चर्चित शंकराचार्य के साथ CBI के अफसर की मुलाकात से मचा हड़कंप
सब जानते हैं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 36 का आंकड़ा चल रहा है। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरूद्ध बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। ताजा मुलाकात के कारण उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हलकों में हडक़ंप मचा हुआ है।

UP News : चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की मीटिंग से हडक़ंप मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ CBI के अफसर की यह मुलाकात बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। सब जानते हैं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 36 का आंकड़ा चल रहा है। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरूद्ध बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। ताजा मुलाकात के कारण उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हलकों में हडक़ंप मचा हुआ है।
सामान्य नहीं है शंकराचार्य तथा CBI अफसर की मुलाकात
उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आश्रम स्थापित है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थापित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम का नाम श्री विद्या मठ है। मंगलवार को अचानक CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव उत्तर प्रदेश के श्री विद्या मठ में पहुंचे जहां श्री राव तथा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एकांत कमरे में 25 मिनट तक मुलाकात की। यह मुलाकात उत्तर प्रदेश के राजनैतिक तथा प्रशासनिक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। इस मुलाकात को लेकर शुरूआत में खबर आई थी कि यह शिष्टाचार भेंट हो सकती है। बाद में पता चला कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की यह मुलाकात बहुत ही महत्वपूर्ण है।
CBI के पूर्व डायरेक्टर कर रहे हैं शंकराचार्य मामले की गुप्त जांच
चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की मुलाकात का सच जानने के बाद पता चला है कि CBI से रिटायर्ड होने के बाद एम. नागेश्वर राव ने एक निजी जांच एजेंसी बना रखी है। यह जांच एजेंसी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद और उससे जुड़े पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कर रही है। इसी जांच के सिलसिले में एम. नागेश्वर राव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विस्तार से बातचीत की। जांच का फोकस इस बात पर है कि 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन परिस्थितियां क्या थीं, शंकराचार्य की परंपरागत पालकी यात्रा को क्यों रोका गया, पुलिस और प्रशासन की भूमिका क्या रही और किस बिंदु पर विवाद बढ़ता चला गया। टीम यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि परंपरा और प्रशासनिक निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति कैसे बनी। जानकारी के मुताबिक, एम.नागेश्वर राव की टीम ने इस पूरे मामले में प्रयागराज प्रशासन से पालकी यात्रा की अनुमति, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किए गए नोटिस और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों को लेकर जानकारी मांगी है। इसके साथ ही टीम उस दिन मौके पर मौजूद रहे पत्रकारों, पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी बातचीत करने की तैयारी कर रही है।
शंकराचार्य के चेले ने कर दिया बड़ा दावा
इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शिष्य रह चुके आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जल्द ही जेल में जाना पड़ेगा। इस दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी तथा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लोगों के बीच विवाद भी बढ़ता जा रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लोगों ने आशुतोष ब्रह्मचारी को पुराना अपराधी बताया है। अपराधी बताये जाने पर आशुतोष ब्रह्मचारी ने पलटवार किया है तथा कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कुछ भी कर लें उन्हें जेल जाने से कोई भी नहीं बचा सकता।
अपराधी होने के दावे को बताया फर्जी
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपराधी होने के आरोपों को फर्जी करार दिया है। एक बयान में आशुतोष ने चुनौती दी है कि स्वामी कोई भी ऐसा अदालती सबूत पेश करें जो उन्हें अपराधी साबित करे। आशुतोष का कहना है कि उनके खिलाफ 21 मुकदमों की जो लिस्ट वायरल की गई है, वह पूरी तरह फर्जी है और पुलिस ने भी ऐसी किसी सूची की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद पीडि़त नहीं बल्कि केवल एक 'सूचनाकर्ता' हैं जो बटुकों (बच्चों) को न्याय दिलाना चाहते हैं। बातचीत के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तुलना 'कालनेमी' से की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी एक डिप्टी सीएम के इशारे पर माघ मेले में धरने पर बैठे थे, जिसकी जांच के लिए डीजीपी को पत्र भेजा गया है। आशुतोष ने घोषणा की है कि वे जल्द ही 'सनातन न्याय यात्रा' निकालेंगे ताकि स्वामी की असलियत जनता के सामने ला सकें। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ गवाहों को डराया जा रहा है और झूठी साजिशें रची जा रही हैं।
