राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में आयोजित इस अहम समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसी मौके पर तीसरे और चौथे चरण की आधारशिला भी रखी जाएगी।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से चर्चा में रही ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का दूसरा चरण बनकर तैयार हो गया है और 13 मार्च को इसका लोकार्पण होने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में आयोजित इस अहम समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसी मौके पर तीसरे और चौथे चरण की आधारशिला भी रखी जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह परियोजना लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था को नई रफ्तार देने के साथ उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मॉडल को भी मजबूत करेगी।
ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण के शुरू होने से उत्तर प्रदेश की राजधानी के उन इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा, जहां रोजाना भारी ट्रैफिक दबाव रहता है। इस हिस्से में डालीगंज, निशातगंज और समता मूलक चौक को जोड़ा गया है। करीब सात किलोमीटर लंबा यह मार्ग लखनऊ विकास प्राधिकरण की निगरानी में तैयार किया गया है। परियोजना पर लगभग 299 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस मार्ग के चालू होते ही शहर के कई भीड़भाड़ वाले हिस्सों में जाम का दबाव कम होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि वाहन चालकों को अब कई स्थानों पर रुक-रुककर आगे बढ़ने की मजबूरी से छुटकारा मिल सकता है। रिवर फ्रंट के किनारे से आवागमन आसान होने पर गोमतीनगर की ओर जाने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि ग्रीन कॉरिडोर के सभी चरण पूरे होने के बाद लखनऊ के यातायात का ढांचा काफी हद तक बदल जाएगा। इस पूरी परियोजना का उद्देश्य आईआईएम रोड क्षेत्र को सीधे शहीद पथ और गोमतीनगर से जोड़ना है, ताकि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक आवाजाही ज्यादा तेज और व्यवस्थित हो सके। अभी आईआईएम रोड से गोमतीनगर तक पहुंचने में लोगों को 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है। लेकिन ग्रीन कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क तैयार होने के बाद यही दूरी महज 15 से 20 मिनट में पूरी होने का दावा किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।
13 मार्च को होने वाले कार्यक्रम में केवल लोकार्पण ही नहीं, बल्कि परियोजना के अगले विस्तार की औपचारिक शुरुआत भी होगी। तीसरे और चौथे चरण के तहत समता मूलक चौक से जनेश्वर मिश्र पार्क होते हुए शहीद पथ तक सड़क संपर्क को मजबूत किया जाएगा। इससे लखनऊ का पूर्वी और पश्चिमी हिस्सा अधिक व्यवस्थित तरीके से जुड़ सकेगा। शहरी विकास के नजरिए से देखा जाए तो यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजधानी के भविष्य के ट्रैफिक मॉडल की नींव भी मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका असर आवागमन, ईंधन बचत और यात्रा सुविधा तीनों पर दिख सकता है। ग्रीन कॉरिडोर को एक सामान्य सड़क परियोजना के बजाय आधुनिक शहरी मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके किनारे हरियाली बढ़ाने, बेहतर रोशनी की व्यवस्था करने और सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी जोर दिया गया है। इससे यह कॉरिडोर न सिर्फ यातायात को गति देगा, बल्कि गोमती नदी के किनारे शहर के सौंदर्य को भी नया स्वरूप देगा। उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते शहरी ढांचे के बीच लखनऊ का यह ग्रीन कॉरिडोर विकास और सुगम यातायात का एक अहम उदाहरण बन सकता है। कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
ग्रीन कॉरिडोर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा साफ दिख रही है कि राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करने के साथ-साथ एक आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन ढांचा तैयार किया जाए। 13 मार्च का कार्यक्रम सिर्फ एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि लखनऊ के इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है। अगर परियोजना तय समय में पूरी होती है, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जाम, लंबी यात्रा और अव्यवस्थित ट्रैफिक से काफी हद तक राहत मिल सकती है। ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर आने वाले वर्षों में शहर की नई लाइफलाइन बनकर उभर सकता है। UP News