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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। घटना में सस्पेंड किए गए फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र सिंह के दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। घटना में सस्पेंड किए गए फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र सिंह के दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। पहले वीडियो में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए अपनी कार्रवाई को अनुचित बताया और वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि दूसरे वीडियो में उन्होंने अपने ही बयान से पलटते हुए माफी मांग ली। UP News
वायरल हुए पहले वीडियो में कमलेंद्र सिंह ने अपने निलंबन को पूरी तरह एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि लखनऊ अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद उनके खिलाफ की गई कार्रवाई गलत है, क्योंकि उनका कार्यक्षेत्र सीमित है। उन्होंने दावा किया कि एक FSSO का काम केवल स्थानीय निरीक्षण और रिपोर्टिंग तक सीमित होता है, जबकि भवनों की फायर क्लीयरेंस और शहर की समग्र अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों की होती है। कमलेंद्र सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि संबंधित इमारत को आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति दी गई थी, लेकिन बाद में उसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बदलाव की जानकारी संबंधित उच्च अधिकारियों के संज्ञान में होनी चाहिए थी। इसके साथ ही उन्होंने आग बुझाने और राहत कार्य में देरी तथा समन्वय की कमी को लेकर भी सवाल उठाते हुए सीधे लखनऊ के चीफ फायर ऑफिसर (CFO) की भूमिका पर निशाना साधा। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को न्याय व मुआवजा दिया जाए। UP News
पहले वीडियो के वायरल होने के बाद सामने आए दूसरे वीडियो में कमलेंद्र सिंह का रुख पूरी तरह बदल गया। इस वीडियो में उन्होंने कहा कि 22 जून की घटना से वे गहरे दुखी हैं और 15 लोगों की मौत से वे मानसिक रूप से आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल हुआ पहला वीडियो भ्रम की स्थिति में बनाया गया था और उन्हें कुछ लोगों द्वारा गुमराह किया गया। उन्होंने अपने पहले बयान का खंडन करते हुए कहा कि वह अपने उच्च अधिकारियों पर भरोसा रखते हैं और जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से पूरी होगी। कमलेंद्र सिंह ने अपने पहले बयान के लिए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया और माफी भी मांगी। UP News
22 जून को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित चार मंजिला इमारत में अचानक भीषण आग लग गई थी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया और यह इमारत लाक्षागृह जैसी बन गई। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। मृतकों में अधिकतर वे छात्र-छात्राएं शामिल थे जो भवन में चल रहे एनिमेशन कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग दोपहर करीब 1:45 बजे अचानक लगी। धुआं फैलते ही इमारत में अफरातफरी मच गई और छात्र बचने के लिए सीढ़ियों और छत की ओर भागे, लेकिन छत का दरवाजा बंद होने के कारण कई लोग वहीं फंस गए। घबराहट में कुछ छात्रों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर नीचे छलांग लगा दी। इस दौरान एक छात्र नीचे लगी लोहे की नुकीली ग्रिल पर गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 14 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। UP News
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