13 मार्च को अदालत में होगा आमना-सामना
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा आशुतोष ब्रह्मचारी का आमना-सामना 13 मार्च को उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में हो सकता है। आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को एडीजे पॉक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान स्वामी मुकुंदानंद के वकील ने 104 पेज का एफिडेविट दाखिल किया। इसमें आशुतोष पर 27 मुकदमें होने का दावा करते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा-22 और 23 के तहत कार्रवाई की मांग की गई। आरोप है कि आशुतोष ने पीडि़तों की पहचान सार्वजनिक की है। वहीं आशुतोष ने इन दावों को झूठा बताते हुए कोर्ट से मोहलत मांगी है और 'इन पर्सन' यानी खुद बहस करने की इच्छा जताई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च के बाद होगी।
उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा पर लगाया बड़ा आरोप
इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में वाराणसी के एडीशनल पुलिस कमिश्नर तथा IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा की भी एंट्री हो गई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के विरूद्ध बड़ा आरोप लगाया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा उनको झूठे मामले में फंसाने के लिए साजिश कर रहे हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने आरोप के समर्थन में कहा है कि उनके विरूद्ध शिकायत करने वाला आशुतोष ब्रह्मचारी उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा का चेला है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक तस्वीर भी जारी की है। उस तस्वीर में IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ केक काटते हुए नजर आ रहे हैं।

शिकायतकर्ता के साथ IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के पुराने रिश्ते
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केक काटने वाली फोटो जारी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारी के पुराने रिश्ते हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। पुलिस वर्तमान में पॉक्सो एक्ट के तहत मामले की जांच तेज कर चुकी है। अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा जारी की गई तस्वीर में 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक प्लास्टिक के स्टूल पर केक काटते दिख रहे हैं। स्वामी का आरोप है कि शिकायतकर्ता आशुतोष शामली के कांधला का रहने वाला है और अजय पाल शर्मा भी वहां एसपी रह चुके हैं। उनके अनुसार, यह तस्वीर दोनों के बीच पुराने और करीबी रिश्तों को दर्शाती है। इसी आधार पर अब प्रयागराज पुलिस द्वारा की जा रही पोक्सो एक्ट की एफआईआर और पूरी जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं।
UP News : चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की मीटिंग से हडक़ंप मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ CBI के अफसर की यह मुलाकात बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। सब जानते हैं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 36 का आंकड़ा चल रहा है। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरूद्ध बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। ताजा मुलाकात के कारण उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हलकों में हडक़ंप मचा हुआ है।
सामान्य नहीं है शंकराचार्य तथा CBI अफसर की मुलाकात
उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आश्रम स्थापित है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थापित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम का नाम श्री विद्या मठ है। मंगलवार को अचानक CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव उत्तर प्रदेश के श्री विद्या मठ में पहुंचे जहां श्री राव तथा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एकांत कमरे में 25 मिनट तक मुलाकात की। यह मुलाकात उत्तर प्रदेश के राजनैतिक तथा प्रशासनिक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। इस मुलाकात को लेकर शुरूआत में खबर आई थी कि यह शिष्टाचार भेंट हो सकती है। बाद में पता चला कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की यह मुलाकात बहुत ही महत्वपूर्ण है।
CBI के पूर्व डायरेक्टर कर रहे हैं शंकराचार्य मामले की गुप्त जांच
चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की मुलाकात का सच जानने के बाद पता चला है कि CBI से रिटायर्ड होने के बाद एम. नागेश्वर राव ने एक निजी जांच एजेंसी बना रखी है। यह जांच एजेंसी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद और उससे जुड़े पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कर रही है। इसी जांच के सिलसिले में एम. नागेश्वर राव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विस्तार से बातचीत की। जांच का फोकस इस बात पर है कि 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन परिस्थितियां क्या थीं, शंकराचार्य की परंपरागत पालकी यात्रा को क्यों रोका गया, पुलिस और प्रशासन की भूमिका क्या रही और किस बिंदु पर विवाद बढ़ता चला गया। टीम यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि परंपरा और प्रशासनिक निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति कैसे बनी। जानकारी के मुताबिक, एम.नागेश्वर राव की टीम ने इस पूरे मामले में प्रयागराज प्रशासन से पालकी यात्रा की अनुमति, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किए गए नोटिस और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों को लेकर जानकारी मांगी है। इसके साथ ही टीम उस दिन मौके पर मौजूद रहे पत्रकारों, पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी बातचीत करने की तैयारी कर रही है।
