देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झूलेलाल वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही परियोजना के तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास भी किया जाएगा।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को शुक्रवार को ट्रैफिक व्यवस्था के लिहाज से बड़ी सौगात मिलने जा रही है। देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झूलेलाल वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही परियोजना के तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास भी किया जाएगा। इस अहम पहल के शुरू होने से राजधानी के लाखों लोगों को जाम की समस्या से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रीन कॉरिडोर का दूसरा चरण शुरू होने के बाद डालीगंज, निशातगंज और समता मूलक चौक के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो जाएगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी के इस हिस्से में रोजाना भारी दबाव रहने के कारण लोगों को लंबे समय तक जाम का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह परियोजना यातायात को नई रफ्तार देने का काम करेगी।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में तैयार किए गए ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण पर करीब 299 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह हिस्सा डालीगंज से निशातगंज होते हुए समता मूलक चौक तक विकसित किया गया है। इसकी लंबाई लगभग 7 किलोमीटर बताई जा रही है। इस चरण के चालू होने से करीब 15 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि यह कॉरिडोर राजधानी लखनऊ के भीतर यात्रा समय कम करने के साथ-साथ ईंधन की बचत और ट्रैफिक दबाव घटाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इसे शहरी यातायात प्रबंधन के बड़े मॉडल के रूप में देख रही है।
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना केवल दूसरे चरण तक सीमित नहीं है। शुक्रवार को इसके तृतीय और चतुर्थ चरण का भी शिलान्यास किया जाएगा। इन दोनों चरणों के निर्माण पर करीब 1220 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित कार्यों में 1090 चौराहे से शहीद पथ तक फ्लाईओवर, चार लेन सड़क और बंधे का निर्माण शामिल है। इसके अलावा आईआईएम रोड से किसान पथ तक के बड़े विस्तार के लिए भी व्यापक योजना तैयार की गई है। इस पूरे विस्तार पर हजारों करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में यह परियोजना आने वाले वर्षों में शहरी कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकती है।
अब तक लखनऊ के कई हिस्सों से हजरतगंज और गोमतीनगर पहुंचने में लोगों को लंबा समय लग जाता था। खासतौर पर आईआईएम रोड से आने-जाने वाले यात्रियों को अक्सर करीब एक घंटे तक का समय लग जाता था। ग्रीन कॉरिडोर के विस्तार के बाद यही सफर घटकर लगभग 20 मिनट तक सिमट सकता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजाना दफ्तर, बाजार, स्कूल और अस्पताल जाने वाले लोगों के लिए यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण के शुरू होते ही इस रूट पर यातायात अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित होने लगेगा। उनका मानना है कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना राजधानी के भीतर ट्रैफिक मूवमेंट को नई दिशा देगी। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसी परियोजनाएं भविष्य की जरूरत मानी जा रही हैं।
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना की एक खास बात यह भी रही कि निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखा गया। परियोजना के रास्ते में आने वाले करीब 166 बड़े पेड़ों को काटने के बजाय ट्रांसप्लांट कराया गया। अधिकारियों का दावा है कि इन पेड़ों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है और वे सुरक्षित हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की इस कोशिश को प्रशासन की सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीन कॉरिडोर के बीरबल साहनी मार्ग पर पहले पाम के पेड़ लगाए गए थे। हालांकि बाद में इन्हें हटाकर उनकी जगह दूसरे उपयुक्त पेड़ लगाए गए। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर पौधारोपण को लेकर तकनीकी चूक हुई थी, जिसे बाद में सुधार लिया गया। अब यहां ऐसे पौधे लगाए गए हैं जो इस क्षेत्र के लिए अधिक उपयुक्त माने जा रहे हैं। बता दें कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का पहला चरण 11 मार्च 2024 को शुरू किया गया था। उस चरण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके तहत आईआईएम रोड से पक्का पुल तक 6.8 किलोमीटर लंबे हिस्से को विकसित किया गया था। अब दूसरे चरण के लोकार्पण के साथ यह परियोजना आगे बढ़ रही है, जबकि डालीगंज के बीच के हिस्से और 1090 चौराहे से लामार्ट होते हुए शहीद पथ तक के हिस्से पर भी काम जारी है। UP News