विज्ञापन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड की शुरुआती जांच में चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आ रही हैं। जांच में यह संकेत मिले हैं कि हादसे की शिकार इमारत में स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा था, जिससे ओवरलोडिंग की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड की शुरुआती जांच में चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आ रही हैं। जांच में यह संकेत मिले हैं कि हादसे की शिकार इमारत में स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, यही स्थिति हादसे की प्रमुख वजहों में से एक हो सकती है। विद्युत विभाग (लेसा) के अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित भवन में बिन्द्रा प्रसाद शुक्ला के नाम पर 20 किलोवाट का कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन स्वीकृत था। हालांकि विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों से इस सीमा का लगातार उल्लंघन किया जा रहा था। अप्रैल में यहां बिजली लोड 24.30 केवीए दर्ज किया गया, जो स्वीकृत सीमा से अधिक था। स्थिति और गंभीर तब हो गई जब जून में यह बढ़कर 34.10 केवीए तक पहुंच गया। UP News
विद्युत विशेषज्ञों का कहना है कि स्वीकृत क्षमता से लगभग दोगुना लोड होने के कारण इमारत की वायरिंग, उपकरण और स्थानीय ट्रांसफार्मर पर अत्यधिक दबाव बन रहा था। भीषण गर्मी के बीच इस तरह की ओवरलोडिंग से शॉर्ट सर्किट और आग लगने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि लगातार तीन महीनों तक ओवरलोड दर्ज होने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। न तो लोड बढ़ाने के लिए नोटिस जारी हुआ और न ही बिजली आपूर्ति पर कोई प्रतिबंध लगाया गया। इस पूरे मामले की जांच अब विद्युत सुरक्षा निदेशालय और लेसा की संयुक्त टीम कर रही है। तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि जून महीने में जब लोड 34.10 केवीए तक पहुंच गया था, उस समय एमसीबी (Miniature Circuit Breaker) के माध्यम से बिजली आपूर्ति स्वतः बंद क्यों नहीं हुई। UP News
जांच में यह भी सामने आया है कि विभाग के रिकॉर्ड में कई गंभीर विसंगतियाँ हैं। बताया जा रहा है कि इस परिसर का बिजली कनेक्शन वर्ष 2000 में लिया गया था, लेकिन बिलिंग रिकॉर्ड में इसकी तारीख 1 जनवरी 1911 दर्ज पाई गई है, जो बड़ी तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि की ओर इशारा करती है। अब यह भी जांच का विषय है कि भवन के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया था या नहीं। यदि एनओसी ली गई थी, तो उसका समय पर नवीनीकरण हुआ या नहीं इस पर भी स्पष्टता नहीं है। जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वी.पी. सिंह ने बताया कि भवन में पुराना 20 किलोवाट कॉमर्शियल कनेक्शन मौजूद था, जबकि एनओसी से संबंधित जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है और इसकी जांच की जा रही है। UP News
स्थानीय लोगों के अनुसार, भवन में रहने वाले किराएदारों ने कई बार बिजली आपूर्ति बाधित होने और एमसीबी के बार-बार ट्रिप करने की शिकायत भवन स्वामी के बेटे से की थी, लेकिन इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। जैसे-जैसे भवन में व्यावसायिक गतिविधियाँ और किराएदारों की संख्या बढ़ती गई, बिजली खपत भी लगातार बढ़ती रही। यदि समय रहते विभागीय स्तर पर निरीक्षण और कार्रवाई की जाती, तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था। उत्तर प्रदेश विद्युत सुरक्षा निदेशालय के निदेशक जी.के. सिंह ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। UP News
विज्ञापन