शंकराचार्य के चेले ने कर दिया बड़ा दावा
इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शिष्य रह चुके आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जल्द ही जेल में जाना पड़ेगा। इस दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी तथा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लोगों के बीच विवाद भी बढ़ता जा रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लोगों ने आशुतोष ब्रह्मचारी को पुराना अपराधी बताया है। अपराधी बताये जाने पर आशुतोष ब्रह्मचारी ने पलटवार किया है तथा कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कुछ भी कर लें उन्हें जेल जाने से कोई भी नहीं बचा सकता।
अपराधी होने के दावे को बताया फर्जी
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपराधी होने के आरोपों को फर्जी करार दिया है। एक बयान में आशुतोष ने चुनौती दी है कि स्वामी कोई भी ऐसा अदालती सबूत पेश करें जो उन्हें अपराधी साबित करे। आशुतोष का कहना है कि उनके खिलाफ 21 मुकदमों की जो लिस्ट वायरल की गई है, वह पूरी तरह फर्जी है और पुलिस ने भी ऐसी किसी सूची की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद पीडि़त नहीं बल्कि केवल एक 'सूचनाकर्ता' हैं जो बटुकों (बच्चों) को न्याय दिलाना चाहते हैं। बातचीत के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तुलना 'कालनेमी' से की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी एक डिप्टी सीएम के इशारे पर माघ मेले में धरने पर बैठे थे, जिसकी जांच के लिए डीजीपी को पत्र भेजा गया है। आशुतोष ने घोषणा की है कि वे जल्द ही 'सनातन न्याय यात्रा' निकालेंगे ताकि स्वामी की असलियत जनता के सामने ला सकें। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ गवाहों को डराया जा रहा है और झूठी साजिशें रची जा रही हैं।
13 मार्च को अदालत में होगा आमना-सामना
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा आशुतोष ब्रह्मचारी का आमना-सामना 13 मार्च को उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में हो सकता है। आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को एडीजे पॉक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान स्वामी मुकुंदानंद के वकील ने 104 पेज का एफिडेविट दाखिल किया। इसमें आशुतोष पर 27 मुकदमें होने का दावा करते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा-22 और 23 के तहत कार्रवाई की मांग की गई। आरोप है कि आशुतोष ने पीडि़तों की पहचान सार्वजनिक की है। वहीं आशुतोष ने इन दावों को झूठा बताते हुए कोर्ट से मोहलत मांगी है और 'इन पर्सन' यानी खुद बहस करने की इच्छा जताई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च के बाद होगी।
उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा पर लगाया बड़ा आरोप
इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में वाराणसी के एडीशनल पुलिस कमिश्नर तथा IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा की भी एंट्री हो गई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के विरूद्ध बड़ा आरोप लगाया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा उनको झूठे मामले में फंसाने के लिए साजिश कर रहे हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने आरोप के समर्थन में कहा है कि उनके विरूद्ध शिकायत करने वाला आशुतोष ब्रह्मचारी उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा का चेला है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक तस्वीर भी जारी की है। उस तस्वीर में IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ केक काटते हुए नजर आ रहे हैं।

शिकायतकर्ता के साथ IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के पुराने रिश्ते
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केक काटने वाली फोटो जारी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारी के पुराने रिश्ते हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। पुलिस वर्तमान में पॉक्सो एक्ट के तहत मामले की जांच तेज कर चुकी है। अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा जारी की गई तस्वीर में 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक प्लास्टिक के स्टूल पर केक काटते दिख रहे हैं। स्वामी का आरोप है कि शिकायतकर्ता आशुतोष शामली के कांधला का रहने वाला है और अजय पाल शर्मा भी वहां एसपी रह चुके हैं। उनके अनुसार, यह तस्वीर दोनों के बीच पुराने और करीबी रिश्तों को दर्शाती है। इसी आधार पर अब प्रयागराज पुलिस द्वारा की जा रही पोक्सो एक्ट की एफआईआर और पूरी जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं।












