तक जाने का रास्ता भी बंद हो चुका था। उस समय सभी के मन में सिर्फ एक ही सवाल था किसी तरह जिंदा बाहर निकलना है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद कर्मचारी लगातार एक-दूसरे को फोन कर हालात जानने की कोशिश कर रहे थे। कई लोगों से संपर्क टूट चुका था। कुछ कर्मचारी किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कई लोग अंदर ही फंस गए। भुवन ने बताया कि हादसे के बाद काफी देर तक लोग दमकल और एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे। इस दौरान भय और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। UP News
मेरठ निवासी गौरव कुमार ने बताया कि आग लगने के बाद सबसे पहले नीचे की ओर से धुआं उठता दिखाई दिया। बिजली बंद होने के बाद जब उन्होंने दरवाजा खोला तो बेसमेंट की दिशा से घना धुआं ऊपर आता नजर आया। कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं से भर गई और लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया। गौरव किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे। UP News
उत्तराखंड के गढ़वाल निवासी शैलेंद्र ने बताया कि आग लगने के बाद हॉल में तेजी से धुआं भर गया। मुख्य रास्ते से निकलना असंभव हो गया था। ऐसे में उन्होंने खिड़की के रास्ते बाहर निकलने का प्रयास किया। जान बचाने की जद्दोजहद में उन्हें बिजली के तारों का सहारा लेकर नीचे उतरना पड़ा। इस दौरान उनके हाथ बुरी तरह झुलस गए। उनका कहना है कि दमकल विभाग को सूचना तुरंत दे दी गई थी, लेकिन राहत दल के पहुंचने तक हालात बेहद गंभीर हो चुके थे। UP News
विज्ञापन